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दक्षिण-पूर्व में प्रवेश द्वार यानी शक्तिशाली महिलाएं

वास्तु वास्तव में एक विज्ञान है, जिसमें विभिन्न दिशाओं से आने वाली ऊर्जा प्रबंधन का काम किया जाता है। हर दिशा की अपनी खास विशेषता होती है और ये विशेषताएं उस क्षेत्र विशेष की ऊर्जा से संबंधित होती हैं। यह काफी कुछ सूरज की किरणों और धरती के गुरुत्वाकर्षण पर भी निर्भर करती हैं। ये ऊर्जाएं यह तय करती हैं कि अमुक घर के स्वामी पर किसी खास दिशा का क्या प्रभाव पड़ेगा। उदाहरण के लिये यहां उत्तर दिशा का जिक्र किया जा सकता है। उत्तर दिशा को धन की दिशा माना जाता है। लेकिन यहां यह भी बता देना आवश्यक होगा कि उत्तर दिशा को महिलाओं से जोड़कर भी देखा जाता है। इसलिये ऐसे घर में इस बात की संभावना है कि यहां महिलाओं से जुड़े ज्यादा मुद्दे हों।
वक्त बदल रहा है। जाहिर है, हमारी सामाजिक संरचनाओं में भी बदलाव हो रहा है। परिवार के सदस्यों के बीच के संबंधों को हर रोज नयी परिभाषा और अर्थ मिल रहे हैं। ऐसे में हम सदियों पुरानी मान्यताओं पर ठीक उसी तरह अमल नहीं कर सकते, जिस तरह कि किसी जमाने में उन पर किया जाता होगा। हमें यह नहीं भूलना चाहिये कि उन दिनों सामाजिक मापदंड कुछ और हुआ करते थे। आज समय की जरूरतों में भी बदलाव आ रहा है और हमें इन बातों को ध्यान में जरूर रखना चाहिये। वह ऐसा वक्त था, जब महिलाएं परिवार में कोई खास आर्थिक योगदान नहीं दिया करती थीं और आमतौर पर घर पर ही रहती थीं। लेकिन आज की तारीख में महिलाएं आर्थिक मोर्चे पर काफी सक्रिय हो गयी हैं और यहां तक कि कारपोरेट्स का नेतृत्व भी कर रही हैं। घर पर तो वह अपने जलवे दिखा ही रही हैं, साथ ही बहुराष्ट्रीय कंपनियों में भी अपनी प्रभुता साबित कर रही हैं। इन दिनों महिलाएं काफी ताकतवर हो गयी हैं। इस बात में कोई दो राय नहीं हो सकती। हर दिन वे सफलता के नये आयाम स्थापित कर रहीं हैं और उनसे अपेक्षाएं भी बढ़ती ही जा रही हैं। इसलिये ऐसी स्थिति में सदियों पुरानी मान्यताओं व नियमों को पुरानी शैली में ही हूबहू अमल में लाना आधुनिक काल की महिलाओं के लिये संभव नहीं होगा। हमें महिला सदस्यों के विकास पर अंकुश नहीं लगाना चाहिये। खासकर तब जब वे परिवार की एक कामऊ सदस्य हों।
जिन महिलाओं ने जीवन में शानदार सफलताएं हासिल की हैं और समाज में अपना एक खास रूतबा कायम किया है, उनमें से कई पुरुषों की इस दुनिया में अकेली रह रही हैं। लेकिन उनमें समाज को बदलने की क्षमता है। ऐसे में यह सवाल उठाना लाजमी है कि महिलाओं के तेजी से हो रहे विकास के पीछे कौन सी ताकत है। आखिर वह कौन सी शक्ति है, जो उन्हें पूरी दुनिया को अकेले ही फेस करने की हिम्मत दे रही है।
वास्तु के सिध्दांतों के मुताबिक दक्षिण-पूर्व दिशा को महिला के सशक्तिकरण से जोड़कर देखा जाता है। मतलब यह कि यदि किसी घर का प्रवेश द्वार दक्षिण-पूर्व दिशा में है, तो उस घर की महिलाएं ताकतवर होंगी। लेकिन क्या सिर्फ प्रवेश द्वार ही किसी महिला को इतनी ताकत दे सकता है।
वैसे, दक्षिण-पूर्व में प्रवेश द्वार वाले घरों को नकारात्मक और अशुभ माना जाता रहा है। लेकिन बदलते दौर में, दक्षिण-पूर्व प्रवेश द्वार वाले घर सकारात्मक परिणाम भी दे रहे हैं।

 

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