ranchiexpress.com   Web       
Home » Ranchi » 25 July 2010 »

किसानों के साथ व्यवसायी भी चिंतित

झारखंड में मानसून की बेरूखी का प्रत्यक्ष प्रभाव रबी एवं खरीफ फसलों पर पड़ेगा। इसके अलावा पशुचारे की कमी सामने आयेगी। जुलाई तक झारखंड में औसत वर्षा जहां लगभग 330 मिलीमीटर होती थी, वहीं इस वर्ष अब तक मात्र 98 से 99 मिलीमीटर ही हुई है। धान रोपनी के समय न्यूनतम वर्षा होने से जहां किसान हताश हैं वहीं कृषि व्यवसाय से जुड़े लोग भी परेशान हैं। इसका सीधा असर बीज-खाद एवं कीटनाशकों की बिक्री पर भी पड़ रहा है।
खरीफ की फसल कुल 22.38 लाख हेक्टेयर में होती है, लेकिन इस वर्ष अब तक सिर्फ 2-3 प्रतिशत ही रोपनी हो पायी है। पलामू प्रखंड, देवघर, कोल्हान आदि क्षेत्रों की स्थिति और भी खराब है।
जानकारों के अनुसार इस वर्ष राज्य में खाद्यान्न उत्पादन पिछले वर्ष से अधिक प्रभावित होगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष 58.80 प्रतिशत रोपनी होने से 12,69,698 मीट्रिक टन उत्पादन कम हुआ था। इस वर्ष की रोपनी कम होने के कारण खाद्यान्न उत्पादन में अप्रत्याशित गिरावट आयेगी। खाद्यान्न उत्पादन में कमी से पशुचारे की कमी स्वाभाविक रूप से होगी। इसकी चिंता भी किसानों एवं पशुपालकों को सता रही है। धान की खेती करने वाले कृषकों को पुआल के रूप में सूखा एवं पौष्टिक चारा लम्बे समय तक उपलब्ध हो जाता है। परंतु उत्पादन कम होने से इसकी भी कमी होगी।
हालांकि पिछले वर्ष राज्य में औसत से कम वर्षा होने के कारण पूरे राज्य को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित किया था और राज्य के बीपीएल, एपीएल तथा अन्य अभावग्रस्त परिवारों को 35 किलोग्राम अनाज या इसके बदले में चार सौ रुपये राहत राशि प्रतिमाह देने का प्रावधान किया गया था। परंतु इस वर्ष वर्षा कम होने से स्थिति ज्यादा भयावह होने की आशंका है। राजनीतिक पार्टियां राज्य को अकालग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग कर रही हैं परंतु सरकार की ओर से अभी तक पिछले वर्ष की भांति राज्य को सूखाग्रस्त क्षेत्र भी घोषित नहीं किया गया है।

 

Have your say!

Add your reaction below. Be nice. Keep it clean. Stay on topic. No spam.

Your comments will be moderated. Please refrain from making any comments which contain hatred / racial / abusive language. We reserve the right to not publish / moderate your comment without specifying any reasons whatsoever.