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आत्मसम्मान का प्रतीक वायु सेना में कॅरियर

श की सुरक्षा का जिम्मा तीन प्रमुख शाखाओं पर होता है, थल सेना, वायु सेना और जल सेना। इन्हीं तीनों पर देश की सीमाओं की रक्षा निर्भर रहती है, इसके अलावा जरूरत पड़ने पर देश के अंदरूनी हिस्सों में शांति बनाए रखने के लिए भी इनका उपयोग किया जाता है। इन तीनों सुरक्षा तंत्रों में वायु सेना को लेकर युवाओं में विशेष आकर्षण रहता है। आसमान में तेज गति के साथ लड़ाकू विमान उड़ाना और जरूरत पड़ने पर दुश्मनों के छक्के छुड़ा देना, यह सब युवाओं को सपने सरीखा प्रतीत होता है। इसके चलते देश का युवा वर्ग वायु सेना में कॅरिअर बनाने को विशेष महत्व देता है। वायु सेना में कॅरियर बनाने के इच्छुक युवा इसके तीन अलग-अलग विभागों में आवेदन कर सकते हैं। फ्लाइंट, टेक्निकल और ग्राउंड ब्रांच इन तीनों ही वायु सेना के महत्वपूर्ण अंग माने जाते हैं। शुरूआती चयन प्रक्रिया में उर्तीर्ण होने के बाद चयनित छात्र को टे्रनिंग के दौर से होकर गुजरना होता है। इसके बाद छात्र को उसके प्रदर्शन के आधार पर पायलेट, नेवीगेटर, टेक्निकल या फिर ग्राउंड ड्यूटी ऑफीसर नियुक्त किया जाता है। यह नियुक्ति देश के किसी भी एअर फोर्स स्टेशन में हो सकती है। एअर फोर्स में महिलाएं भी आवेदन कर सकती हैं लेकिन उन्हें सिर्फ अधिकारी के रूप में नियुक्ति मिल सकती है।
फ्लाइंग ब्रांच के ही अन्तर्गत फाइटर पायलेट आते हैं, जो तकनीकी कुशल लड़ाकू विमान उड़ाते हैं। इसके अलावा सैनिको को लाने-ले जाने व मालवाहक विमानों को उड़ाने वाले पायलेट भी इसी ब्रांच में आते हैं। फ्लाइंग ब्रांच के अन्तर्गत ही नेवीगेटर भी आते हैं जो हर प्रकार के विमानों को दिशा-निर्देशित करते हैं। टेक्निकल ब्रांच के अन्तर्गत वायु सेना के लिए कार्य करने वाले इंजीनियर आते हैं। हथिआरों और विमानों में तकनीकी खराबी से निटने का जिम्मा इंजीनियों पर ही होता है।
एयरक्राफ्ट का मेंटीनेंस करने वाले मकेनिकल इंजीनियर कहलाते है तथा एअरक्राफ्ट में इलेक्टि्रॅनिक व संवाद स्थापित करने वाले डिवाइस के मेंटीनेंस की जिम्मेदारी इलेक्ट्रॉनिक्स डिपार्टमेंट पर होती है। ग्राउंड ड्यूटी ब्रांच पर फ्लाइंग व टेक्निकल दोनों ही विभागों को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी होती है। इसमें एअर ट्राफिक कंट्रोल ऑफीसर की भूमिका सबसे महत्वूपर्ण मानी जाती है। फाइटर कंट्रोलर मॉनीटर भी ग्राउंड ब्रांच का अहम हिस्सा होता है। इसके अलावा इसमें शिक्षा, प्रशासनिक और लेखा-जोखा से जुड़े कार्य भी किए जाते हैं।
योग्यता : इन विभागों में आवेदन के लिए योग्यता के अलग-अलग मापदंड निर्धारित किए गए हैं। फ्लाइंग ब्रांच के लिए आवेदन करने के लिए पुरुष आवेदक का 12वीं उतीर्ण होना आवश्यकत है। महिलाएं स्नातक होने के बाद ही वायु सेना के लिए आवेदन कर सकती हैं। ग्रेजुएट पुरुष वायु सेना की किसी भी शाखा के लिए आवेदन कर सकते हैं टेक्निकल और फ्लाइंग दोनों की शाखाओं में सहूलियत दी जाएगी।
चयन प्रक्रिया : इस क्षेत्र में चयन की प्रक्रिया काफी सख्त होती है। चयन प्रक्रिया के अन्तर्गत आवेदन को चार भिन्न-भिन्न चरणों से होकर गुजरना होता है। यह चरण हैं, स्कैंनिंग ऑफ एप्लीकेशन, टेस्टिंग ऑफीसर लाइक क्वालिटीज, कंडक्टिंग मेडिकल इग्जामिनेशन एंड प्रिपेरिंग ऑल इंडिया मेडिकल लिस्ट। स्कैनिंग ऑफ एप्लीकेशन प्रक्रिया के जरिए आपके द्वारा भेजे गए आवेदन पत्र को जांच-परखा जाता है। आपके द्वारा भेजे गए प्रमाणों की सत्यता को जांचने के बाद ही कॉल लेटर भेजा जाता है। यदि आपने फ्लाइंग ब्रांच के लिए एनडीए या सीडीएसई के जरिए आवेदन किया है तो आपकी एप्लीकेशन यूपीएससी विभाग में भेजी जाएगी। इस स्थिति में आपके पास जो कॉल लेटर आएगा, यूपीएससी परीक्षा में बैठने को लेकर आएगा। पुरुष आवेदकों को यूपीएससी परीक्षा उतीर्ण करने के बाद पायलेट एप्टीट्यूड बैटरी टेस्ट देना होता है। टेक्नीकल ब्रांच के लिए आवेदन करने पर इंजीनियरिंग नॉलेज टेस्ट क्वालीफाई करना होता है। इसे उतीर्ण करने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होती है।
प्रथम चरण सफलता पूर्वक पार कर लेने के बाद आपको मैसूर, वाराणसी या देहरादून में स्थित एअरफोर्स सेलेक्शन बोर्ड में हाजिरी लगानी होती है। सेलेक्शन बोर्ड में आपके शारीरिक परीक्षण के बाद इंटरव्यू और सामूहिक प्रक्रियाओं में आपकी क्षमता को जांचा जाता है। इन सभी टेस्ट को ऑफीसर लाइक क्वालिटीज के नाम से जाना जाता है। गु्रप टेस्ट में इनडोर व आउटडोर एक्टिविटी कराई जाती हैं। इसमें क्वालीफाई होने बाद मेडिकल इग्जामिनेशन से होकर गुजरना होता है। इन सभी चरणों के बाद ऑल इंडिया मेरिट लिस्ट बनती हैं, सभी चरणों में आपके प्रदर्शन के आधार पर ही मेरिट लिस्ट में आपका रैंक निर्धारित की जाती है।

 

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