रांची टॉप सेवन सिटीज में शामिल
रांची के रीयल एस्टेट सेक्टर के लिए बहुत बड़ी खूशखबरी है। एसोचैम ने रिटायरमेंट होम पर नेशनल सर्वे रिपोर्ट जारी की है। सर्वेक्षण में रांची टाप सेवन सिटीज में है। पहले स्थान पर चंडीगढ़ है। बाद के शहरों में देहरादून, पुणे, उदयपुर, इंदौर, जबलपुर और रांची है। यह सर्वेक्षण टियर टू शहरों में किया गया। अवकाश के बाद व्यक्ति किस शहर में सुकून भरा आशियाना बनाना चाहते हैं, उसमें रांची नम्बर सात पर है। इस सर्वे में कम्पनियों के सीईओ, कारपोरेट पर्सनाल्टीज, गवर्मेंट आफिशियल आदि शामिल किए गए थे। उक्त सात शहर इनकी नजरों में अच्छे और रहने लायक हैं। साथ ही गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा, फरीदाबाद, सोनीपत, मानेसर की काफी पुअर रैंकिंग सामने आई है। सर्वे में पावर, रोड, मार्केटिंग सुविधा, हेल्थ एण्ड रिक्रिएशन सेंटर्स, पर्यावरण, भौगोलिक स्वरूप तथा कानून व्यवस्था आदि बातें शामिल की गई थी।
नेशनल सर्वे में इंदौर, जबलपुर, चंडीगढ़, पुणे, उदयपुर, औरंगाबाद, सूरत, कोयम्बटूर, मदुरई, कोच्ची, विशाखापत्तनम, विजयवाडा, मैसूर, देहरादून, गाजियाबाद, मेरठ, फरीदाबाद, नोएडा, सोनीपत, लखनऊ जैसे टियर-टू शहरों को शामिल किया गया था।
एसोचैम के महासचिव डी.एस. रावत केअनुसार सरकारी एवं कारपोरेट सेक्टर के लोग बड़ी संख्या में चंडीगढ़ और देहरादून को आफ्टर रिटायरमेंट पहली पसन्द बताते हैं। अच्छी नागरिक सुविधाएं एवं अच्छे पर्यावरण के साथ बेहतर कानून व्यवस्था इन शहरों का प्लस प्वाइंट है।


रॉची को किन आधारों पर सेवानिवृत जीवन के लिए रहने लायक बताया गया है, इसका खुलासा नहीं किया गया है। रॉची में जिस तरह गंदगी, गुंडागर्दी, ट्रैफिक, आम बदहाली है, इसमें रियाटरमेंट की सकुन भरी जिंदगी कैसे आएगी, यह एसोचेम को बताना चाहिए। शहरों का वर्गीकरण करने का एसोचेम की काबलियत क्या है यह भी स्पष्ट होनी चाहिए। जिस राज्य में कोई स्थिर सरकार और प्रशासन ही नहीं है वहॉं ढॉचागत विकास का क्या हाल होगा, सहज ही समझा जा सकता है।
26 July 2010 at 08:31