आईआईटी : पास होना है तो अंग्रेजी में ही देना होगा पेपर!
आईआईटी की परीक्षा में अगर पास होना है तो आपको अंग्रेजी में ही पेपर देना होगा। कम से कम पिछले 2008 और 2009 में हुई परीक्षा के रुझान तो इस बात को ही दर्शाते हैं। सूत्रों के मुताबिक, आईआईटी की आर्गेनाइजिंग कमेटी की रिपोर्ट में सामने आया है कि हिंदी माध्यम से पेपर देने वाले छात्रों के लिए आईआईटी परीक्षा में पास होना आसान नहीं है।
आंकड़े दर्शाते हैं कि 2008 और 2009 में आईआईटी की परीक्षा में हिंदी माध्यम से परीक्षा में क्रमश: 1.27 प्रतिशत और 1.84 प्रतिशत सफल हुए थे। इसके विपरीत अंग्रेजी माध्यम में परीक्षा देने वाले छात्र क्रमश : 98.73 प्रतिशत और 98.16 प्रतिशत सफल रहे हैं। आईआईटी की परीक्षा में 2008 में 13.08 प्रतिशत परीक्षार्थी बैठे थे जबकि 2009 की परीक्षा में 12.86 प्रतिशत परीक्षार्थी बैठे थे वहीं अंग्रेजी माध्यम में 86.92 प्रतिशत और 87.14 प्रतिशत परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी थी।
दिल्ली हाईकोर्ट में आईआईटी में हुई गलतियों के मामले पर याचिका दायर करने वाले सत्या फाउंडेंशन के चेतन उपाध्याय कहते हैं कि इस बार की आईआइटी की परीक्षा में हुई गलतियों ने तो हिंदी माध्यम वाले परीक्षार्थियों का बेड़ागर्क कर दिया है। ऐसे में पेपर दोबारा कराने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचता। आईआईटी ने जो समाधान प्रस्तुत किया है वो बेहतर नहीं है। गौरतलब है कि आईआईटी-जेईई के प्रश्नपत्र में हुई गलतियों को सुधारने के लिए नए पैमाने की घोषणा कर दी है। वहीं शिक्षाविद् मानते हैं कि आईआईटी की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थान इसे अंग्रेजी में कराते हैं ऐसे में छात्र इस माध्यम में ही पेपर देते हैं और सफल होते हैं।


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