अब किचन भी हो गई है
घर के सबसे खास हिस्से की बात की जाए तो किचन सबसे पहले दिमाग में आता है। इसे घर की आत्मा भी कहा जाता है। किचन ही किसी घर का वह हिस्सा होता है जिसे परिवार क सभी सदस्य खास मानते हैं। माने भी क्यों न, इसी हिस्से से तो मुंह में पानी ला देने वाली लज्जतदार डिशें निकलती है। किचन की शान-शौकत से ही घर का रुतबा मालूम पड़ता है। ऐसा माना जाता है कि एक व्यवस्थित रसोईघर से ही व्यवस्थित घर का प्रतिबिंब झलकता है। यही निगम मेस में आपके भोजन बनाने के दौरान उपयोग होने वाले उपकरणों व अन्य साधनों पर भी लागू होता है।
किचन में हमारी सारी कोशिश कुछ ऐसा बनाने की होती है जो न सिर्फ घर के सदस्यों की भूख मिटाए बल्कि उनकी सेहत व स्वाद को भी बनाए रखे। यह कोशिश तब और भी रंग लाती है जब किचन का हर हिस्सा आपके काम में सहयोग करें। पिछले कुछ वर्षों में तकनीक व अन्य संयंत्रों का जो विकास हुआ है उससे किचन की रूपरेखा में भी अभूतपूर्व परिवर्तन आए हैं। एक समय तब जब भोजन बनाने की कला ही महत्व रखती थी और महिलाएं किचन में सिर्फ साफ-सफाई को ही सब कुछ मानती थी। उस समय चूल्हे में भोजन बनाने व बर्तनो को राख से साफ करना बस यही होता था किचन का खास काम। अब शहर तो दूर गांव में भी चूल्हे का चलन खत्म हो चुका है। गांव में भी घरों के निर्माण में किचन को पूरा महत्व दिया जाने लगा है तो भला शहरों के किचन की बात ही क्या है।
इंटीरियर डिजाइन का खास महत्व किचन से ही ही मालूम पड़ता है। किचन को सजाने-सवारने में डिजाइनर को सबसे ज्यादा वक्त भी लगता है। यह घर का वह हिस्सा होता है जहां महिलाएं सबसे ज्यादा वक्त बिताती हैं। ऐसे में इसे खास बनाने का दबाव डिजाइनर ही महसूस सकता है। मेट्रो सिटीज में तो लोगों के पास इतना समय ही नहीं है कि वह किंचन में घंटों बिताएं। इसलिए बड़े शहरों के घरों में किचन को इस तरह डेकोरेट किया जाता है कि इनमें भोजन बनाते समय ज्यादा से ज्यादा काम मशीनों से किया जाए ताकि समय की बचत हो सके। अब खाना बनाना सिर्फ महिलाओं की ही जिम्मेदारी नहीं रही। कामकाजी महिलाओं की बढ़ती संख्या से किचन में पुरुषों व बच्चों का भी प्रवेश होने लगा है। किचन के काम में महिलाओं के साथ पुरुष व बच्चे भी उनका सहयोग करते हैं। इस सहयोग को आनंद में बदलने के लि ही माडर्न किचन तैयार किये जाते हैं। जिसमें हर वह सुविधा होती है जो खाना बनाने को मनोरंजन में तब्दील कर दें। मार्डन किचन की व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य है काम को गति देना व खाना बनाने की प्रक्रिया को आसन व साफ-सुथरा बनाना। इस समय किचन में क्या-क्या बदलाव हो रहे हैं। यह जानने के लिए माडुलर किचन की पूरी व्यवस्था को जानना होगा।
माडुलर किचन इस तरह तैयार किये जा रहे हैं कि उनमें स्टाइल के साथ सिप्लीसिटी भी नजर आए। किचन, किचन की ही तरह रहे और इसमें हर वह सुविधा हो जो आपके किचन सम्बधी काम को बिल्कुल आसान और समय की बचत से जोड़ दें। माडुलर किचन बनवाने जा रहे हैं तो यह ध्यान रखें कि स्टाइलिश होने के बजाय यह आरामदायक हो। किचन में वेंटीलेशन, सिंक और चिमनी का विशेष ध्यान रखें। इन तीनों चीजों से ही किचन की नीव रखी जाती है। यदि यह तनों