दुआओं से हों रोशन करियर के रास्ते
पर्यावरण का बिगड़ता संतुलन, अमीर और गरीब के बीच बढ़ती खाई, आतंकवाद का सामना और विभिन्न देशों के बीच आपसी अमन के रिश्ते कुछ ऐसे गंभीर मुद्दे हैं, जिन पर अब सिर्फ चर्चा करना ही काफी नहीं है। साथ ही, इन समस्याओं का हल अब केवल सरकार के ही वश की बात नहीं है।
सरकार को लोगों का भी साथ चाहिए। अपनी इसी जिम्मेदारी को समझते हुए कई कॉरपोरेट कंपनियां अपने मूल व्यवसाय से अलग अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों के संबंध में भी गंभीरता से सोचने लगी हैं और समाज की बेहतरी के लिए हरसंभव प्रयास करती हैं। इन्हीं प्रयासों को ‘कारपोरेट सोशल रेस्पॉन्सबिलिटी’ का नाम दिया गया है। कॉरपोरेट दुनिया की बढ़ती जागरूकता के चलते आज यह क्षेत्र भी आकर्षक करियर के रूप में सामने आ रहा है।
निभानी होंगी जिम्मेदारियां
‘कॉरपोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी’ आज के समय की जरूरत है। एक ओर यह युवाओं के लिए करियर है, तो समाज के लिए जरूरत। कॉरपोरेट कंपनियां इसके लिए बाकायदा सीएसआर विभाग बनाती हैं या सीएसआर कंसल्टटेंट्स की नियुक्ति करती हैं। इनका मुख्य कार्य कंपनियों के धन का सही इस्तेमाल कराना होता है। ये कंसल्टेंट्स सुनिश्चित करते हैं कि सीएसआर के अन्तर्गत किन क्षेत्रों पर सबसे पहले ध्यान दिया जाना चाहिए, जिससे समाजसेवा के साथ-साथ कंपनी को अपना बिजनेस बढ़ाने में भी मदद मिले और उसकी अच्छी ब्रैंड इमेज टारगेट कस्टमर्स तक पहुंच सके। कंपनी द्वारा दी जा रही सहायता जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी इसी विभाग की होती है।
बढ़ रहा है स्कोप
वे दिन गए,जब कम्पनियों को सिर्फ अपना मुनाफा ही दिखाई देता है और वे समाज और पर्यावरण की बिल्कुल चिंता नहीं करती थीं। आज तमाम कंपनियां अपनी सामाजिक जिम्मेदारियां समझ रही हैं और इस दिशा में छोटे-बड़े स्तरों पर विभिन्न कार्यक्रम भी चला रही हैं। वे पर्यावरण की जागरूकता के लिए कदम उठाती हैं, अमन का संदेश फैलाती हैं, गरीबों की मदद करती हैं और भी तमाम क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारी निभाती हुई बखूबी नजर आती हैं। निश्चित रूप से सीएसआर का क्षेत्र अभी उभरता हुआ क्षेत्र है, जिससे सीएसआर प्रोफेशनल की भूमिका और जिम्मेदारियां काफी जटिल हो सकती हैं। भविष्य में जैसे-जैसे कंपनियों में सीएसआर के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, वैसे-वैसे अधिक सक्षम विशेषज्ञों की जरूरत होगी।
डिग्री नहीं, जज्बा जरूरी
सीएसआर के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए किसी विशेष डिग्री की जरूरत नहीं होती, लेकिन इन क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सभी डिग्रियां काम आती हैं। दरअसल, यह फील्ड इतना नया और एक-दूसरे क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है कि सीएसआर को एक खास डिग्री तक नहीं बांटा जा सकता। इस क्षेत्र में काम करने के लिए एनवायरनमेंटल मैनेजमेंट, फाइनेंस, मार्केटिंग, एचआर सभी फील्ड के डिग्री होल्डर्स आगे आ सकते हैं। वैसे, अब मास्टर्स लेवल पर इस फील्ड से जुड़े कोर्स उपलब्ध होने लगे हैं। कई संस्थान अब एमबीए कोर्स में सीएसआर की पढ़ाई कराते हैं, जो इस फील्ड में एंट्री के लिए निश्चित रूप से सहायक साबित होता है।
आदमी एक, गुण हों अनेक
सीएसआर के फील्ड में काम करने के लिए बहुमुखी प्रतिभा वाला होना चाहिए। बिजनेस स्किल्स, दूसरों को प्रभावित करने की क्षमता, टीमवर्क, तकनीकी ज्ञान, आत्मविश्वास, ओपन माइंडेड, राजनीतिक रूप से जागरूक, व्यक्तित्व विकास पर ध्यान देना, सीखने और सिखाने की ललक जैसे गुण इस क्षेत्र में खास जगह बनाने में मदद करते हैं।
दायरा सिर्फ निजी क्षेत्र ही नहीं
‘कॉरपोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी’ के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए केवल निजी क्षेत्र ही नहीं है, बल्कि सरकारी क्षेत्र में भी अवसर तलाशे जा सकते हैं। तमाम छोटे-बड़े बिजनेस हाउसों की इस ओर बढ़ती जागरूकता रोजगार की नई संभावनाएं पैदा कर रही है। इतना ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भी इस क्षेत्र में काम करने के अवसर मिलते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने कुछ समय पहले ‘ग्लोबल इंपेक्ट’ नाम से एक अभियान आरंभ किया है, जिसमें तमाम अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से मानवाधिकार, श्रम अधिकार और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभाने की अपील की गई है। कई औद्योगिक, सामाजिक, शैक्षिक और गैर-सरकारी संगठन ‘कॉरपोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी’ के क्षेत्र में काफी सक्रिय रहते हैं। इनमें रोजगार के काफी अवसर उपलब्ध हो सकते हैं।


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