बिरला इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (बिट्स)
बनते हैं विश्वस्तरीय प्रोफेशनल
बिरला इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (बिट्स) की स्थापना राजस्थान के पिलानी में 1929 में इंटरमीडिएट कॉलेज के रूप में हुई थी। द्वितीय विश्वयुध्द के दौरान भारत सरकार ने उद्योगों और सैन्य सेवाओं के लिए टेक्नीशियनों की जरूरत के चलते पिलानी में एक तकनीकी ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किया। 1946 में इंस्टीटयूट को इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री प्रोग्राम के साथ बिरला इंजीनियरिंग कॉलेज में बदल दिया गया। 1964 से 1970 तक फोर्ड फाउंडेशन से इसे खासी मदद मिली। मेसाचुएट्स इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नालॉजी के साथ भी इसका गठबंधन रहा। वर्ष 2000 में इंस्टीटयूट ने अपना विस्तार शुरू किया। वर्ष 2000 में इसने संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में अपना कैंपस खोला। 2004 में गोवा और 2008 में हैदराबाद कैंपस शुरू हुए। बेंगलुरु में इंस्टीटयूट का एक्सटेंशन काउंटर है। बिट्स वर्चुअल यूनिवर्सिटी भी चलाता है। इंस्टीटयूट में दूरस्थ शिक्षा की भी व्यवस्था है। दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से फर्स्ट लेवल डिप्लोमा, बीएस, एमएससी (टेक), एमई, एमएस, एमफिल के साथ उद्योगों में काम कर रहे प्रोफेशनल्स को पीएचडी भी कराई जाती है।
प्रवेश प्रक्रिया
इंस्टीटयूट प्रवेश के लिए देशव्यापी ऑनलाइन बिट्स एडमिशन टेस्ट आयोजित करता है। एक मई से 10 जून के बीच ये टेस्ट देश के विभिन्न शहरों में आयोजित किए जाते हैं। इसमें अंग्रेजी, फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ और लॉजिकल रीजनिंग से संबंधित प्रश्न आते हैं। अभ्यर्थियों के लिए हायर सेकेंडरी में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ में 80 फीसदी अंक होना जरूरी है। इनमें भी प्रत्येक विषय में 60 फीसदी का मानक है। बोर्ड परीक्षा में 20-25 तक मैरिट वाले छात्रों को प्रवेश परीक्षा से छूट मिलती है। यहां प्रवेश पाना खासा कठिन है। इंस्टीटयूट के दुबई कैंपस में प्रवेश हायर सेकेंडरी में मिले अंकों के आधार पर होता है।
कोर्स
यहां चार वर्षीय बीई (ऑनर्स), बी. फार्मा (ऑनर्स), एमएससी (ऑनर्स), एमएससी (टेक.) और एमए (ऑनर्स) आदि की पढ़ाई होती है। बिट्स में एमई, एम.फार्मा, एम.फिल आदि डिग्री भी दी जाती हैं। ये डिग्रियां कैमिकल इंजीनियरिंग, कैमिकल इंजीनियरिंग विद स्पेशलाइजेशन इन पेट्रोलियम इंजीनियरिंग, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, ड्राइव इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कंट्रोल आदि में उपलब्ध हैं। इंस्टीटयूट अपने विद्यार्थियों के लिए खासा लचीला रुख अपनाता है और डयूल डिग्री भी प्रदान करता है। डयूल डिग्री का कोर्स पांच साल में पूरा होता है। यहां एक कोर्स से दूसरे में ट्रांसफर का भी विकल्प है। हाल ही में यहां चार वर्षीय मास्टर ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज और दो वर्षीय एमबीए कोर्स भी शुरू किया गया है। पढ़ाई के साथ-साथ इंस्टीटयूट के सभी छात्रों को साढ़े सात माह तक उद्योगों में काम करने का अवसर दिया जाता है। पहले चरण में दूसरे साल की समाप्ति पर दो माह, दूसरे चरण में अंतिम वर्ष में साढ़े पांच माह तक यह अवसर मिलता है। इसके अतिरिक्त प्रथम वर्ष में टॉपर विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप भी दी जाती है।
प्लेसमेंट
बिट्स के छात्रों का प्लेसमेंट आमतौर पर तीसरे सेमेस्टर के बाद ही हो जाता है। अंतिम सेमेस्टर में छात्रों को उद्योगों में ट्रेनिंग दी जाती है। वहीं उन्हें पर्याप्त एक्सपोजर मिलता है और काम करने का अवसर भी। अधिक जानकारी के लिए इंस्टीटयूट की वेबसाइट की मदद ली जा सकती है।


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