रक्तचाप और नमक
अब तक के सभी वैज्ञानिक शोधों से यह प्रमाणित हो गया है कि उच्च रक्तचाप एवं हृदय रोगों से नमक का सीधा संबंध है इसलिए डाक्टर ऐसी बीमारी की स्थिति में नमक को सबसे पहले बंद या कम करने की सलाह देते हैं। नमक सोडियम व क्लोराइड दो तत्वों से मिलकर बना है। इसकी अधिकता रक्त में पानी को रोकती है जिससे हृदय को अपनी गतिविधि जारी रखने में अधिक ताकत लगानी पड़ती है। इन्हीं कारणों से उच्च रक्तचाप के रोगी को नमक की मात्रा कम या बंद करने की कहते हैं।
निम्न रक्तचाप में ठीक विपरीत स्थिति होती है। ऐसे रोगियों को नमक अधिक खाने की सलाह दी जाती है। हां, इतना अवश्य है कि निम्न रक्तचाप के रोगी को अशुध्द नमक या नमक के स्थान पर फल-सब्जी के माध्यम से प्राकृतिक नमक खाने की सलाह दी जाती है। निम्न रक्तचाप के रोगियों को क्लोरीन वाली वस्तुएं लेने से मना किया जाता है जैसे स्थानीय निकाय (निगम) या अन्य माध्यम से क्लोरीन द्वारा शुध्द किया गया पानी।
नमक सोडियम की मात्रा : उच्च रक्तचाप के रोगी सभी प्रकार के अनाज ज्वार, बाजरा, गेहूं, चावल आदि ले सकते हैं किन्तु ध्यान रखें कि मक्के में सोडियम की मात्रा कुछ अधिक है, इसे कम लें। श्र सभी प्रकार की सब्जियां खा सकते हैं किन्तु मेथी, पालक, हरा धनिया, गाजर, चुकंदर, मूली, शलजम में नमक (सोडियम) की मात्रा अधिक होती है। अतएव इसको कम कर दें। श्र सभी फल खा सकते हैं किन्तु खरबूजा, कटहल में सोडियम (नमक) की मात्रा तुलना में अधिक होती है। इसे कम कर दें। श्र डबल रोटी (ब्रेड), बिस्कुट, केक और चाकलेट में सोडियम की मात्रा अधिक होती है। इसे कभी-कभार लें। श्र मांसाहार में, मस्तिष्क, जिगर, गुर्दा में नमक (सोडियम) की मात्रा अधिक होती है। श्र चाय, काफी का सीमित सेवन करें। श्र मद्यपान बहुत कम मात्रा में करें। श्र पापड़, अचार एवं डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ में नमक की मात्रा अधिक होती है। इसे न के बराबर लें। श्र सलाद में अतिरिक्त नमक न लें। श्र सब्जी, दाल, रोटी सादा खाएं।
निष्कर्ष : उच्च रक्तचाप पीड़ितों के लिए नमक (सोडियम) की अधिकता ठीक नहीं जबकि निम्न रक्तचाप के रोगी नमक (सोडियम) की अधिक मात्रा ले सकते हैं।
शरीर के लिए मात्र 4 से 5 ग्राम नमक प्रतिदिन अनिवार्य होता है जो खान-पान की दैनिक वस्तुओं से स्वत: मिल जाता है।


