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सेफ्टी ग्रिल्स का सही इस्तेमाल जरूरी है

आज सेफ्टी ग्रिल्स का प्रयोग बेहद जरूरी हो गया है। फिर भी उसका सही तरह से प्रयोग नहीं हो रहा है, विंडो सेफ्टी ग्रिल्स का कॉन्सेप्ट रेजिडेंशल बिल्डिंग में सुरक्षा, खासकर बच्चों की सुरक्षा की मद्देनजर काफी प्रचलित हो चुका है। इन दिनों सुरक्षा के लिए बिल्डिंग्स में विंडोज को कवर करने के लिए तरह-तरह के मैटिरियल्स जैसे रॉड आयरन, ऐल्युमिनियम, माइल्ड स्टील, स्टेनलेस स्टील आदि का इस्तेमाल किया जाने लगा है। देश के मेट्रो और अन्य विकासशील शहरों में अधिकांश बिल्डिंग्स में ग्रिल्स का प्रयोग मुख्य रूप से चोरी, गुंडागर्दी और बच्चों को गिरने से बचाने व अन्य एहतियात बरतने की दृष्टि से किया जाता है।
ग्रिल्स का गलत इस्तेमाल
पहले डिवेलपर्स बिल्डिंग्स प्रोजेक्ट में सेफ्टी ग्रिल्स मुहैया नहीं करवाते थे। इसके कारण लोगों को अपने घरों की खिड़कियों पर खुद ही सुरक्षा बंदोबस्त करने पड़ते थे। वही आदत अब भी लोगों में बनी हुई है। नतीजतन, रेजिडेंशल बिल्डिंग्स में खिड़कियों पर अलग-अलग डिजाइन के ग्रिल्स नजर आते हैं। कुछ तो बेहद सिंपल डिजाइन के होते हैं, जबकि कुछ काफी सजावटी किस्म के। ग्रिल्स की बढ़ती डिमांड के कारण आज ग्रिल बनाने वालों का एक पूरा समुदाय तैयार हो गया है, जो इस काम को अंजाम देते हैं। बहुत सारे लोग अपनी खिड़कियों पर केवल सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि फ्लावर पॉट लटकाने, कपड़े सुखाने, एयरकंडीशन लगाने और यहां तक कि कभी-कभी बच्चों की साइकिल वगैरह रखने के लिए भी ग्रिल्स लगवाते हैं। बहुत सारे घरों में लोग खिड़कियों के बाहर ग्रिल्स के माध्यम से इंटीरियर को बढ़ाकर उसे परमानेंट स्टोरेज प्लेस बना लेते हैं।
सुंदर दिखते हैं एक से डिजाइन
बिल्डिंग में रहने वाले लोगों द्वारा अपनी-अपनी खिड़कियों के बाहर लगाए गए सेफ्टी ग्रिल्स अंतत: बिल्डिंग की बाहरी सजावट को ही बिगाड़ते हैं। चूंकि ये अलग-अलग डिजाइंस, शेप और साइज में होते हैं, इसलिए इनमें कोई यूनिफॉर्मिटी नहीं होती, जिससे यह देखने में भद्दी लगती हैं। इसके अलावा विंडो ग्रिल्स का विविध इस्तेमाल भी बिल्डिंग्स के बाहरी लुक को बिगाड़ता है। बिल्डिंग का ओरिजिनल लुक ढूंढने से भी नहीं मिलता। साथ ही, इन सेफ्टी ग्रिल्स को फिट किए जाने के दौरान जब ड्रिल आदि किया जाता है, तो उससे बिल्डिंग के बाहर प्लास्टर के सुरक्षा कोट की परतें उखड़ जाती हैं, जिससे धीरे-धीरे बिल्डिंग की दीवारों में पानी रिसने लगता है और लीकेज की समस्या खड़ी हो जाती है। इससे बिल्डिंग की दीवारें भी कमजोर होने लगती हैं।
बदल रहा है ट्रेंड
अब ज्यादातर हाउसिंग सोसायटीज डिजाइन कंसल्टेंट्स की मदद से शुरू में ही ग्रिल फीट करवाने का काम कर रही है। उनकी कोशिश रहती है कि हर खिड़की पर लगने वाले ग्रिल्स का डिजाइन और साइज एक जैसा हो। लेकिन पहले से फिट हो चुके ग्रिल्स बदलवाने में लोग दिलचस्पी नहीं दिखाते, क्योंकि वे दोबारा एक्स्ट्रा खर्च नहीं करना चाहते। साथ ही, विंडो ग्रिल्स का वे अपने हिसाब से इस्तेमाल कर रहे होते हैं, जिसके वे आदी हो चुके हैं। बहुत से लोग ऐसे होते हैं, जो खिड़कियों में ग्रिल लगवाना ही नहीं चाहते। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर बिल्डिंग का एक समान लुक कैसे मेंटेन किया जाए? कैसे ग्रिल्स का मिस्यूज रोका जाए?
क्या हो प्रैक्टिकल सोल्यूशन
समस्या के समाधान का व्यावहारिक तरीका यह है कि ग्रिल्स को घर के अंदर की तरफ लगाया जाए या फिर ‘कोलैप्सेबल ग्रिल’ लगाएं जाएं। कोलैप्सेबल ग्रिल को विंडो के अंदर की तरफ फिक्स किया जा सकता है। इन्हें खोलना-बंद करना आसान होता है और जब जरूरत हो, इन्हें लॉक भी किया जा सकता है। कोई भी इन्हें आसानी से लगवा सकता है और नई बन रही बिल्डिंग में इन्हें शुरू में ही लगवाया जा सकता है। इसे लगवाने के कई फायदे हैं-
= इससे बिल्डिंग का बाहरी लुक जैसे का तैसा बना रहेगा।
= बाहर की तरफ लगने वाले ग्रिल के मिस्यूज से बचा जा सकेगा।
= बिल्डिंग का बाहरी प्लास्टर निकलने और उसके बाद होने वाले सीपेज व लीकेज की समस्या से भी निजात मिलेगी।
= अंतत: इससे रिपेयर कॉस्ट में कमी आएगी।
हालांकि इन्हें लगाने से घर का इंटीरियर बिगड़ सकता है, लेकिन उसके भी उपाय हैं। कोलैप्सबल ग्रिल के मामले में उन्हें विंडो और कर्टेन या वुडन पैनलिंग के बीच की जगह में फिट कराया जा सकता, जिससे खुली रहने की स्थिति में ये छिपी रहेंगी। सुरक्षा और सुदरता, दोनों बनाए रखने का यही एकमात्र उपाय है। हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले लोगों को अब अपनी व्यक्तिगत जरूरतों से ऊपर उठकर बिल्डिंग के एक्सटीरियर के बारे में भी सोचना चाहिए। बिल्डिंग्स खूबसूरत होगी, तभी शहर भी खूबसूरत बन सकेगा।

 

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