डिस्टेंस एजुकेशन संस्थानों को चेतावनी
डिस्टेंस एजुकेशन के माध्यम से शिक्षा का चलन तेजी से बढ़ रहा है। कामकाजी युवा बड़ी संख्या में डिस्टेंस एजुकेशन के लिए अच्छे शिक्षण संस्थानों में प्रवेश ले रहे हैं। डिस्टेंस एजुकेशन काउंसिल (डीईसी) ने सभी संबध्द यूनिवर्सिटियों, डीम्ड यूनिवर्सिटियों और टेक्निकल शिक्षण संस्थानों चेतावनी दी है कि वे ऐसे किसी भी कोर्स में छात्रों को प्रवेश न दें जो अनुमोदित न हों। यदि वे ऐसा करेंगे तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मान्यता तक रद्द की जा सकती है।
सूत्रों के अनुसार देश भर में डेढ़ करोड़ से भी अधिक छात्र डिस्टेंस एजुकेशन के माध्यम से उच्च शिक्षा के लिए पंजीकृत हैं। शिक्षा प्रसार में डिस्टेंस एजुकेशन की हिस्सेदारी 20 से 25 प्रतिशत के बीच है। वर्ष 1975 में यह हिस्सेदारी केवल 2.6 प्रतिशत ही थी। ऑन लाइन शिक्षा पध्दति के आने से देश भर में डिस्टेंस एजुकेशन में क्रांतिकारी परिवर्तन आया है।
विभिन्न प्रचार माध्यमों के जरिए छात्रों को भी सतर्क किया जा रहा है कि वे डिस्टेंस एजुकेशन पाने के इरादे से जिस किसी भी कोर्स में प्रवेश लेना चाहते हैं उस कोर्स की मान्यता के बारे में पता लगाएं। डीईसी को पता चला है कि देश भर में ऐसे कई शिक्षण संस्थान हैं जो डिस्टेंस एजुकेशन के माध्यम से ऐसे कोर्स व पाठयक्रमों में प्रवेश दे रहे हैं जो अनुमोदित नहीं हैं।
डीईसी सूत्रों का कहना है कि दूरस्थ शिक्षा (डिस्टेंस एजुकेशन) देने वाले शिक्षण संस्थान यदि नए पाठयक्रम या कोर्स शुरू करना चाहते हैं तो उन्हें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) और डिस्टेंस एजुकेशन काउंसिल (डीईसी) की संयुक्त समिति से अनुमोदन प्राप्त करना होगा। यह समिति एजुकेशन स्टैंडर्ड पर भी नजर रख रही है। डीईसी अधिकारियों का कहना है कि जो छात्र गैर अनुमोदित कोर्स में प्रवेश लेंगे उन्हें आगे चल कर रोजगार पाने या फिर उच्च शिक्षा लेने में कठिनाई आ सकती है।
देश भर में नेशनल ओपन यूनिवर्सिटियां, स्टेट ओपन यूनिवर्सिटियां, कंवेशनल यूनिवर्सिटियां और प्रोफेशनल शिक्षण संस्थान डिस्टेंस एजुकेशन दे रहे हैं। इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) सहित देश में दस ओपन यूनिवर्सिटियां हैं।


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