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Home » Health » 30 June 2010 »

कैसे करें कानों की देखभाल

ज्ञानेंद्रियां पांच होती हैं। उसमें से एक कान है। कानों की देखभाल में लापरवाही बरतने से श्रवण क्षमता जाने के साथ अनेक परेशानियां पैदा हो जाती हैं।
कान में खुजली या दर्द होना आम बात है। वर्षा ऋतु में भी वातावरण में नमी होने के कारण कान के अंदर नमी बढ़ जाती है जिसके कारण अंदर की त्वचा विकृत हो जाती है। कान के अंदर की त्वचा से निकलने वाला मैल (वैक्स) उस पर जमा हो जाता है और संक्रमण के कारण वहां फंगस हो जाता है। ये फंगस कुछ रसायनिक पदार्थ उत्पन्न करते हैं जो त्वचा पर फैलकर खुजली तथा जलन पैदा करते हैं।
इससे छुटकारा पाने के लिए लोग कान में तीली, ऊंगली या अन्य कोई नोकदार वस्तु कान में डालकर खुजलाने लगते हैं। बार-बार खुजलाने से त्वचा पर जख्म बन जाता है जिसके कारण कान में दर्द होने लगता है या रह-रहकर टीस उठने लगती है। जब कान के अंदर जख्म व सूजन पर फंगस बढ़ने लगते हैं और कान में पस बन जाता है तब स्थिति और गंभीर हो जाती है।
स्नान करते समय कान में पानी घुस जाने या नम वातावरण के कारण कान का मैल फूलकर कान को एकदम बंद कर देता है। इससे रोगी घबरा जाता है और उसे निकालने के लिए कोशिश करने लगता है। इससे कान के बाहरी हिस्से या पर्दे पर चोट लग सकती है। निकालने के लिए प्रयास करते समय कभी-कभी मैल और अंदर चला जाता है और मैल कान के पर्दे से चिपक जाता है। इससे कान में तेज दर्द होने लगता है। रोगी कान दर्द से बेचैन हो जाता है।
कान की झिल्ली के अंदर छोटे-छोटे बाल होते हैं जो धूल-मिट्टी या अन्य बाहरी चीजों को कान में अंदर नहीं जाने देते। कान में बार-बार तीली या नुकीली चीजें डालने से कान के अंदर के बाल टूट जाते हैं और वहां जख्म बन जाता है जो बढ़कर काफी कष्टदायक बन जाता है।
सावधानियां
* कभी भी कोई नुकीली चीज कान में डालकर कान न खुजाएं।
* नहाते समय ध्यान रखें कि कान में पानी या साबुन न जाए। यदि चला भी जाए तो तौलिए से तुरंत साफ कर दें।
* कान में तेल न डालें। कान का वैक्स कान में चिकनाहट रखने के लिए पर्याप्त है। यह जीवाणु संक्रमण से कान की रक्षा करता है।
* कान में दर्द, जलन या खुजली होने पर कान न खुजाएं और न स्वयं उपचार करें बल्कि नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ से मिलकर सलाह लें।
* कान में तेज दर्द हो रहा हो और चिकित्सकीय सुविधा मिलना संभव न हो तो कपड़ा गर्म करके ुससे कान पर सेंक करें। दर्द निवारण के लिए ब्रूफेन की गोली ली जा सकती है।
* डॉक्टर से बिना सलाह लिए कान में कोई दवा न डालें।

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