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प्रोपर्टी में इन्वेस्टमेंट : फायदे का सौदा

पिछले कुछ सालों से हमारी अर्थव्यवस्था करीब आठ पर्सेंट सालाना की रफ्तार से बढ़ रही है। इकनॉमी की इस वृध्दि ने देश के मिडल क्लास लोगों की इनकम के दरवाजे भी खोल किये हैं। बढ़ती सैलरी, हाउसिंग सेक्टर में टैक्स रिबेट और बैंकों द्वारा दिये जाने वाले हाउसिंग लोन की मदद से तमाम लोगों ने अपने घर का सपना साकार कर लिया है। जो लोग अपना घर बनाकर पहले ही प्रोपर्टी की गाड़ी में सवार हो चुके हैं, अब वे सेकेंड और थर्ड होम के बारे में भी सोचने लगे हैं और इसके पीछे उनका पहला मकसद है इन्वेस्टमेंट। पिछले कुछ सालों में प्रोपर्टी सेक्टर में तेजी से ग्रोथ हुई है। आजकल प्रोपर्टी के जो रेट हैं, कुछ साल पहले तक कोई सोच भी नहीं सकता था कि कीमतें कभी इतनी ऊपर जायेंगी। वैसे, परम्परागत रूप से हम भारतीय कम खर्च करने और पैसे की सेविंग करने के आदी हैं। ऐसे में अपन पैसे को प्रोपर्टी के क्षेत्र में इन्वेस्ट करना एक अच्छा आप्शन हो सकता है।
कमर्शल प्रोपर्टी : बाजार में आजकल तमाम तरह की कमर्शल प्रोपर्टी मौजूद है। उदाहरण के लिए दुकानें, शो-रूप, आफिस स्पेस, कमर्शल लैंड और रिटेल मॉल में स्पेस। अपने इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो के आधार पर इन्वेस्टर्स तमाम कमर्शल प्रोपर्टीज में इन्वेस्ट कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर छोटे इन्वेस्ट कर सकते हैं और इसके बाद किसी बैंक के एटीएम आदि के लिए इसे किराये पर दे सकते हैं। बड़े इन्वेस्टर्स किसी आफिस स्पेस के बारे में सोच सकते हैं और इसे छोटी कम्पनियों को आफिस बनाने के लिए किराये पर दे सकत हैं। अगर आप कमर्शल प्रोपर्टी में इन्वेस्ट करके उसे किराये पर दे रहे हैं, तो साल भर में आपको कम से कम 12 से 14 पर्सेंट का रिटर्न तो मिल ही जायेगा। बाजार की वर्तमान हालत को देखें, तो उम्मीद की जाती है कि प्रोपर्टी में किये गये इन्वेस्टमेंट पर सालभर में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी मिल ही जाती है।
रेजिडेंशल प्रोपर्टी : रेजिडेंशल प्रोपर्टी में इन्वेस्टमेंट करना एक सेफ गेम है। आप फ्लैट्स या घर में इन्वेस्ट कर सकते हैं। रेजिडेंशल प्रोपर्टी में किराये से मिलने वाला रिटर्न आमतौर पर चार से आठ पर्सेंट का होता है और अगर आप इससे मिलने वाले टैक्स बेनिफिट को भी जोड़ लें, तो यह रिटर्न दस पर्सेंट तक पहुंच सकता है। इसके अलावा, प्रोपर्टी के दामों में होने वाली वृध्दि आपका अतिरिक्त लाभ है।
लैंड परचेजिंग : बनी-बनाई प्रोपर्टी के अलावा लोग जमीन खरीदने में आजकल काफी रुचि दिखा रहे हैं। जमीन खरीदना भी हमेशा फायदा का सौदा होता है, लेकिन इससे पहले इस बार में भरपूर रिसर्च कर लेनी जरूरी है। आपके प्लॉट की वैल्यू का बढ़ना सीधे तौर पर इस बात पर निर्भर करता है कि वहां के आसपास के एरिया का विकास कितनी तेजी से हो रहा है? कई बार इन्वेस्टर्स इस आशा में भी जमीन खरीद लेते हैं कि उस एरिया में आने वाले वक्त में मॉल, मल्टीप्लेक्स या कोई कॉलेज खुल सकता है, लेकिन अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो जाहिर है कि उस प्लॉट की कीमत नहीं बढ़ेगी। अगर प्रोपर्टी पर सरकारी कब्जा होने की आशंका है, तो भी कीमतों में कोई कब्जा होने की आशंका है, तो भी कीमतों में कोई इजाफा नहीं होगा।
इनवेस्टमेंट से पहले रखें ध्यान : अच्छी हो लोकेशन
प्रोपर्टी की लोकेशन सबसे महत्वपूर्णम फैक्टर है। लोकेशन ही यह तय करती है कि प्रोपर्टी से आपको कितना रिटर्न मिलेगा। साथ ही, उसके रेट में वृध्दि भी लोकेशन पर ही निर्भर होती है। ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम तक पहुंच और आने वाले समय में उस एरिया के विकास की संभावनाओं को प्रोपर्टी खरीदते वक्त ध्यान में जरूर रखना चाहिए।
कागजात की जांच : कोई भी प्रोपर्टी खरीदते समय उसके पेपर्स की अच्छी तरह जांच बेहद जरूरी होती है। बेहतर होगा कि इन कागजात की जांच किसी वकील से करा लें।
सोचा-समझा फायनांस : अगर आप अपनी प्रोपर्टी खरीदने के लिए लोन ले रहे हैं, तो लोन की शर्तों को अच्छी तरह से समझ लें। हाउसिंग फायनांस कम्पनी के दिये किसी भी कागज पर आनन-फानन में साइन न करें।
जरूरी है सिक्योरिटी : आपकी प्रोपर्टी पर किसी का गैर कानूनी कब्जा हो सकता है। ऐसे में अपनी प्रोपर्टी पर बीच-बीच जाते रहें। अगर आप फिलहाल इसका इस्तेमाल नहीं कर रहे, तो इसकी सुरक्षा का बन्दोबस्त करना न भूलें।
थोड़ा करें इंतजार : प्रोपर्टी में इन्वेस्ट करते समय ध्यान रखें कि यह एक लॉना टर्म इन्वेस्टमेंट है, यानी अगर अप आज कोई प्रोपर्टी खरीद रहे हैं, तो कम से कम पांच साल बाद ही उस पर रिटर्न मिलने की उम्मीद करें।
कनेक्टिरिटी व अन्य सुविधाएं : अगर आप कोई प्लॉट खरीदने जा रहे हैं, तो उससे पहले यह जरूर जांच कर लें कि उस एरिया की महत्वपूर्ण सड़कों से वह जगह कितनी दूर है? साथ ही, उस क्षेत्र में पानी और बिजली की स्थिति भी देख लें।
इसके अलावा, उस क्षेत्र के डेवलेपमेंट प्लान के बारे में लोकल एडमिनिस्ट्रेटिव बॉडी से बात जरूर कर लें। यह भी देखें कि उस एरिया में एसईजेड, सीआरजेड या एनडीजेड जैसी रूकावटें तो नहीं हैं।
कहां है बेस्ट डील : अपने देश में प्रोपर्टी के क्षेत्र में सबसे अच्छा रिटर्न आपको मेट्रो सिटीज में मिल सकता है, लेकिन सप्लाई क्रंच के चलते इन शहरों में प्रोपर्टी के दाम आम आदमी की पहुंच से बाहर हैं। छोटे इन्वेस्टर्स के लिए टियर टु और टियर थ्री सिटीज में इन्वेस्ट करना बेहतर आप्शन हो सकता है।

 

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