शिबू के खिलाफ अपीलें उच्चतम न्यायालय में विचारार्थ स्वीकार
उच्चतम न्यायालय ने शशिनाथ झा हत्याकांड में पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को दोषमुक्त करार देने के झारखंड उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर याचिका को आज विचारार्थ स्वीकार लिया। न्यायमूर्ति अलतमस कबीर और न्यायमूर्ति ए.के. पटनायक की खंडपीठ ने श्री सोरेन के निजी सचिव दिवंगत शशिनाथ झा की माता प्रियम्बदा देवी एवं केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अलग-अलग अपीलें विचारार्थ स्वीकार कर ली। उच्च न्यायालय ने 22 अगस्त 2007 को श्री सोरेन सहित पांच अभियुक्तों को आरोप मुक्त किया था। सीबीआई ने चार अन्य अभियुक्तों को आरोप-मुक्त किये जाने के फैसले को चुनौती तो दी है, लेकिन श्री सोरेन को अपनी अपील से अलग रखा है। हालांकि श्रीमती प्रियम्बदा ने सीबीआई के इस कदम के मद्देनजर झामुमो अध्यक्ष सहित सभी पांच आरोपियों को दोषमुक्त किये जाने के फैसले को चुनौती दी है।
दिल्ली की एक निचली अदालत ने 28 नवम्बर 2006 को श्री सोरेन को उनके निजी सहायक की हत्या के मामले में दोषी ठहराया था और पांच दिसम्बर 2006 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। शशिनाथ झा राजधानी के धौलाकुआं इलाके से 22 मई 1994 को लापता हो गये थे और अगले दिन कथित तौर पर श्री सोरेन के विश्वासपात्रों के साथ रांची में अंतिम बार देखे गये थे। बाद में श्री झा को मृत पाया गया था। ऐसा आरोप है कि 1993 में अल्पमत में आयी केंद्र की पी.वी. नरसिंहराव सरकार को बचाने के लिये श्री सोरेन और झामुमो के अन्य सांसदों ने धन एेंठे थे और इसकी जानकारी श्री झा को भी थी।

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