मंजिल पाने में मददगार डिस्टेंस लर्निंग
इंसान के अंदर हमेशा कुछ नया जानने व सीखने की इच्छा रहती है। वैसे तो वह हर दिन अपने आसपास के माहौल से व पढ़कर- लिखकर कुछ न कुछ नया सीखता रहता है, लेकिन अगर आप कुछ ज्यादा सीखने की इच्छा रखते हैं, तो डिस्टेंस लर्निंग आपके लिये अच्छा आप्शन बन सकता है।
एक डिस्टेंस लर्निंग इंस्टियूट के को आर्डिनेटर वेढिका पेनगेरकर कहते हैं, ‘डिस्टेंस लर्निंग लोगों को कई तरह की एक्टिविटीज में सक्रिय बनाती है।’ स्टुडेंट गौरव पैनिकर कहते हैं, ‘वे लोग जो रेगुलर क्लास अटेंड नहीं कर पाते, वे इसका पूरा फायदा उठा सकते हैं। बदलते समय के समय अब यह तरीका लोगों के बीच काफी पापुलर होता जा रहा है। यह कोर्स करके आप अपने लक्ष्य को आसानी से हासिल कर सकते हैं।’
कोर्स
डिस्टेंस लर्निंग के माध्यम से ग्रैजुएट, पोस्ट ग्रैजुएट डिग्री और डिप्लोमा कोर्स उपलब्ध होते हैं। इनमें तमाम स्पेशलाइज्ड कोर्स भी कराये जाते हैं। डिस्टेंस लर्निंग के कोर्स में मैटर आमतौर पर तीन तरह से भेजा जाता है- डाक, इंटरनेट और सीडी से।
टेस्ट और मार्क्स
ऐसे कोर्स में समस्या तब आती है, जब स्टूडेंट को टेस्ट देना होता है। उन पर किसी टीचर का सीधा नियंत्रण नहीं होता, इसलिए स्टुडेंट्स को लगता है कि उनके मल्यांकन में भी समस्या आ सकती है। टीचर के लिए भी क्विज या टेस्ट में की गयी चीटिंग का पता लगाना मुश्किल होता है। इन परेशानियों से बचने के लिये अब असाइनमेंट को लंबा और इस तरह तैयार किया जाता है, जिससे यह पता चल सके कि स्टूडेंट ने सब्जेक्ट पर रिसर्च की है या नहीं।


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