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डाक्टरों का मरीज बन जाना चिंताजनक

औसत भारतीयों की जीवन आयु के सापेक्ष में यहां के चिकित्सकों की जीवन आयु घटकर अत्यन्त कम हो गयी है और ये असमय काल कवलित हो रहे हैं। चिकित्सा जगत के इन अगुवों की सेहत की रिपोर्ट उनके ही संगठन ने सार्वजनिक कर सबको चिंता में डाल दिया है जबकि भारत वह देश है जहां के चिकित्सकों का दुनिया में डंका बजता है और दुनियां में सबसे सस्ती चिकित्सा सुविधा देने के मामले में अपना भारत सिरमौर है इसलिये भारत मेडिकल टूरिज्म के मामले में शिखर पर विराजमान है। यहां के चिकित्सों की औसत जीवन आयु उनकी स्वयं की बीमारी के चलते घटकर कम हो गयी है।
भारत के चिकित्सक सभी मामलों व मोर्चों में सफल हैं। ये प्रतिदिन सर्वाधिक संख्या में रोगियों को देखते एवं उपचार करते हैं। आम भारतीयों की औसत जीवन आयु 69 से 72 वर्ष के आसपास है जबकि इनको स्वास्थ्य लाभ देने ताला चिकित्सक स्वयं उनसे कम मात्र 55 से 59 वर्ष औसत जीवित रहता है। भले ही इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने रिपोर्ट निष्कर्ष आपने किसी लाभ हेतु दिया हो किन्तु यह दृष्टव्य है कि यहां चिकित्सक स्वयं पैसा कमाने वाली मशीन बन गया है।
यहां का चिकित्सक अधिक पैसा कमाने के फेर में सबसे अधिक व्यस्त व्यक्ति बन जाता है। यदि कहीं चिकित्सकीय ड्यूटी में है तो अलग से घर में या अन्यत्र निजी क्लीनिक भी चलाता है। वह पूरे समय डिस्पेंसरी में, क्नीनिक में, घर में मरीज की जांच, उपचार, देखभाल करने के माध्यम से धन बटोरता रहता है। उसकी दिमागी व्यस्तता, लंबी सिटिंग (बैठक) उसे तरह-तरह की बीमारियां देती है। वह चिकित्सकीय जिम्मेदारी के या अधिक से अधिक धन कमाने के फेर में अपने बिगाड़ते स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह हो जाता है।
चिकित्सक अपनी इसी जिम्मेदारी के या धन लिप्सा के चलते आगे स्वास्थ्य को स्वाह कर डालता है। अपने स्वास्थ्य के प्रति उसकी यही लापरवाही उसके शरीर को खोखला कर देती है। लापरवाही का दीमक बीमारी बन उसकी जीवन आयु को घटाता जाता है। लगातार बैठे रहने, पेशेगत तनाव और जीवन शैली के कारण ज्यादातर डाक्टरों की असमय मौत दिल का दौरा पड़ जाने के कारण हो जाती है। यह असामयिक मृत्यु उन्हें 55 से 59 वर्ष की आयु के दौरान ही हो जा रही है। भारतीय चिकित्सक देश के लोगों की औसत जीवन आयु 69 से 72 वर्ष के सापेक्ष में 15 से 25 वर्ष कम जी रहे हैं।

 

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