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तो लीज एग्रीमेंट को खत्म समझिए

लीज एग्रीमेंट तब तक ही लागू रहता है, जब तक कि इसकी समय सीमा तय होती है। कुछ परिस्थितियों में इसे तुरंत भी समाप्त किया जा सकता है। क्या हैं वे स्थितियां, आइए आपको देते हैं इस बारे में कुछ जानकारियां :
क्या आपको पता है कि किन हालात में लीज एग्रीमेंट को समाप्त किया जा सकता है। दरअसल, लीज एग्रीमेंट होने का ही यह मतलब है कि इसकी एक न एक दिन समाप्ति होगी। ट्रांसफर आफ प्रॉपर्टी एक्ट 1882 के तहत किसी अचल संपत्ति की लीज कुछ विशेष हालात में तय की जाती है।
किन हालात में लीज अग्रीमेंट को समाप्त किया जा सकता है-
* लीज में तय की गई अवधि के समाप्त होने पर।
* अगर यह समय किसी घटना के होने पर निर्भर है तो उस घटना के होने पर।
* किसी खास घटना के होने पर लीज देने वाले का प्रॉपर्टी में हित खत्म हो जाता है तो उस घटना के होने पर।
* अगर लीज पर देने वाले और लेने वाले के प्रॉपर्टी में हित समान हो जाएं। जैसे, अगर लीज लेने वाला और लीज देने वाला व्यक्ति एक ही हो- यानी लीज पर लेने वाला व्यक्ति किराये पर ली गई प्रॉपर्टी को खरीद लेता है। अगर लीज पर प्रॉपर्टी लेने वाला व्यक्ति लीज के तहत अपने हितों को लीज देने वाले के हाथों में सौंप देता है और यह काम उनके बीच आपसी सहमति से हुआ हो।
* अगर समर्पण सांकेतिक हो। मसलन, लीज पर लेने वाला शख्स लीज पर देने वाले नई लीज स्वीकार कर लेता है, जबकि मौजूदा लीज अभी प्रभावी हो। तो वह पुरानी लीज का सांकेतिक तौर पर समर्पण हैं।
* जब्ती के कारण भी लीज को समाप्त समझा जाता है।
* जब्ती के बाद माफ भी किया जा सकता है। अगर जब्ती के बाद का किराया स्वीकार कर लिया जाता है। या फिर लीज पर देने वाला व्यक्ति कोई ऐसा काम करे, जिससे यह लगे कि वह लीज को जारी रखना चाहता है।
* नोटिस को भी माफ किया जा सकता है। मान लीजिए कि लीज पर प्रॉपर्टी देने वाला शख्स मोहन है और लेने वाला सोहन है। मोहन प्रॉपर्टी खाली करने के लिए सोहन को नोटिस देता है। नोटिस की अवधि खत्म हो जाती है। मोहन नोटिस की अवधि के बाद का किराया मोहन को देता है और सोहन किराया स्वीकार कर लेता है। ऐसे में नोटिस को माफ समझा जाएगा।
* अगर किसी केस में किराया नहीं दिया गया हो और लीज पर देने वाला व्यक्ति प्रॉपर्टी खाली कराने के लिए मुकदमा कायम करता है। इसके बाद लीज पर लेने वाला व्यक्ति बकाया किराया ब्याज समेत सौंपकर मुकदमे का खर्च भी चुका देता है तो अदालत प्रॉपर्टी खाली कराने की जगह लीज पर लेने वाले को राहत भी दे सकती है।

 

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