घर का निर्माण और वास्तु के नियम
* चिनाई शुरू करते समय या निर्माण की नींव रखते समय ईशान या पूर्व दिशा से जमीन पाटने का काम करना चाहिए। उत्तर दिशा से भी काम शुरू किया जा सकता है। ऐसे मुहूर्त में किया गया कार्य जल्दी पूरा होता है। हमेशा स्थिर लग्न में और चर चन्द्रमा में ही निर्माण कार्य का आरंभ होना चाहिए।
* इमारत बनवाने में लकड़ी और लोहे का प्रयोग अधिक से अधिक करना चाहिए। पुरानी लकड़ी, जंग लगा लोहा और पुरानी ईटों का इस्तेमाल न करे।
* गेस्ट रूम सदैव पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा में बनाना चाहिए। वैसे, वायव्य कोण भी आने-जाने वालों के लिए उत्तम स्थान है। मेहमान के कमरे के लिए अलग से एंट्री बनाएं। घर के बीचों-बीच ब्रह्म स्थान खाली हो, तो उत्तर की ओर सीढ़ियां बनवाकर पहली या दूसरी मंजिल पर गेस्ट रूम बनाया जा सकता है।
* भवन, मकान या कोठी की पूर्व दिशा में फलदान पेड़ या ऊंचे उठने वाले पेड़ लगाना शुभ होता है, लेकिन ऐसे पेड़ पश्चिम दिशा में नहीं होने चाहिए। पश्चिम दिशा में मकान की अंतिम चारदीवारी के बाद खाली जगह नहीं छोड़नी चाहिए। इससे सेंधमारी और चोरों को रास्ता मिल जाता है।
* घर की नकदी और बहुमूल्य कागजात आदि के लिए सेफ या अलमारी आदि सदैव उत्तर दिशा की ओर होनी चाहिए। यदि किसी कारण बेसमेंट का निर्माण कराया गया हो, तो वहां भी उत्तर की ओर इस प्रकार के मूल्यवान चीजें रखी जा सकती हैं।
* स्टोर रूम दक्षिण दिशा या आग्नेय कोण में बनाया जा सकता है, बशर्तें वहां किचन के उपयोग की सामग्री रखी जाए।
* पानी का कनेक्शन पूर्व में और उसका स्टोरेज टैंक पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम में बनाना ठीक रहेगा।
* मकान के मेन गेट पर सुबह 9 बजे से दोपहर 3-4 बजे के बीच दूसरे भवन की छाया नहीं पड़नी चाहिए। इससे वास्तु दोष घर के बाहर से ही परिपक्व हो जाता है। यदि इस प्रकार का वास्तु दोष हो रहा हो, तो मुय द्वार के सामने गणेश प्रतिमा या वास्तु यंत्र अवश्य लगा लेना चाहिए।
* गल्ला तिरोजी और मंदिर आदि में कुबेर यंत्र श्रीयंत्र (जो विद्वान पंडित से सिध्द किए गए हों) शुभ मुहूर्त जैसे दीवाली, वसंत पंचमी या ग्रहण आदि के दौरा रखने चाहिए।
* बच्चों की बढ़िया पढ़ाई और बेहतर रिजल्ट के लिए स्टडी रूम घर के ईशान कोण में होना चाहिए। पूर्व और उत्तर दिशा के मध्य का स्थान ईशान कोण होता है। ईशान कोण का महत्व उससे मिलने वाली एनर्जी पर टिका है। इस एनर्जी के असर से बच्चों का अपरिपक्व दिमाग भी एकदम संचालित होता है। स्टडी रूम में फेंगशुई के कुछ शुभ चिन्ह तथा उत्तर की दीवार की ओर सरस्वती यंत्र की स्थापना भी की जा सकती है।
* यदि आप घर के ड्राइंग रूम को डायनिंग रूम के तौर पर भी प्रयोग करें, तो डायनिंग टेबल सदैव दक्षिण पूर्व में ही लगाएं।
* घर में परिवार, बुजुर्गों, दिवंगत पितरों, देवी-देवताओं के चित्र टांगने के लिए सदैव पूर्व या उत्तर दिशा की दीवारों का प्रयोग करना चाहिए।
* बच्चों के कक्ष में भयानक, चित्र, पेंटिंग या मूर्ति आदि नहीं लगाने चाहिए, जिससे उन्हें डर लगे।
* बिल्ली, कुत्ते या किसी और पालतू जानवर जैसे मोर-तोता आदि के लिए दक्षिण-पूर्व का स्थान उपयुक्त है। अगर इमारत के बाहर दक्षिण-पूर्व में या पश्चिम में इनके लिए स्थायी स्थान बना दिया जाए, तो ज्यादा अच्छा रहता है।
* ड्राइंग रूम के नैऋत्य कोण में ही बिजली के स्विच, टेलीविजन, म्यूजिक, सिस्टम, बैटरी, इनवर्टर, टेलीफोन आदि रखने चाहिए। यदि टेलीफोन व्यापारिक या कारोबारी व्यक्ति का हो, तो उत्तर दिशा में भी इसका एक्सटेंशन लिया जा सकता है, लेकिन मेन टेलीफोन नेऋत्य या आग्नेय कोण में ही होना चाहिए।
* किसी भी घर के अंदर से ऊपर जाने वाली सीढ़ियां पूर्व या दक्षिण दिशा में शुभ होती है। सीढ़ियां विषम संख्या में दाहिनी ओर झुकाव वाली हों, तो बढ़िया रहता है। घर का जल निकास स्त्रोत उत्तर या वायव्य कोण में ठीक रहता है।


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