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एजुकेशन लोन, साकार करें सपना

कैसे मिलता है बैंक से लोन
बैंक एजुकेशन देने से पहले उसकी रिपेमेंट सुनिश्चित करता है। आमतौर पर लोन उसे ही दिया जाता है, जो इसे वापस करने की क्षमता रखता है। रिपेमेंट चाहे, तो लोन लेने वाले के अभिभावक करें या फिर लोन लेने वाला पढ़ाई खत्म करने के बाद करे। ऐसे मामले में गारंटर की जरूरत पड़ती है। गारंटर लोने लेने वाले अभिभावक और रिश्तेदार हो सकते हैं।
एजुकेशन लोन का दायरा
बैंक किसी भी कोर्स के लिए होने वाले खर्चों की पूर्ति करने के लिए वित्तीय मदद मुहैया कराता है। एजुकेशन लोन के दायरे में देश और विदेश में पढ़ाए जाने वाले कोर्स शामिल हैं। आप चाहें, तो किसी के लिए भी बैंक से लोन ले सकते हैं। भारत में बारहवीं की स्कूली शिक्षा, ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन, पी.एच.डी, इंजीनियरिंग, मेडिकल, एग्रीकल्चर, वेटेरनरी, लॉ, डेंटल, मैनेजमेंट, कम्प्यूटर, मान्यता प्राप्त प्रतिष्ठित संस्थानों के कम्प्यूटर कोर्स, आईसीडब्यूए, सीए आदि जैसे कोर्स के लिए एजुकेशन लोन ले सकते हैं। यदि आप विदेश में पढ़ाई की चाहत रखते हैं, तो प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी के जॉब ओरिएंटेड प्रोफेशनल या टेक्निकल कोर्स, ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन, एमसीए, एमबीए, एमएस आदि के लिए भी एजुकेशन लोन ले सकते हैं।
किसके लिए मिल सकता है लोन
स्कूल, कॉलेज और हॉस्टल की फीस, परीक्षा, लाइब्रेरी और लेबोरेटी की फीस, किताबें, इक्विपमेंट, इंस्टूमेंटस, यूनिफॉर्म खरीदने के लिए, कॉशन डिपॉजिट, बिल्डिंग फंड, रिफंडेबल डिपॉजिट (इसके साथ इंस्टीटयूट का बिल, रसीद हो), विदेश में पढ़ाई के लिए यात्रा खर्च, रास्ते का खर्च, स्टडी टूर, प्रोजेक्ट वर्क, थीसिस इत्यादि।
आपकी जरूरत
जब आप एजुकेशन लोन लेने का मन बना लेते हैं, तो आप पहले से ही यह अंदाजा लगा लें कि आपकी जरूरत कितनी है? अलग-अलग मद में कितना खर्च होगा? पढ़ने के लिए कहां जाना है? कितना समय लगेगा? इसपर विचार करने के बाद ही अपना बजट तैयार करें कितना बोझ आप खुद उठा सकते हैं।
लोने लेने से पहले ध्यान दें
मंदी के कारण आजकल मार्केट की स्थिति काफी बेहतर नहीं है। ऐसे में जान लें कि आप जो लोन लेने जा रहे हैं। उसकी रिपेमेंट सही समय पर हो जाए। इसलिए लोन उतना लिया जाए जितना आप उठा सकें। नौकरी लगने के बाद रिपेमेंट के ऑपशन पर विचार करने से पहले सभी विकल्पों और अच्छी-बुरी सभी प्रकार की संभावनाओं पर पूरी तरह विचार कर लिया जाना चाहिए। बेशक बाजार की मांग और आपूर्ति का इस सेक्टर पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता, लेकिन फ्लोटिंग रेट का असर जरूर पड़ता है। विशेषकर लम्बी अवधि के लोन फ्लोटिंग रेट से प्रभावित होते हैं।
लोन चुकाने के अवसर
बैंक अन्य लोन की ही तरह एजुकेशन लोन पर भी ब्याज वसूलता है, लेकिन यह वसूली करने के लिए उसके पास मुख्य रूप से तीन विकल्प हैं। इनमें एक आकर्षक जरिया है मोरेटोरियम पीरियड जिसे रिपेमेंट हॉलीडे भी कहा जाता है। इसमें विकल्प होता है कि लोने लेने वाला लोन की रिपेमेंट जिस कोर्स में एडमिशन लिया गया है उसकी समाप्ति के बाद कर सकता है।
रिपेमेंट मोरेटोरियम : कई बैंक कोर्स की समाप्ति के एक बर्ष बाद या नौकरी लगने के छह महीने बाद रिपेमेंट शुरू करने का विकल्प भी देते हैं।
कोर्स के दौरान सिर्फ ब्याज का भुगतान : कोर्स पूरा करने के बाद वास्तविक ईएमआई (मूल और ब्याज) का पेमेंट करना होगा। लोन मिलने के तुरंत बाद ईएमआई का भुगतान कर सकते हैं। इस बारे में कई बैंक ब्याज दर पर डिस्काउंट भी दे सकते हैं।
लोन पर ब्याज
आमतौर पर एजुकेशन लोन पर ब्याज की दर पसर्नल लोन के रेट से कम होती है, लेकिन होम लोन से थोड़ी ज्यादा होती है। कुछ बैंक फिक्स रेट चार्ज करते हैं, तो कुछ फ्लोटिंग रेट पर। इन दोनों में करीब एक प्रतिशत का अंतर होता है। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि एजुकेशन लोन की अवधि पांच से सात वर्ष की होती है, इसलिए रिपेमेंट के लिए फिक्स रेट का ऑप्शन नहीं देते। ऐसे में जरूरत है वास्तविक फिक्स रेट की जानकारी लेने की अर्थात उसमें किसी प्रकार का रिसेट लेने वाले की जोखिम उठाने की क्षमता पर भी निर्भर करता है। कई बैंक लड़कियों के लिए ब्याज की दर में डिस्काउंट का ऑप्शन भी देते हैं।
लोन लेने पर कितनी प्रोसेसिंग फीस
इन दिनों कई बैंक एजुकेशन लोन के लिए प्रोसेसिंग फीस चार्ज नहीं करते। जिस बैंक से आप लोन ले रहे हैं और यदि वह आपसे प्रोसेसिंग फीस की मांग कर रहा है, तो आप उस बैंक के साथ नेगोसिएशन भी कर सकते हैं। आम तौर पर सभी बैंक उस स्थिति में प्री-पेमेंट फीस चार्ज नहीं करते जब लोन लेने वाला अपने बूते लोन की प्री-पेमेंट करता है। लेकिन लोन की बकाया राशि किसी और बैंक में ट्रांसफर करने की हालत में प्री-पेमेंट फीस वसूल की जाती है।

 

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