चीजें सही प्रकार से व्यवस्थित की गई है तो किचन लम्बे समय तक साफ-सुथरा व नया जैसा बना रहता है माडुलर किचन की खूबियों में कई सी चीजें जुड़ी हुई हैं जो इसे सामान्य किचन से कहीं ज्यादा बेहतर बनाती है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे साफ करना बेहद आसान होता है। पुराने समय के किचन की सफाई करने में महिलाओं के पसीने छूट जाते थे। लेकिन माडुलर किचन को इस तरह बनाया जाता है कि तेल व मसालों के गहरे दाग भी गीले कपड़े से ही साफ हो जाएं। इसके मेंटीनेंस में भी कुछ खास प्रयास करने की भी जरूरत नहीं होती। एक बार जो चीजें लग गई वह जीवन पर्यत वैसी ही बनी रहती है।
आधारभूत व्यवस्था के अलावा मॉडुलर किचन में उच्च तकनीक से लैस उपकरण भी शामिल रहते हैं। इन उपकरणों की सहायता से कुकिंग आसान व मनोरंजन से भरपूर प्रक्रिया बन जाती है। माडुलर किचन में मौजूद तकनीक से उन लोगों को काफी फायदा होता है जो खाने के तो शौकीन हैं लेकिन समय की कमी के कारण किचन में ज्यादा प्रयोग नहीं कर पाते हैं। सब्जियों को महीन काटना हो या आटा गूंधना हो, हर काम मशीनें चुटकियों में कर देती हैं। इससे समय काफी बचता है। इन छोटेछोटे उपकरणों के अलावा माइक्रोवेव ओवन व मिक्सी से वह सारे काम मिनटों में हो जाते हैं जिन्हें पारंपरिक तरीके से करने में घंटों लगते हैं। इस समय टच स्क्रीन माइक्रोवेव व हाईटेक रेफ्रीजरेटर से माडुलर किचन और भी बेहतर हो गये हैं। इन उपकरणों में तकनीक का विकास इस स्तर तक हो चुका है कि इनमें चाइल्ड लाक सिस्टम तक उपलब्ध है। बच्चों के किचन में उछल-कूद मचाने पर यदि उनका हाथ धोखे से इन उपकरणों पर पड़ गया तो इससे बच्चों को कोई नुकसान नहीं होगा। बड़ों की अनुपस्थिति में बच्चे यदि किचन में जाकर इन उपकरणों के साथ खेलना चाहेंगे तो यह चलेंगे ही नहीं। किचन का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा कटिंग बोर्ड भी है। हाइजीन फैक्टर को ध्यान में रखते हुए माडुलर किचन में कटिंग बोर्ड को विशेष स्थान दिया गया है। इस तरह के किचन में यह ध्यान रखा जाता है कि चाकुओं की धार खराब न हो। इसके लिये अलग-अलग तरह की चाकुओं के साथ स्टालिश वुड कटिंग बोर्ड भी उपलब्ध रहता है। यह बोर्ड किचन की खूबसूरती को तो निखारता ही है इसके अलावा कटिंग प्रोसेस को बेहद सिस्टमेटिक बना देता है।
भारत में माडुलर किचन के अलावा ओपन किचन यानी बिना दीवारों वाली रसोईघर की विचारधारा भी तेजी से विकसित हो रही है। ओपन किचन मुख्य रूप से घर के किसी कमरे में ही किनारे की तरफ बना दिये जाते हैं। यह आकार में इतने बड़े होते हैं कि किचन व कमरे में फर्क नजर ही नहीं आता। बेहद खुले-खुले प्रतीत होने वाले इन किचन को इसलिये भी प्राथमिकता दी जा रही हैक्योंकि अब घरों के आकार छोटे होते जा रहे हैं। ऐसे में किचन के लिये अलग से जगह निकालना मुश्किल हो रहा है। कमरे में ही किनारे की तरफ खूबसूरत माडुलर किचन बना देना ओपन किचन कहलाता है। फर्नीचर के खूबसूरत पीस इस तरह के किचन को और भी आकर्षक बना देते हैं। इससे साथ लगे कमरे की खूबसूरती में भी चार-चांद लग जाते हैं। ओपन किचन बेहद सफाई मांगते हैं, क्योंकि यह आसानी से किसी भी नजर आ जाते हैं।


Have your say!