प्रोपर्टी खरीदने से पहले कस्टमर्स जानना चाहते हैं
रीयल एस्टेट सेक्टर में रिसर्च का बोलबाला है। आज कोई भी प्रतिष्ठित डेवलपर मार्केट रिसर्च को नजरअंदाज नहीं कर सकता है। मार्केट में कई तरह के प्रोडक्ट हैं और सभी के खरीददार अलग-अलग वर्ग के हैं। ऐसे में मौजूदा बायर्स मार्केट में किसी भी प्रोडक्ट की सफलता के लिए मार्केट एनालिसिस काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रीयल एस्टेट का रूख कैलकुलेटेड रिस्क की तरफ हो गया है। बायर से लेकर इन्वेस्टर तक और ब्रोकर से डेवलपर तक, सभी किसी शुरुआत से पहले पर्याप्त आंकड़े जुटाने लगे हैं। नतीजा यह है कि प्रोपर्टी वेबसाइट और जानकार पेशेवरों की डिमांड काफी बढ़ गई है। अब तक अनआर्गनाइज्ड सेक्टर के रूप में पहचाने जाना वाला रीयल एस्टेट आर्गनाइज्ड का लेबल लगा रहा है। इस सेक्टर के कामयाब लोग और सफल कम्पनियां आंकड़ों का प्रयोग बाजार के रूख को परखने और समझने में लगाने लगी है। आंकड़ों का प्रयोग विभिन्न शहरों में ग्राहकों की जरुरतों को समझने तथा मांग की स्थिति के लिए किया जाने लगा है। आंकड़ों के आधार पर निर्माण कम्पनियां परियोजनाएं तैयार कर रही है। सरकारी डेवलपमेंट एजेंसियां भी आंकड़ों को महत्व देने लगी है। अच्छी मार्केट रिसर्च, डेवलपर्स को मार्केट का ट्रेंड समझने में मदद करती है। खरीददारों के संबंध में जुटाए गए डाटा बैंक से किसी खास प्रोजेक्ट के लिए ग्राहकों को पता लगाने में मदद मिलती है। हाई एंड रेसिडेंशियल, कारपोरेट आफिस, शॉपिंग मॉल्स के ग्राहकों का अलग सेगमेंट होता है। ऐसे प्रोजेक्ट में ग्राहकों का डाटा बैंक काफी उपयोगी होता है। निर्माण कम्पनियां मार्केट रिसर्च पर पूरी शक्ति लगा रही है। लोकेशन के साथ-साथ वहां की जनसंख्या, लोकेशन की विशेषता और कनेक्टिविटी पर पूरी जानकारियां हासिल कर रही है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार न केवल आनेवाले समय बल्कि हमेशा से ही इसका फायदा डेवलपर्स को मिलता रहा है। आज गलाकाट प्रतियोगिता है, ऐसे में अपना परचम लहराने के लिए जरूरी है कि वह मार्केट एनालिसिस करे और उसका प्रयोग अपने प्रोजेक्ट में करे। बायर्स मार्केट को भी अच्छी क्वालिटी और सही कीमत का लाभ होता है।


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