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शानदार दिखने के साथ आरामदायक भी हो किचन

एक औसत भारतीय अपनी जिंदगी का काफी वक्त किचन में गुजारता है। किचन आपके घर का एक अहम हिस्सा होता है और जब आप अपना अच्छा-खासा वक्त इसमें गुजारते हों, तो इसे जीवंत बनाना भी जरूरी है। आजकल माड्यूलर किचन का जमाना है। क्राउन माल्डिंग, सजावट के लेटेस्ट सामान, स्टाइलिश हार्डवेयर और फिटिंग्स आपके किचन को ऐसा आलीशान लुक देंगे कि आप देखते रह जायेंगे।
दरअसल किचन की बढ़िया सजावट के कई पहलू होते हैं। इसमें किचन का ले-आउट, आकार, स्टोरेज, स्पेस से लेकर कलर स्कीम तक सब कुछ शामिल है। बढ़िया किचन बनाना हो, तो इन सभी पहलुओं पर गौर करना पड़ता है। ऐसे किचन के लिये आप कुछ खास टिप्स का इस्तेमाल कर सकती है। क्लासिकल किचन यानी कापी बुक स्टाइल के किचन में ओक की लड़की का इस्तेमाल होता है। लेकिन आजकल के किचन में सजावट के लिये चेरी या फिर मेपल की लड़की का इस्तेमाल होता है। आकार के हिसाब से सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है यू शेप। इससे किचन में काम करने वाला शख्स यू शेप की वजह से बनने वाले वर्क ट्राएंगल का पूरा इस्तेमाल कर सकता है। इसके बाद पसंद किये जाते हैं एल शेप वाले किचन। फिर नंबर आता है गेलीशेप और आईलैंड किचन का।
उपकरणों की फिटिंग का रखें ध्यान
आजकल के रसोई घरों में स्टेनलेस स्टील और उस पर जस्ते की फिनिशिंग वाले उपकरणों का काफी इस्तेमाल होता है। चांदी और सोने की कलई वाले डिनर सेट तो अमीरों की रसोई की शान होते हैं, लेकिन अब इनका चलन मिडल क्लास में भी बढ़ रहा है। शीशे के कैबिनेट बोनचाइना के सेट की झलक दिखाने के काम आते हैं, तो लकड़ी के पैनल वाली अलमारियां भी काफी लोकप्रिय हैं। डिजाइनर किचन में इस बात का ध्यान रखना चाहिये कि कुकिंग रेंज, अवन, डिश-वॉशर और सिंक के लिये पर्याप्त जगह हो और ये सब एक जगह फिक्स हों। इस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिये कि किचन काउंटर टिकाऊ तो हो ही। साथ ही यह खूबसूरत दिखें और इन्हें साफ करना भी आसान हो।
पर्याप्त हो स्टोरेज स्पेस
आजकल ग्रेनाइट पत्थरों से बने किचन के अलावा स्लेट पत्थरों, मार्बल के स्लैब्स और मोजेक टाइल्स से लैस किचनों का चलन है। इनसे किचन की खूबसूरती काफी बढ़ जाती है। लेकिन याद रखें किचन ऐसा हो, जिसमें स्टोरेज स्पेस काफी हो। ये स्टोरेज स्पेस अलग-अलग डिजाइन के आधार पर बनाये जा सकते हैं। रोल-आउट सेल्फ से लेकर, वर्टिकल ट्रे डिवाइडर, पुलआउट्स कैबिनेट और आगे खिसाकाए जाने वाले ड्राउर काफी लोकप्रिय हैं। इनके अलावा डस्टबीन या री-साइकिल बिन की भी जरूरत होगी, ताकि आप उनमें फल या सब्जियों के छिलके डाल सकें। साथ ही आपको रसोई में बिजली से चालाये जाने वाले सामान के लिये भी जगह फिक्स करनी होगी।
फर्श को नजरअंदाज न करें
पूरे किचन की रूपरेखा बनाते समय आपको फ्लोरिंग मैटिरियल का काफी ध्यान रखना होगा। किचन का फ्लोर घर के बाकी फ्लोर से अलग न हो। फ्लोर की टाइलिंग ऐसी हो, जिससे आपको ठंडा न लगे। कभी-कभी ऐसी टाइल लगा दी जाती है, जो ठंडी होती है, इसलिये इससे बचना चाहिये। अगर आपको ऐसी टाइल्स चाहिय ही, तो फिर आपको इसके ऊपर छोटा कालीन भी रखना होगा, ताकि ज्यादा देर तक खड़े रहने पर आप ठंड से बच सकें।
लाइटिंग से लगाएं चार चांद
अब बात करते हैं लाइटिंग की। दिलो-दिमाग को सुकून देने वाली सजावटी लाइटिंग आपके किचन स्पेस में चार चांद लगा सकती है। अगर इसी में छोटा सा डाइनिंग भी हो और लाइटिंग स्पेस भी हो और लाइटिंग इसे एक खास और अलग स्पेस का अहसास दिलाती हो, तो फिर क्या कहने। इन दिनों जो किचन-कान्सेंट चल रहा है, उसमें लाइटिंग का अहम रोल होता है।
बेहतर किचन के लिये
