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Home » Education Express » 10 July 2010 »

करें क्वॉलिटी हायर एजुकेशन की बात

भारत ‘नॉलेज सोसाइटी’ बनने की तरफ बढ़ रहा है। इसी कड़ी में अब एजुकेशन रिफॉर्म की बात होने लगी है। ये अच्छे संकेत हैं। भारत जैसे ग्लोबल कंट्री के युवाओं को ग्लोबल सिटीजन बनाने के लिए जरूरी है कि उन्हें सही शिक्षा दी जाए, इसीलिए देश में हायर एजुकेशन पर खासा ध्यान दिया जाने लगा है।
पिछले दो दशकों में भारत ने अपनी पहचान तेजी से विकसित होती ग्लोबल इकॉनमी के रूप में कायम की है। इसका मतलब यह है कि भारत में रोजगार के अवसरों की तुलना शेष पूरी दुनिया से हो रही है। इन परिस्थितियों ने भारतवासियों को ‘ग्लोबल सिटीजन’ बना दिया है। यह भी माना जाने लगा है कि भारत के पास सबसे ज्यादा युवाओं के अलावा बेहतर भौगोलिक स्थिति का लाभ भी है। एक ग्लोबल कंट्री के ग्लोबल सिटीजंस के लिए जरूरी हो जाता है कि वे विश्व में कहीं भी खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित कर सकें। इसके लिए जरूरी है, उन्हीं सही शिक्षा दी जाए। इसी कारण देश में हायर एजुकेशन पर अब खास ध्यान दिया जाने लगा है। न सिर्फ आईआईएम और आईआईटी की संख्या बढ़ाई गई है, बल्कि प्राइवेट इंस्टिटयूट्स क्वॉलिटी एजुकेशन में नए मुकाम हासिल कर रहे हैं।
भारत को नॉलेज सोसाइटी बनाने के लिए युवाओं को अपनी योग्यता और क्षमताओं को अच्छी तरह मांजकर पूरी दुनिया के सामने रखना होगा। इसके लिए विशेषकर मैनेजमेंट और इंजिनियरिंग एजुकेशन में कुरिकुलम और स्किल ट्रेनिंग पर काफी मेहनत करने की आवश्यकता है। ज्यादातर पश्चिमी देशों ने इस तथ्य को समझकर अपनी शिक्षा में ट्रेनिंग को भी अनिवार्य किया है।
आज विभिन्न तरह की इंडस्ट्रीज में तमाम तरह के स्किल्स की जरूरत होती है और हर इंडस्ट्री में उसी के अनुरूप योग्य प्रोफेशनल्स की मांग घटती-बढ़ती है। जरूरी यह है कि युवाओं के लिए मैनेजमेंट और इंजिनियरिंग एजुकेशन भी इसी के अनुसार जॉब ओरिएंटेड बनाई जाए। राष्ट्रीय ज्ञान आयोग के मत के अनुसार, भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में एजुकेशन में भी विविध नजरिये की जरूरत है। संबंधित एजेंसियों को विभिन्न सुझावों को खुले दिल से स्वीकार करना चाहिए। यह सोच विकसित करनी चाहिए कि शिक्षा की जितनी जरूरत लर्निंग और असेसमेंट के लिए है, उतनी ही जरूरत पर्सनल डेवेलपमेंट में भी है।
एजुकेशन सिस्टम में इन्फॉर्मेशन और कम्यूनिकेशन टेक्नॉलजी का भी ज्यादा से ज्यादा प्रयोग होना चाहिए, जिससे ई-लर्निंग और ई-असेसमेंट का चलन शुरू हो। टीचर्स की इफेक्टिव ट्रेनिंग पर भी ध्यान देना होगा। ‘ऑल इंडिया मैनेजमेंट असोसिएशन’ की डायरेक्टर जनरल बनीं रेखा सेठी के अनुसार, आज ज्यादातर मैनेजमेंट इंस्टिटयूट्स को फैकल्टी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। एआईएमए की तरफ से फैकल्टीज के लिए डिवेलपमेंट प्रोग्राम चलाया जाता है। ट्रेनिंग में आधुनिक तकनीकों का प्रयोग करने के लिए टीचर्स और एग्जेक्यूटिव्स की ट्रेनिंग के लिए बिल्कुल अलग कैंपस खोलने की योजना भी बनाई जा रही है। वैसे, कुछ प्राइवेट इंस्टिटयूट्स बेस्ट फैकल्टी रखने के लिए जाने जाते हैं और इसके लिए उन्हें बेस्ट पैकेज देने से भी पीछे नहीं हटते।
किसी भी इंस्टिटयूट को बेहतर बनाने के लिए अच्छा कुरिकुलम, इन्फ्रास्ट्रक्चर, कॉरपोरेट इंटर्नशिप प्रोग्राम, स्टूडेंट्स और इंडस्ट्रीज का तालमेल और ऐकडेमिक रिसर्च व नॉलेज डिवेलपमेंट की गंभीर कोशिशें जरूरी होती हैं। इंस्टियूट्स जिन वैल्यूज को अपने स्टूडेंट्स तक पहुंचाना चाहते हैं, वे इंस्टियूट्स का ही एक हिस्सा नजर भी आनी चाहिए। दरअसल, आज के बिजनस वर्ल्ड के सामने नई चुनौतियां और नए अवसर हैं। इनका लाभ लेने के लिए दुनियाभर के दुनियाभर में बिजनस स्कूल और यूनिवर्सिटीज को नए सिलेबस, रिसर्च, टीचिंग मेथड्स और प्लानिंग की जरूरत है।
इंस्टिटयूट चुनते समय रखें ध्यान
आजकल मैनेजमेंट और इंजिनियरिंग की डिग्री देने वाले इंस्टिटयूट्स की भरमार है, लेकिन रीयल वैल्यू एडिशन यानी कारगर डिग्री हासिल करने के लिए इंस्टिटयूट की रेपुटेशन और रैंकिंग पर जरूर गौर करना चाहिए। एंप्लॉयर्स सिर्फ यही नहीं पूछते कि आपने डिग्री ली है या नहीं, बल्कि वे यह भी जानना चाहते हैं कि आपने किस इंस्टिटयूट से डिग्री ली है? ऐसे में अच्छे की पहचान के लिए कुछ बातों पर गौर करना चाहिए, जैसे – प्रोग्राम कंटेंट, फैकल्टी और स्टूडेंट बॉडी का स्तर, इन्फ्रॉस्ट्रक्चर, सुविधाएं, रिसर्च पर जोर, अन्य देशों के इंस्टिटयूट्स के साथ पार्टनरशिप्स, कॉरपोरेट वर्ल्ड के साथ रिश्ते, ऐडमिनिस्ट्रेशन, प्लेसमेंट रिकॉर्ड, करियर एेंड प्लेसमेंट सर्विस आदि।
भारत ही नहीं, दुनियाभर की इंडस्ट्रीज को अच्छे मैनेजर्स और इंजिनियर्स की जरूरत हमेशा रहती है। एक अनुमान के मुताबिक, 38 प्रतिशत एमबीए होल्डर्स जनरल मैनेजमेंट में हैं, 25 प्रतिशत कंसल्टेंसी और फाइनैंस में, 14 प्रतिशत कॉरपोरेट स्ट्रेटजी और प्लानिंग में हैं। बाकी विभिन्न क्षेत्रों में मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। बात सिर्फ जॉब मिलने की नहीं है, अहम है करियर को नई ऊंचाइयों तक ले जाना। यह अच्छे मैनेजमेंट और टेक्निकल इंस्टिटयूट की डिग्री से ही संभव हो सकता है।

 

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