एजुकेशन पर अब नहीं पड़ेगी महंगाई की मार
केंद्र सरकार ने कुछ समय पहले एजुकेशन लोन का दायरा हर कोर्स तक बढ़ा दिया था। एजुकेशन के फील्ड में एक बड़ा कदम माना गया, क्योंकि इसके साथ ही ब्याज के भुगतान पर इनकम टैक्स में सभी को रियायत का लाभ भी जुड़ा हुआ था। इससे पहले केवल इंजीनियरिंग, मेडिसिन, मैनेजमेंट जैसे चुनिंदा विषयों में पढ़ाई के लिए ही यह रियायत मिलती थी। एजुकेशन में ऐसे ही एक और अहम फैसले पर अमल शुरू हो गया है। भारत सरकार अब आपके एजुकेशन लोन का ब्याज खुद चुकाएगी। वो भी पढ़ाई खत्म होने के एक साल बाद या जॉब लगने के छह महीने बाद तक। एक अप्रैल से लागू इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80ई के संशोधन के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी वित्तीय संस्थान या मान्यता प्राप्त चैरिटेबल संस्थान से अपनी या अपने परिजन की हायर स्टडी जारी रखने के लिए कोई लोन लेता है, तो ब्याज भुगतान के मद में डिडक्शन का फायदा मिलता है। यह हायर स्टडी किसी स्कूल, बोर्ड या केंद्र/राज्य सरकार/लोकल अथॉरिटी या इनकी ओर से मंजूर अथॉरिटी से मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से सीनियर सेकंडरी एग्जाम या इसके समकक्ष कोई एग्जाम पास करने के बाद हो। संशोधन के तहत शिक्षा के सभी क्षेत्रों (वोकेशनल कोर्सेज समेत) को इस सेक्शन के दायरे में लाया गया है, जबकि पहले हायर स्टडी के दायरे में इंजीनियरिंग, मेडिसिन, मैनेजमेंट में ग्रैजुएट और पोस्ट ग्रैजुएट कोर्सेज की फुलटाइम स्टडी को माना जाता था।
अब एक और योजना देश में एजुकेशन लोन लेने वालों की संख्या बढ़ा सकती है, जिसमें केंद्र सरकार खुद लोन का ब्याज चुकाएगी। साढ़े चार लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले परिवारों को इस योजना का लाभ मिलेगा। यह योजना ‘इंडियन असोसिएशन ऑफ बैंक्स’ के सहयोग से चलाई जा रही है। ऐसे सभी लोन राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा दिए जाएंगे और भारत में मौजूद कोर्सों के लिए ही मान्य होंगे। ऐसे कोर्सेज की लिस्ट भी मानव संसाधन मंत्रालय तैयार कर रहा है। केनरा बैंक इस काम के लिए नोडल एजेंसी का काम करेगा। लोन संबंधी अन्य दिशा-निर्देश देश के सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों को 2 जुलाई को भेज दिए गए हैं।
क्या है एजुकेशनल लोन
= पढ़ाई के लिए बैंकों द्वारा दिया जाने वाला लोन। इसके लिए पैरंट्स को लोन दिया जाता है। अगर स्टूडेंट मेधावी है, तो पैरंट्स की लोन चुकाने की क्षमता न भी हो, तो भी लोन मंजूर किया जाता है। माना जाता है कि कोर्स पूरा होने और जॉब लगने के बाद स्टूडेंट खुद लोन वापस करने में सक्षम होगा। यही सोचकर लोन वापसी के लिए लंबी समयावधि निर्धारित की जाती है।
= लोन के रूप में फीस के साथ बुक्स, कंप्यूटर, आने-जाने का खर्च, इंस्ट्रूमेंट्स आदि कई चीजों का खर्च वहन किया जाता है। कोर्स के दौरान हर साल रकम जारी की जाती है।
= देश में पढ़ने के लिए अधिकतम साढ़े 7 लाख रुपये और विदेश के लिए अधिकतम 15 लाख रुपये लोन लिया जा सकता है, जिस पर 11 से 15 प्रतिशत सालाना ब्याज चुकाना होगा।
= जॉब लगने के छह माह या कोर्स खत्म होने के एक साल के भीतर ईएमआई शुरू होती है।
= लोन वापसी का समय लगभग 5-7 साल होता है।
अब क्या होगा
= मान लीजिये कि एक पिता ने बेटी के इंजीनियरिंग कोर्स के लिए चार लाख रुपये का लोन चार साल के लिए लिया। बेटी जब लोन चुकाना शुरू करेगी, तो चार लाख मूलधन के हिसाब से ही ईएमआई शुरू होगी क्योंकि बीच की अवधि का ब्याज केंद्र सरकार दे चुकी होगी।
नई स्कीमें किसके लिए
* 2009-10 या इसके बाद के कोर्सों के लिए।
* ब्याज चुकाने वाली योजना केवल भारत में शिक्षा के लिए।
* भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थान और मान्य डिग्री, पीजी या डिप्लोमा कोर्सों के लिए।
* परिवार की वाषिर्क आय 4.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए।
* राज्य या भारत सरकार के अन्य विभागों द्वारा दिए जा रहे लोन पर भी सब्सिडी दी जाएगी।
* पूरे कोर्स के दौरान छात्रों को कोई ब्याज नहीं देना होगा।
* कोर्स खत्म होने के बाद भी एक साल या जॉब लगने के छह माह बाद तक कोई ब्याज नहीं।
* इसके बाद भी बस बची हुई रकम पर देना होगा ब्याज।
* अगर छात्र बीच में ही पढ़ाई छोड़ देता है या कॉलेज से निकाल दिया जाता है, तो उसे इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।


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25 August 2010 at 13:31