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शिक्षा का अधिकार बदलेगा शहरों की रियल्टी

शिक्षा का अधिकार (राइट टू एजुकेशन) यानी आरटीई शहरों की रियल्टी को बदलने वाला है। कानून के तहत 6 से 14 वर्ष के बच्चों को अनिवार्य और नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसके लिए स्कूलों की भारी कमी होनी तय है। राज्य सरकारों को स्थानीय नगर निकायों के सहयोग से नेबरहुड़ स्कूलों के लिए ऐसे भूखंडों को तलाशना है जहां कम खर्च में काम हो सके। तीन किलो मीटर के अन्दर एक नेबरहुड़ स्कूल होना चाहिए। सरकारों को अपने शहरों के मास्टर प्लान में बदलाव करना होगा। प्रारंभिक सर्वे में ऐसे छात्रों की संख्या लगभग एक करोड़ से अधिक है। वर्तमान स्कूली व्यवस्था नाकाफी है। बड़ी संख्या में स्कूली इमारतें बनानी होगी। नगर निकायों को व्यापक रणनीति बना कर काम करना होगा।
राज्य सरकारों को दो स्तर पर काम करना होगा। पहला कि बस्तियों में नए प्लाटों पर स्कूली इमारतों का निर्माण कितना संभव है और दूसरा ऐसी कितनी सरकारी इमारतें हैं जिन्हें इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित कर स्कूल बनाए जा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर भूखंडों का लैंड यूज प्रावधान की बदलना होगा। इस परियोजना में 55 फीसदी खर्च केन्द्र सरकार तथा 45 फीसदी खर्च राज्य सरकारें वहन करेंगी। आरटीई की सफलता तभी होगी जब नेबरहुड स्कूलों की उपलब्धता आसान होगी।

 

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