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विधानमंडल में फिर हंगामा

पटनाः बिहार विधान परिषद् में निलंबित विपक्षी सदस्यों ने आज सदन में प्रवेश करने के बाद भारी हंगामा किया। इस दौरान उन्होंने सभापति पर भी हमला कर दिया जिसमें वह बाल-बाल बच गये। विधान परिषद् में कार्यवाही शुरू होने से पहले ही निलंबित विपक्षी सदस्य सदन में प्रवेश कर गये और सदन के बीच में धरना पर बैठ गये।
सभापति के आसन ग्रहण करने के बाद राष्ट्रीय जनता दल के रामवचन राय ने 14 सदस्यों का निलंबन वापस लेने का प्रस्ताव रखा। इस पर सभापति ताराकांत झा ने कहा कि जबतक निलंबित सदस्य धरना पर रहेंगे तब तक इनके निलंबन वापसी पर विचार नहीं किया जायेगा। सभापति के इतना कहते ही राष्ट्रीय जनता दल, लोक जनशक्ति पार्टी, कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के निलंबित सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद सभापति ने सभी निलंबित सदस्यों को मार्शल के जरिए सदन से बाहर कर दिया। उधर कोषागार से कथित अनियमित निकासी को लेकर बिहार विधानसभा में आज दूसरे दिन फिर हंगामा कर रहे विपक्ष के 67 विधायकों को सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। विधानसभा में उदय नारायण चौधरी ने आज सदन में उद्दंड व्यवहार की सजा के तौर पर उन्हें निलंबित कर दिया। सदन में शोरशारबे के बीच विधानसभा अध्यक्ष की ओर चप्पल भी फेंकी गयी। निलम्बित होने वाले सदस्यों में राजद प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल बारी सिद्दीकी और विधानसभा में राजद के उपनेता शकील अहमद खान शामिल हैं। हंगामे के दौरान विधान परिषद से जिन सदस्यों को मार्शल के जरिए बाहर निकाला गया उनमें राजद के मुद्रिका सिंह यादव, प्रो. गुलाम गौस, तनवीर हसन, प्रो. नवल किशोर यादव, रोमा भारती, लोजपा के राजू यादव, राजेन्द्र राय, इसराइल राइन, कांग्रेस के महाचंद्र प्रसाद सिंह, चंदन बागची और माकपा के वासुदेव सिंह शामिल है। विपक्षी सदस्यों को मार्शल द्वारा आउट किये जाने के दौरान ही राजद के संजय प्रसाद ने सभापति के आसन के समक्ष लगे माईक को उन पर फेंक दिया। हालांकि सभापति के आसन के निकट खड़े परिषद् कर्मचारियों ने उन्हें बचा लिया। इसके बाद उत्तेजित सत्तापक्ष के कई सदस्यों ने दौड़कर हमलावर राजद सदस्य को दबोच लिया। इसी बीच जनता दल यूनाइटेड के नीरज कुमार और राजद के संजय प्रसाद के बीच मारपीट शुरू हो गयी और इसमें जदयू के बाल्मीकि सिंह भी कूद पड़े। सदन के अंदर उठापटक में दोनों के कपड़े फट गये। सदन में करीब दस मिनट तक हंगामा जारी रहा। विपक्ष के निलंबित सदस्यों के सदन से बाहर किये जाने के बाद कार्यवाही शुरू हो पायी। बाद में उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि सरकार बहस के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष हंगामा करने पर उतारू था। उन्होंने कहा कि सदन में जो आज आचरण विपक्षी सदस्यों का रहा है वैसा पिछले 20 वर्षों में कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि निलंबित सदस्यों ने सदन की लॉबी पर कब्जा कर लिया था और एक महिला सदस्य श्रीमती ज्योति ने निलंबन के बाद परिषद् के मुख्य प्रवेश द्वार पर रखे हुए सारे गमले को तोड़ दिया। श्री मोदी ने कहा कि विपक्षी सदस्य एक साजिश के तहत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की साफ-सुथरी छवि को खराब करने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी सदस्यों ने इस घटना के बाद भी अब तक खेद प्रकट नहीं किया है। ऐसे सदस्यों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवायी की जानी चाहिए। संसदीय कार्यमंत्री रामाश्रय प्रसाद सिंह ने कहा कि सदन में इस तरह के अमर्यादित आचरण से वह मर्माहत हैं। उन्होंने कहा कि कल से ही दोनों सदनों में धरना पर बैठे सदस्यों को समझाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि एक सदस्य संजय प्रसाद का आज जो आचरण रहा वह ठीक नहीं है और संसदीय प्रणाली को समाप्त करने की कोशिश की गयी। सरकार समाधान और बहस कराने के लिए तैयार है। सभापति ताराकांत झा ने कहा कि जब से मैने सभापति का दायित्व संभाला है तब से सभी दलों को साथ लेकर और सहमति बनाकर चलने की कोशिश की है। विरोधी पक्ष के किसी सदस्य से उन्हें कोई तकलीफ नहीं है। उन्होंने कहा कि वह सदन को विश्वास दिलाते हैं कि वह ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे सदन की गरिमा को ठेस पहुंचे। श्री झा ने कहा कि विपक्षी सदस्यों को समाचार पत्रों में जितनी जगह मिलनी चाहिए थी वह उन्हें मिल गयी है। उन्होंने कहा कि सभापति का कर्तव्य है कि सदन को सुचारू रूप से चलायें और सदन चले। उन्होंने कहा कि परिषद के कर्मचारियों ने उन्हें आज बचाया यह भी सच है। विधायक मंगलवार से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। कैग की एक रिपोर्ट में मुख्यमंत्री पर कथित तौर पर आर्थिक अनियमितताओं के आरोप लगाये गये थे, जिसके बाद विधायक धरने पर बैठ गये थे। विधायकों ने सदन की कार्यवाही में बाधा डालते हुए अध्यक्ष की आज्ञा की अवमानना की, जिसके बाद उनके निलंबन की कार्रवाई हुई है। विधायकों को निलंबित करने का प्रस्ताव सदन में प्रदेश में संसदीय मामलों के प्रभारी ब्रजेंद्र प्रसाद यादव ने रखा, जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। हालांकि इस प्रस्ताव का विपक्ष के कई सदस्यों ने विरोध किया। विधायकों को सुरक्षाकर्मियों ने सदन से बाहर निकाल दिया। जैसे ही सुरक्षाकर्मी राजद विधायक बबलू देव को बाहर निकलाने लगे, उनके सहयोगी उन्हें बचाने के लिये आगे बढ़ने लगे। इस बीच किसी ने विधानसभा अध्यक्ष की ओर एक चप्पल फेंक दी। इस घटना से नाराज अध्यक्ष ने सभी विधायकों को निलंबित करने का आदेश दिया।

 

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