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बोर्ड में अच्छा करना होगा आईआईटी-जी के लिए

आईआईटी-जी की तैयारी कर रहे स्टूडेंट सावधान हो जाएं। अगले महीने आईआईटी काउंसिल अगर एक नए फर्ॉम्युले को मंजूरी दे देती है, तो आईआईटी-जी का सिस्टम पूरी तरह बदल जाएगा। यह फर्ॉम्युला कहता है कि आईआईटी-जी के लिए क्वॉलिफाई करने के लिए आपको अपनी स्कूली एजुकेशन में अच्छा परफॉर्म करना होगा। अगर आईआईटी-जी के लिए आपने अपनी स्कूली पढ़ाई को इग्नोर कर रखा है, तो यह नहीं चलेगा।
एडमिशन रिफॉर्म के लिए बनी आईआईटी की कमिटी के इस फर्ॉम्युले में दो नए टर्म अहम हैं- सीडब्ल्यूपी और एनएटी। सीडब्ल्यूपी यानी कॉम्पोजिट वेटेड परफॉमेंर्स का मतलब है बारहवीं बोर्ड में साइंस सब्जेक्ट्स में मिले मार्क्स। एनएटी का मतलब है नैशनल एप्टिटयूड टेस्ट। जैसा कि साफ है सीडब्ल्यूपी स्कोर वे नंबर होंगे, जो बोर्ड में आपको मिलेंगे। आईआईटी-जी के लिए क्वालिफाई करने के फर्ॉम्युले में इसका वेट 70 पसेंर्ट है। बाकी 30 पसेंर्ट वेटेज उन मार्क्स का होगा जो एप्टिटयूड टेस्ट से मिलेंगे। इसके बाद कोई स्टूडेंट आईआईटी-जी के लिए क्वॉलिफाई कर सकेगा।
लेकिन यहां पर एक पेच है। इस नए सिस्टम के बाद आईआईटी में एंट्रेस के प्रोसेस के दो लेवल हो जाएंगे- पहले नेट और फिर जी। इसके उलट सरकार का मानना है कि एग्जाम कम से कम हों, बल्कि सभी एंट्रेंस एग्जाम एक में सिमट जाएं। इसलिए हो सकता है सरकार इस प्रपोजल को वीटो कर दे।
बहरहाल, जिस नेट का आइडिया रखा गया है, वह ऑनलाइन होगा और साल भर होता रहेगा। इसमें बारहवीं के स्टैंडर्ड के आसान सवाल पूछे जाएंगे। इस नए फर्ॉम्युले का मकसद जी में भीड़ कम करना है। फिर ये भी आरोप लगते रहे हैं कि जी के लिए अपीयर होने के मौजूदा सिस्टम में बोर्ड एग्जाम के रिजल्ट को पूरी तवज्जो नहीं दी गई है। इसका नतीजा यह होता है कि स्टूडेंट्स अपनी स्कूली पढ़ाई की बजाय जी की तैयारी में बिजी रहते हैं। यह राय बनी है कि प्रफेशनल कोर्स के लिए अकैडमिक एजुकेशन के साथ समझौता नहीं होना चाहिए। उन्हीं स्टूडेंट्स को एंट्रेंस एग्जाम में मौका मिले, जिन्होंने स्कूली एजुकेशन में अच्छा किया हो।

 

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