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फार्मेसी में करियर

फार्मेसी एक ऐसा सेक्टर है, जिसमें मंदी के दौरान भी जॉब की कोई कमी नहीं थी। करियर के लिहाज से देखें, तो यह एक शानदार सेक्टर है। ग्लोबल कंसलटिंग फर्म मैकेंजी के मुताबिक, फार्मेसी का कारोबार वर्ष 2015 तक 20 बिलियन डॉलर का हो जाएगा। इसके साथ-साथ आज भारत क्लीनिकल रिसर्च आउटसोर्सिग के क्षेत्र में भी ग्लोबल हब बन कर उभर रहा है। यदि आपकी दिलचस्पी चिकित्सा और सेहत से जुड़े में है तो आप फार्मेसी के क्षेत्र में करियर बना सकते हैं।
शैक्षणिक योग्यता
साइंस विषय के साथ बारहवीं परीक्षा पास करने के बाद दो साल के डी फार्मा कोर्स या चार साल के बी फार्मा कोर्स कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित कई संस्थान/महाविद्यालय/ विश्वविद्यालय अंडरग्रेजुएट कोर्स करवाने के अलावा एम. फार्मा कोर्स भी करवाते हैं। पहले भारत में फार्मास्युटिकल की पढाई गिने-चुने संस्थानों में ही होती थी, लेकिन तेजी से बढते बाजार और ट्रेंड लोगों की मांग को पूरा करने के लिए अब कई संस्थानों में ऐसे कोर्सो की शुरुआत हो गई है। बारहवीं के बाद सीधे डिप्लोमा किया जा सकता है। कुछ कॉलेजों में फार्मेसी में फुलटाइम कोर्स संचालित हैं। फार्मा रिसर्च में स्पेशलाइजेशन के लिए एनआईपीईआर यानी नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ फार्मा एजुकेशन एंड रिसर्च जैसे संस्थानों में प्रवेश ले सकते हैं। इसके साथ-साथ पीजी डिप्लोमा इन फार्मास्युटिकल एवं हेल्थ केयर मार्केटिंग, डिप्लोमा इन फार्मा मार्केटिंग, एडवांस डिप्लोमा इन फार्मा मार्केटिंग एवं पीजी डिप्लोमा इन फार्मा मार्केटिंग जैसे कोर्स भी संचालित किए जा रहे हैं। इन पाठयक्रमों की अवधि छह माह से एक वर्ष के बीच है। इन पाठयक्रमों में प्रवेश के लिए अभ्यर्थी की न्यूनतम योग्यता बीएससी, बीफार्मा अथवा डीफार्मा निर्धारित की गई है।
व्यक्तिगत योग्यता
फार्मेसी की दुनिया में आगे बढ़ना चाहते हैं, तो आपकी साइंस और खासकर लाइफ साइंस तथा दवाइयों के प्रति दिलचस्पी होनी चाहिए। इससे जुड़े रिसर्च के क्षेत्र में काम करने के लिए आपकी दिमागी विश्लेषण क्षमता बेहतर हो और आपकी शैक्षणिक बुनियाद भी अच्छी होनी चाहिए। यदि आप इससे जुड़े मार्केटिंग क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं तो आपकी कम्युनिकेशन स्किल जरूर बेहतर होनी चाहिए।
किस तरह के कोर्स
डीफॉर्मा और बीफॉर्मा कोर्स में दवा के क्षेत्र से जुड़ी उन सभी बातों की थ्योरेटिकल और प्रायोगिक जानकारी दी जाती है जिनका प्रयोग आमतौर पर इस उद्योग के लिए जरूरी होता है। इसके साथ फार्माकोलॉजी, इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री, हॉस्पिटल एंड क्लीनिकल फार्मेसी, फॉर्मास्यूटिकल, हेल्थ एजुकेशन, बायोटेक्नोलॉजी आदि विषयों की जानकारी दी जाती है।
करियर ऑप्शंस
रिसर्च एंड डेवलपमेंट- भारत आज फार्मास्युटिकल्स के क्षेत्र में काफी तेजी के आगे बढ़ रहा है। वैसे, इस क्षेत्र का दायरा भी काफी व्यापक है। यहां नई-नई दवाइयों की खोज व विकास संबंधी कार्य किया जा सकता है। आरएंडडी क्षेत्र को जेनेरिक उत्पादों के विकास, एनालिटिकल आरएंडडी, एपीआई (एक्टिव फार्मास्युटिकल इन्ग्रेडिएंट्स) या बल्क ड्रग आरएंडडी जैसी श्रेणियों में बांटा जा सकता हैं। इन सबका अपना सुपर-स्पेशलाइजेशन है।
ड्रग मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर
यह इस इंडस्ट्री की एक बेहद अहम शाखा है, जो स्टूडेंट्स को आगे बढने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराती है। आप चाहें, तो इस क्षेत्र में मॉलिक्युलर बॉयोलॉजिस्ट, फार्मेकोलॉजिस्ट, टॉक्सिकोलॉजिस्ट या मेडिकल इंवेस्टिगेटर बनकर अपना भविष्य संवार सकते हैं। मॉलिक्युलर बॉयोलॉजिस्ट जीन संरचना के अध्ययन और मेडिकल व ड्रग रिसर्च संबंधी मामलों में प्रोटीन के इस्तेमाल का अध्ययन करता है, जबकि फार्मेकोलॉजिस्ट का काम इंसान के अंगों व ऊतकों पर दवाइयों व अन्य पर्दार्थों के प्रभाव का अध्ययन करना होता है। इसी तरह टॉक्सिकोलॉजिस्ट दवाओं के घातक प्रभाव को मापने के लिए अलग-अलग परीक्षण करता है। मेडिकल इंवेस्टिगेटर नई दवाइयों के विकास व टेस्टिंग की प्रक्रिया से जुड़ा होता है। मानव जैविकी और दवाइयों संबंधी अपने बैकग्राउंड के कारण वे इसकी रिसर्च प्रक्रिया के लिहाज से बेहद अहम होते हैं।
