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ओरल एण्ड मैक्सिलोफेशियल क्षेत्र में अपार संभावनाएं

चिकित्सकीय विकास के क्रम में नित्य नये आयाम जुड़ रहे हैं। ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी उसी चिकित्सीय विकास क्रम प्रक्रिया की एक महत्वपूर्ण उपज है। इस क्षेत्र के विकास से जहां एक ओर ट्रॉमा (दुर्घटनाग्रसित) और ओरल (मुंह) रोग से ग्रसित व्यक्तियों के लिये वरदान साबित हुआ है। वही दूसरी ओर चिकित्सकीय क्षेत्र में प्रवेश करने वाले छात्रों के लिये संभावनाओं का एक नया द्वार खोल दिया है।
‘ओरल एंड मेक्सिलोफेशियल’ तीन शब्दों ओरल, मैक्सिला एवं फेश का समुच्य है। जो ओरल यानी मुंह, मैक्सिला यानी जबड़ा एवं फेश यानी चेहरा से संबंधित होने का परिचय देता है। इसका तात्पर्य यह है कि ओरल एण्ड मैक्सिलोफेशियल सर्जन इनसे संबंधित बिमारियों एवं विकृतियों का इलाज करते हैं। चिकित्सकीय क्षेत्र में ओरल एण्ड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी दंत चिकित्सकीय विशेषज्ञता से संबंधित है। परंतु, यह दंत चिकित्सा तक सीमित नहीं है। वास्तव में, मुंह, जबड़ा, दांत, जीभ, गाल, नाक, होंठ, गला एवं चेहरा से संबंधित विकृतियां एवं बिमारियों का इलाज ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन करते है। इस तरह से इनका क्षेत्र काफी विस्तृत हो जाता है। इस क्षेत्र के विकास से पहले इनका इलाज अलग-अलग चिकित्सक करते थे। जिनका संबंध तो सर्जरी से होता था। परन्तु, इस क्षेत्र के वे विशेषज्ञ नहीं होते थे।
ओरल एण्ड मैक्सिलोफेशियल सर्जन के कार्य क्षेत्र
ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन के कार्य क्षेत्र काफी विस्तृत है। वे मुंह, दांत, जबड़ा, चेहरा, गला, होंठ, जीभ, नाक के बिमारियों एवं विकृतियों का इलाज तो वे करते ही हैं साथ ही वे दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के इलाज के दौरान सर्जरी प्रबंधन का गुरुतर दायित्व भी निभाते हैं।
दंत चिकित्सा
ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन दंत चिकित्सकीय विशेषज्ञ होते हैं। इसलिए वे इस कार्य को काफी निपुणता से करने में सक्षम है। इसके अलावा वे दंत चिकित्सा के क्षेत्र में निम्न सेवाएं देते हैं।
1. दांतों की बीमारियों का इलाज
2. टूटे हुए दांतों के स्थान पर नये दांत लगाना
3. टेढ़े-मेढ़े दांतों को ठीक करना
4. दांतों को चमकीला बनाना
5. दांतों में ज्वेलरी लगाना और उसको सौंदर्यीकरण करना
ओरल कैंसर का इलाज
भारत में तम्बाकू, गुटका, पान का प्रचलन काफी है और इसके सेवन करने वाले लोगों में इस बीमारी का होने का खतरा काफी अधिक होता है। मुंह में बीमारियों के रूप में यह कैंसर प्रारंभिक रूप में दिखता है। ओरल एण्ड मैक्सिलोफेशियल सर्जन इसकी पहचान प्रारंभिक अवस्था में ही कर लेते हैं और इसका समुचित इलाज कर देते हैं। कई लोगों में यह भयावह रूप में ही पता चलता है। वैसी स्थिति में शल्य क्रिया से ही उसका उपचार संभव है। मुंह एवं जबड़े का शल्य क्रिया ओरल एवं मैक्सलोफेशियल सर्जन ही कर सकते हैं। उनके द्वारा किया गया शल्य क्रिया का प्रभाव चेहरे और मुंह पर नहीं दिखता क्योंकि वे उस भाग को पुन: उसी रूप में व्यवस्थित कर देते हैं।
दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तियों का इलाज
दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति का समुचित इलाज में ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वे इलाज के दौरान सर्जनों की टीम का प्रबंधन करते हैं। नाक, मुंह, जबड़ा, गला, दांत में गंभीर चोट आने के कारण जो टूट-फूट होता है। उसका इलाज का दायित्व उन्हीं पर होता है। नाक एवं जबड़ा के टूटने की स्थिति में उसका शल्य क्रिया द्वारा पहले की तरह व्यवस्थित मैक्सिलोफेशियल सर्जन ही कर सकते हैं। इस विद्या के आने से पहले लोग टूटे हुए नाक एवं जबड़ा के साथ जीवन व्यतीत कर लेते थे।
जन्मजात विकृतियों का इलाज
कई लोग चेहरे पर विकृतियां लेकर ही जन्म लेते हैं। टेढ़े-मेढ़े नाक, अव्यवस्थित एवं खिसके हुए जबड़े एवं कटे-फटे होंठ जैसे जन्मजात विकृतियों का शल्य क्रिया द्वारा उपचार आज संभव है और यह कार्य ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन ही कर सकते हैं।
सौंदर्य मानक के अनुरूप फेस का आकार
ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन फेस का आकार सौंदर्यमानक के अनुरूप बना देते है। होंठ, नाक, दांत एवं मुंह के आकार-प्रकार में परिवर्तन करके वे व्यक्ति के फेस को सौंदर्य मानक के अनुरूप बना देते हैं।
जबड़ों का प्रतिस्थापन
ओरल कैंसर या गंभीर बीमारी या दुर्घटना में किसी व्यक्ति का जबड़ा इस तरह क्षतिग्रस्त हो जाता है कि पुन:उसको ठीक करना संभव नहीं है तो वैसी स्थिति में उसे शल्य क्रिया द्वारा हटाना पड़ता। हटाये गये जबड़ों के स्थान पर नये जबड़े का प्रतिस्थापन करना पड़ता है। यह कार्य ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन ही करते हैं। वे इसका प्रतिस्थापन इस तरह करते हैं कि प्रतिस्थापन का प्रभाव दिखाई नहीं पड़ता है और व्यक्ति का जबड़ा सामान्य प्रतीत होता है।
वर्तमान समय में ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जनों की मांग काफी है। क्योंकि, सभी हास्पिटलों के ट्रॉमा सेंटर में उनकी आवश्यकता है। महानगरों में इस क्षेत्र के डाक्टरों के निजी क्लिनिकों का भी काफी प्रचलन है। परन्तु झारखंड में इस विद्या से संबंधित डाक्टरों की संख्या काफी कम है। इसका मुख्य कारण यह है कि इस विद्या के कार्यक्षेत्र से ज्यादातर लोग अपरिचित है और यहां के ज्यादात्तर डाक्टरों ने महानगरों में ही अपना कार्यक्षेत्र बना लिये हैं। वैसी स्थिति में यहां के छात्रों को चिकित्सकीय क्षेत्र में रास्ते तलाशते समय इस विद्या की ओर भी ध्यान देना चाहिये। क्योंकि झारखंड के क्षेत्र में इस विद्या के लिये स्थान अभी रिक्त है। इसलिए यहां ओरल एण्ड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के क्षेत्र के लिये आपार संभावनाएं।
-लेखिका आलम हास्पीटल एण्ड रिसर्च सेंटर में ओरल एण्ड मैक्सिलोफेशियल सर्जन हैं।

 

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