किचन री-माडलिंग यानी अपने किचन को एक सुकूनदेह और खूबसूरत तरीके से डिजाइन का ट्रेंड जोर पकड़ रहा है। हर कोई अपने किचन को बेहतरीन लुक देना चाहता है। फिर चाहे मकान कितना ही पुराना क्यों न हो, लेकिन किचन के ला-आउट और डिजाइनिंग का स्कोप हमेशा बना रहता है। अगर आप अपने पुराने किचन कोफिर से डिजाइन कर नया लुक दे सकें, तो खाना बनाते समय आप हर समय सुकून और आराम महसूस करेंगी। आइए आपको बताते हैं एक बेहतर किचन में क्या-क्या होना चाहिये।
सीटिंग एरिया : एक छोटे किचन में छोटे ब्रेकफास्ट टेबल की गुंजाइश हो सकती है, जबकि बड़े किचन में पूरा डिनर टेबल लगाया जा सकता है। अगर आपक ड्राइंग या लिविंग रूम किचन से लगा है, तो इसके एक हिस्से को किचन का रूप दिया जा सकता है। इससे किचन बड़ा लगेगा और लोगों को बैठने की ज्यादा जगह मिलेगी।
कहां रखें फ्रिज : कुकिंग हब के पास फ्रिज को न रखें। फ्रिज रखने का सबसे आइडियल स्पेस है किचन का एंट्रेंस और कुकिंग एरिया के बीच की जगह। यह वो जगह है, जहां घर के सभी सदस्यों की पहुंच आसान रहेगी।
किचन आकार : एक आइडियल किचन वही होता है, जिसमें चलने-फिरने की पर्याप्त जगह तो हो ही, साथ ही सिंक, खाना बनाने और कुकिंग से पहले की तैयारी की भी पर्याप्त जगह हो। काटने-छीलने के लिए काउंटर से लेकर खाना बनाते समय कम से कम दो लोगों के लिये तो पर्याप्त जगह हो ही। दो रास्ते वाले गेली किचन काफी लोकप्रिय हैं।
एल शेप और यू शेप वाले किचन भी खासे पसंद किये जाते हैं। टू वे गेली किचन में वर्कटाप (कुकिंग स्लैब) के नीचे स्टोरेज के लिए जगह होती है। कप-बोर्ड कुकिंग एरिया के सामने वाली दीवार पर होता है, ताकि सामान लेने के लिये ज्यादा चलना न पड़े। गेली किचन काफी काम्पेक्ट होता है और दो गेली के बीच काफी जगह होती है। एल शेप वाले किचन में काम करने के लिये और स्टोरेज के लिये ज्यादा जगह होती है। ऐसे किचन में ज्यादा चलना नहीं पड़ता और किचन के कोनों को डाइनिंग स्पेस की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। यू-शेप किचन में वर्कस्पेस और स्टोरेज एरिया सबसे ज्यादा होता है, लेकिन फ्लोर एरिया कम होता है। जिन लोगों को खुद खड़े होने के लिये ज्यादा जगह की जरूरत पड़ती है, उन्हें ऐसा किचन नहीं बनवाना चाहिये।
इस किचन के एक हिस्से को आप ब्रेकफास्ट बार और दूसरे को आईलैंड काउंटर के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। किचन डिजाइन करते समय यह बात जरूर ध्यान रखनी चाहिये कि वह कितना यूजर प्रेंडली है। यानी आपको किचन में काम करने में सहूलियत हो रही है या नहीं। अगर ऐसा नहीं है, तो बेहद खूबसूरत दिखने वाले किचन में काम करके भी आप असहज महसूस करेंगी। याद रखिये लुक से ज्यादा जरूरी है आपकी सुविधा। इसलिए कुछ और जरूरी बातों का हमेशा ध्यान रखें।
1. किचन ट्राइएंगल पर ज्यादा जोर न दें। ट्राइएंगल किचन में सिंक, फ्रिज या कुकिंग रेंज के लिये मुफीद होता था। लेकिन अब कांसेप्ट बदल चुका है। आजकल स्टेशन किचन पर ज्यादा जोर है। अब अलग-अलग काम के लिये अलग-अलग स्टेशन होते हैं। मसलन बर्तन धोने के लिये एक स्टेशन, खाना रखने के लिये दूसरा स्टेशन, तो खाना बनाने के लिये तीसरा स्टेशन।
2. किचन कभी भी एक व्यक्ति के हिसाब से डिजाइन न कराएं। याद रखिये किचन में सिर्फ हाउसवाइफ ही नहीं जाती। इसे परिवार के हर सदस्य लिये सुकून देने वाली जगह बनाने की कोशिश करनी चाहिये। किचन में आईलैंड हो या फिर कुछ फर्नीचर तो जरूर रखे जाने चाहिये, ताकि परिवार का हर सदस्य वहां रिलैक्स महसूस करे।
3. किचन में हमेशा कुछ स्पेस भी रखें। लोग अक्सर किचन में स्पेस का ध्यान रखे बिना खाना बनाने का ओवरसाइज सामान खरीद लेते हैं। मसलन बड़ा अवन या 48 ईंच की कुकिंग रेंज। लेकिन उनके पास अवन रैक या कुकिंग सीट्स रखने की जगह नहीं होती। नतीजतन सारे एसेसरीज या सहायक उपकरणों को वर्कटाप पर ही रख दिया जाता है। ऐसे में खाना बनाने के लिये जगह ही नहीं बचती। जब तक जरूरत न हो ऐसा सामान बिल्कुल न खरीदें, जिसकी काफी एसेसरीज होती हैं।

 

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