फार्मासिस्ट
हॉस्पिटल फार्मासिस्ट्स पर दवाइयों और चिकित्सा संबंधी अन्य सहायक सामग्रियों के भंडारण, स्टॉकिंग और वितरण का जिम्मा होता है, जबकि रिटेल सेक्टर में फार्मासिस्ट को एक बिजनेस मैनेजर की तरह काम करते हुए दवा संबंधी कारोबार चलाने में समर्थ होना चाहिए।
क्लिनिकल रिसर्च
जब कोई नई दवा लॉन्च करने की तैयारी होती है, तो दवा लोगों के लिए कितनी सुरक्षित और असरदार है, इसके लिए क्लिनिकल ट्रॉयल होता है। भारत की जनसंख्या और यहां उपलब्ध सस्ते प्रोफेशनल की वजह से क्लिनिकल का कारोबार तेजी से फलने-फूलने लगा है। इस क्षेत्र में हाल के दिनों में अंतरराष्ट्ररीय जगत की दिलचस्पी काफी बढ़ी है। आज देश में कई विदेशी कंपनियां क्लिनिकल रिसर्च के लिए आ रही हैं। दवाइयों की स्क्रीनिंग संबंधी काम में नई दवाओं या फॉर्मुलेशन का पशु मॉडलों पर परीक्षण करना या क्लिनिकल रिसर्च करना शामिल है जो इंसानी परीक्षण के लिए जरूरी है।
रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट
विदेशों में फार्मासिस्ट को रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट कहा जाता है। जिस तरह डॉक्टरों को प्रैक्टिस के लिए लाइसेंस की जरूरत होती है, उसी तरह इन्हें भी फार्मेसी में प्रैक्टिस करने के लिए लाइसेंस चाहिए। उन्हें रजिस्ट्रेशन के लिए एक टेस्ट पास करना होता है। फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया ने इस विषय में ट्रेनिंग के लिए ‘फार्मा डी’ नामक एक छह साल का कोर्स शुरू किया है।
क्वालिटी कंट्रोल
फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री का यह एक अहम कार्य है। नई दवाओं के संबंध में अनुसंधान व विकास के अलावा यह सुनिश्चित करने की भी जरूरत होती है कि इन दवाइयों के जो नतीजे बताए जा रहे हैं, वे सुरक्षित, स्थायी और आशा के अनुरूप हैं।
ब्रांडिंग एंड सेल्स
फार्मेसी की पृष्ठभूमि से जुड़ा कोई प्रोफेशनल, एमबीए डिग्रीधारी और यहां तक कि साइंस की डिग्री प्राप्त करने वाला शख्स भी सेल्स एंड मार्केटिंग में करियर बना सकता है। फार्मास्युटिकल सेक्टर में मार्केटिंग की काफी अहम है। मार्केटिंग प्रोफेशनल्स उत्पाद की बिक्री के अलावा बाजार की प्रतिस्पर्धा पर भी निगाह रखते हुए इस बात का निर्धारण करते हैं कि किस उत्पाद के लिए बाजार में ज्यादा संभावनाएं हैं। इसी के मुताबिक रणनीति तैयार की जाती है। इस क्षेत्र में काम करने के लिए यदि आपके पास बीफार्मा के साथ साथ एमबीए की भी डिग्री है तो सोने पर सुहागा वाली बात होगी।
कैश कर लें अवसर
दुनिया की बेहतरीन फॉर्मास्यूटिकल कंपनियां भारत में अपना कारोबार कर रही हैं। इनके अलावा, रैनबैक्सी, एफडीसी, कैडिला, शिपला, डॉ. रेड्डीज, डाबर, ल्यूपिन आदि कंपनियां भारत में व्यवसायरत हैं। इस क्षेत्र में प्रशिक्षित पेशेवरों की काफी मांग है। नर्सिग होम, अस्पतालों और कंपनियों में आपके लिए नौकरी के अवसर हैं। ड्रग कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन और आर्म्ड फोर्सेज में भी काफी संभावनाएं हैं। बीफॉर्मा करने के बाद आप मैन्युफैक्चरिंग केमिस्ट, एनालिस्ट कैमिस्ट, ड्रग इंस्पेक्टर के रूप में काम कर सकते हैं। इसके अलावा क्लीनिकल रिसर्च आउटसोर्सिग सेक्टर में भी आपके लिए कई अवसर मौजूद हैं।
सैलरी पैकेज
बीफॉर्मा करने के बाद फार्मास्युटिकल कंपनियों में आप बतौर कैमिस्ट, क्लीनिकल रिसर्च आउटसोर्सिग में बतौर रिसर्च असिस्टेंट, सरकारी, प्राइवेट और मेडिकल कॉलेज में फार्मासिस्ट के रूप में काम कर सकते हैं। एम.फॉर्मा करने के बाद लैब में वैज्ञानिक, तो फॉर्मास्यूटिकल कंपनियों के रिसर्च और डेवलपमेंट विभाग में काम कर सकते हैं। शुरुआत में आपको दस से पंद्रह हजार रुपये तक की नौकरी मिल सकती है। फार्मेसी में एमबीए सीआरओ में बतौर सलाहकार, तो कंपनियों में बिजनेस एग्जिक्यूटिव और मैनेजमेंट एग्जिक्यूटिव पदों पर काम कर सकता है।

 

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