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इंजीनियरिंग में है दम

आज भी लोगों में इंजीनियरिंग का जबरदस्त क्रेज है। यदि आप भी इंजीनियरिंग की दुनिया में कदम रखना चाहते हैं, तो बारहवीं में पीसीएम यानी फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ से पास करने के बाद ऑल इंडिया और स्टेट लेवॅल पर होने वाले इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जामिनेशन के लिए आवेदन करते हैं। इंजीनियरिंग का आकर्षण देश में लगातार बढ़ रहा है, क्योंकि कोर्स पूरा करने के बाद बड़ी नेशनल व मल्टीनेशनल कंपनियों में आकर्षक पैकेज पर जॉब मिलता है। खास बात यह है कि बड़ी कंपनियां प्रतिष्ठित संस्थानों में कैंपस सलेक्शन के माध्यम से अंतिम समेस्टर के पूरा होने से पहले ही प्रतिभाशाली स्टूडेंट्स का चयन कर लेती हैं।
क्या है बीई/बीटेक? : बीई का अर्थ है- बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग, जबकि बीटेक का मतलब है- बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी। सिविल, मैकेनिकल पर आधारित परंपरागत इंजीनियरिंग के क्षेत्रों में बैचलर उपाधि को सामान्यतया बीई के नाम से जाना जाता है, जबकि टेक्नोलॉजी (खासकर कम्प्यूटर टेक्नोलॉजी) पर आधारित कोर्स को बीटेक के नाम से जाना जाता है। वैसे, ये दोनों ही एक दूसरे के पूरक और समकक्ष नाम हैं और दोनों ही कोर्स चार वर्ष के होते हैं। एंट्री क्वलिफिकेशन इंजीनियरिंग के बीई या बीटेक कोर्स में एडमिशन के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ से बारहवीं पास होना जरूरी है। बारहवीं की परीक्षा में शामिल होने वाले स्टूडेंट्स भी इसमें सम्मिलित हो सकते हैं, लेकिन एंट्रेंस में पास होने के बाद अंतिम रूप से एडमिशन मिल पाता है। प्रमुख एंट्रेंस एग्जामिनेशंस इंजीनियरिंग कोर्सों में प्रवेश के लिए अखिल भारतीय तथा राज्य स्तर पर प्रति वर्ष कई परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं। इनमें देश की प्रतिष्ठित आईआईटी में प्रवेश के लिए ली जाने वाली आईआईटी जेईई तथा अन्य टॉप इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए ली जाने वाली एआईईईई परीक्षा प्रमुख हैं।
आईआईटी-जेईई : इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी आईआईटी में एडमिशन पाना इंजीनियरिंग करने की चाह रखने वाले हर युवा का सपना होता है। इसके लिए आईआईटी जेईई नाम से प्रवेश परीक्षा ली जाती है। इसमें केवल वे स्टूडेंट्स ही शामिल हो सकते हैं, जिन्होंने कम से कम 60 प्रतिशत अंकों से बारहवीं की परीक्षा पास की हो। साथ ही, इस टेस्ट को केवल दो ही बार दिया जा सकता है। ऐसी स्थिति में आईआईटी में पढ़ने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों को बारहवीं की बोर्ड परीक्षा को पूरी गंभीरता से लेना चाहिए। साथ ही, आईआईटी जेईई पर पूरी तरह से फोकस्ड होना चाहिए। इस परीक्षा के माध्यम से आईआईटीज (दिल्ली, कानपुर, रुड़की, मुंबई, गुवाहाटी, खड़गपुर व चेन्नई) में एडमिशन ले सकते हैं। इसके अलावा, इंडियन स्कूल ऑफ माइंस (धनबाद), बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के आईटी सेंटर और मैरीन इंजीनियरिंग एंड रिसर्च इंस्टीटयूट (कोलकाता) में भी इसी परीक्षा के आधार पर एंट्री मिलती है।
एआईईईई : यानी ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जामिनेशन। इस परीक्षा का आयोजन सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन यानी सीबीएसई द्वारा किया जाता है। इसके माध्यम से देश के विभिन्न भागों में स्थित नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) में प्रवेश दिया जाता है। खास बात यह है कि एनआईटी में 50 प्रतिशत सीटों पर संबंधित राज्य द्वारा संचालित प्रवेश परीक्षा के आधार पर दाखिला दिया जाता है, जबकि शेष 50 प्रतिशत स्थान अन्य राज्यों के कैंडिडेट्स के लिए होता है, जिन्हें एआईईईई के माध्यम से एडमिशन दिया जाता है। इस परीक्षा के आधार पर एआईईईई में सूचीबध्द सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों की करीब 40 हजार सीटों के लिए एडमिशन लिया जाता है। स्टेट लेवॅल एग्जाम्सदेश के तकरीबन सभी राज्यों द्वारा राज्यस्तरीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है, जिनके आधार पर उस राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन प्रदान किया जाता है। अधिकांश राज्यस्तरीय इंजीनियरिंग कॉलेजों की 85 सीटें संबंधित राज्य के स्टूडेंट्स के लिए आरक्षित होती हैं, जबकि शेष 15 प्रतिशत सीटों के लिए अन्य राज्यों के अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। इनमें यूपीटीयूईई, बीसीईसीई-बिहार, सीईई-कर्नाटक, पेट-मध्य प्रदेश, सीएपी-महाराष्ट्र, दिल्ली-सीईई, जेम-पं.बंगाल, सीईईटी-हरियाणा, सीईटी-पंजाब, पेट-राजस्थान आदि प्रमुख हैं। इन सभी की प्रवेश परीक्षाओं के लिए नोटिफिकेशन जनवरी से अप्रैल माह के बीच जारी होते हैं और एंट्रेंस टेस्ट मई-जून में होता है। इंजीनियरिंग एंट्रेंस देश में कुछ ऐसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज भी हैं, जिन्हें डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त है और जो स्वायत्त हैं।

 

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