रेलवे खुलेगा रोजगार का दरवाजा
रेल मंत्री ममता बनर्जी ने 2010-11 के लिए रेल बजट पेश कर दिया है। रेलवे एक ऐसा सेक्टर है, जो जॉब देने के मामले में हमेशा से आगे रहा है। हाल के दिनों में रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड ने विभिन्न पदों के लगभग 20000 से अधिक पदों के लिए वैकेंसीज निकाली थी। वैसे देखा जाए तो इस समय भारतीय रेलवे में लगभग 14 लाख लोग कार्यरत हैं। इस रेल बजट में खास बात यह है कि रेलवे की परीक्षाओं में स्थानीय लोगों की बेहतरी के लिए परीक्षा में हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू व स्थानीय भाषाओं को शामिल करने का ऐलान किया है। ये परीक्षाएं एक ही दिन होंगी। महिलाओं और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए परीक्षा की फीस माफ होगी।
होगी नई भर्ती
नेटवर्किंगके मामले में भारतीय रेलवे दुनिया में दूसरे स्थान पर है। इसके विशालतम आकार के मद्देनजर रोजगार की संभावनाएं हमेशा बनी रहती हैं। नए बजट के अनुरूप, नई रेलगाडियों की शुरुआत, टेक्नोलॉजी पर फोकस करने आदि जैसी योजनाओं से रोजगार के अवसरों में और वृध्दि होने की संभावनाएं हैं।
रेलवे में कहां-कहां हैं रोजगार के अवसर…
इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस
भारतीय रेलवे की यह ब्रांच ट्रांसपोर्टेशन और कॉमर्शियल से संबंधित कार्य करता है। यह ब्रांच दो डिविजंस में विभाजित है :
कॉमर्शियल डिविजन : इनकी जिम्मेदारी कॉमर्शियल डील करने की होती है। जैसे-टिकट चेकिंग, केटॅरिंग, ऐडमिनिस्ट्रेशन एेंड स्टेशन मैनेजमेंट, रिजर्वेशन आदि।
ऑपरेशन डिविजन : ट्रेन की चेकिंग, वैगन को जोडना एवं हटाना आदि कार्य इस डिविजन के जिम्मे होता है। यदि आप इस विभाग से जुड़ते हैं, तो प्रोन्नति के अनके अवसर आपके पास होते हैं। प्रोबेशन पीरियड खत्म होने के बाद आप असिस्टेंट कॉमर्शियल सुपरिटेंडेंट (एसीएस) या असिस्टेंट ऑपरेशंस सुपरिटेंडेंट (एओएस) के पद पर प्रोमोट हो सकते हैं।
इंडियन रेलवे अकाउंट सर्विस
जैसा कि नाम से ही जाहिर होता है, रेलवे की यह ब्रांच अकाउंटिंग और फाइनैंस विभाग से संबंधित होती है। इस ब्रांच से जुडने के लिए फाइनैंस व अकाउंट की अच्छी नॉलेज बेहद जरूरी है।
इंडियन रेलवे पर्सनल सर्विस
यह रेलवे का महत्वपूर्ण डिविजन है। इस डिविजन की जिम्मेदारी रिक्रूटमेंट, प्रमोशन, टे्रनिंग, स्टॉफ वेलफेयर, ट्रांसफर और अनुशासन से संबंधित कार्रवाई करने की होती है। अमूमन, इस डिविजन से जुडने के बाद तीन वर्ष तक प्रोबेशन पीरियड पर काम करना पड़ता है।
रेलवे प्रोटेक्शन सर्विस
रेलवे की यह ब्रांच पैरा-मिलिट्री फोर्स द्वारा ऑपरेट की जाती है। ट्रेनों के अंदर कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के साथ-साथ रेलवे परिसर की सुरक्षा व्यवस्था भी इन्हीं के जिम्मे होती है।
रेलवे इंजीनियरिंग सर्विस
रेलवे की यह एक महत्वपूर्ण ब्रांच है। रेलवे टै्रक्स, ब्रिज कंस्ट्रक्शन, रेलवे बिल्ंडिग्स की देख-रेख और प्लानिंग करना इनका मुख्य काम है।
इंजीनियरिंग फील्ड में भी हैं जॉब्स भरपूर
इंजीनियर्स के लिए भारतीय रेलवे में जॉब की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। ये जॉब्स इन निम्र ब्रांचों में हैं :
इंडियन रेलवे सर्विस ऑफ मेकेनिकल इंजीनियर्स
इस ब्रांच के मेकेनिकल इंजीनियर्स डीजल लोकोमोटिव्स और ‘रोलिंग स्टॉकळ को मेंटेन करते हैं। साथ ही, इंजन रिपेयरिंग और मेंटेनेंस करने की जिम्मेदारी इन्हीं पर होती है। इस ग्रुप से जुडने के लिए रिक्रूटमेंट प्रॉसेस दो तरह के होते हैं। पहला, कम्बाइंड इंजीनियरिंग सर्विस परीक्षा और दूसरा, रेलवे ऍप्रेंटिस एग्जामिनेशन। दोनों ही एग्जाम संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित किए जाते हैं।
इंडियन रेलवे सर्विस ऑफ इंजीनियर्स (आईआरएसई)
इस ब्रांच के ऑफिसर सिविल इंजीनियर्स होते हैं। ट्रैक रूट्स, रेलवे स्टेशन, ब्रिज और हाउसिंग कॉलोनियों को प्लान करने की जिम्मेदारी इन्हीं पर होती है। साथ ही, इंजीनियर्स रेल इंडिया टेक्निकल एेंड इकोनॉमिक सर्विस लि. के अधीन प्रॉजेक्ट पर देश या देश के बाहर भी कार्य करते हैं।
इंडियन रेलवे स्टोर्स सर्विस
इस ब्रांच का व्यय-प्लान पांच वर्ष के लिए होता है। इस विभाग की जिम्मेदारी होती है विकास कार्यों के लिए मैटेरियल उपलब्ध करवाना । हालांकि स्टोर कंट्रोलर का करियर प्रोफाइल दूसरे ब्रांचों से कुछ अलग होता है।
सैलॅरी व अन्य सुविधाएं
रेलवे कर्मचारियों को सैलॅरी भारत सरकार के नियमों के अनुरूप ही मिलता है। इसके अलावा, अन्य सुविधाओं में टे्रवॅलिंग अलाउंस, एजुकेशन व हाउसिंग सुविधाएं, पेंशन, हेल्थ केयर, मुफ्त रेलवे यात्रा के अलावा, अन्य सुविधाएं भी मिलती है।
इंडियन रेलवे सर्विस ऑफ सिग्नल इंजीनियर्स (आईआरएसएसई)
इनके जिम्मे रेलवे का विस्तृत नेटवर्क फंक्शन होता है और इस फंक्शन को और बेहतर बनाने के लिए टेक्नोलॉजी अपडेट करने का दायित्व भी होता है। प्रोबेशन पीरियड खत्म होने के बाद, ये असिस्टेंट सिग्नल या टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर्स के रूप में तैनात हो सकते हैं।
इंडियन रेलवे सर्विस ऑफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स
इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स का कार्य विद्युतीकरण के प्रॉजेक्ट को पूरा करना होता है। इसके साथ ही, इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स लोकोमोटिव्स और कोच रिपेयरिंग और मेंटेनेंस का कार्य करते हैं। इनका सबसे महत्वपूर्ण कार्य पॉवर डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क, पॉवर जेनरेशन, इलेक्ट्रिकल डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम आदि को सुनिश्चित करना होता है।

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