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मानसिक तनाव : आज के युग का सबसे बड़ा अभिशाप

मानसिक तनाव विश्वव्यापी समस्या है। वास्तव में आज की दौड़ती-भागती जिन्दगी में मानसिक तनाव जीवन का एक हिस्सा बन गया है। संत्रास, कुण्ठा, ऊब आदि तनाव के विभिन्न नाम हैं। अधिकांश लोगों को इस प्रकार के तनावों से गुजरना पड़ता है। मानसिक तनाव की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। तनाव आज के युग का सबसे बड़ा अभिशाप है।
आशा-निराशा, जय-पराजय, सफलता-असफलता, सुख-दुख, उतार-चढ़ाव, जीवन में धूप-छांव की भांति आते रहते हैं। यदि हम अपने अनुकूल समय में प्रसन्न रहें किन्तु प्रतिकूल समय में दिमाग पर तनाव की पैदा करें तो यह उचित नहीं है। हमें हरहाल में प्रसन्न रहने का प्रयास करना चाहिये।
भांति-भांति के तनाव
तनाव के अनेक कारण है। कहीं शोरगुल वाली काम करने की जगह किसी के लिये तनाव का कारण बनती है तो कभी कुछ लोग किसी ट्रैफिक जाम के कारण फंस जाने से तनवग्रस्त हो जाते हैं। इस प्रकार तनाव पैदा होने के कई कारण गिनाये जा सकते हैं। इनका हमारे स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव पड़ता है।
तनाव कई प्रकार के होते हैं और हर उम्र के अपने-अपने तनाव हैं। बच्चों के तनाव युवकों के तनाव से तथा युवकों के तनाव वृध्दों के तनाव से भिन्न होते हैं। बच्चों के तनाव के कुछ कारण मां-बाप से प्यार न मिलना, बच्चों को अनावश्यक रूप से डांटना, बच्चों को उनकी मन-पसंद वस्तु ने दिलाना, बच्चों के साथ भेदभाव इत्यादि हो सकते हैं।
युवा वर्ग के अपने तनाव हैं। अधिकांश युवकों के तनाव के पीछे मुख्य कारण आर्थिक है जो स्वयं के परिवार से प्रारंभ होते हैं। मध्यम एवं निम्न वर्गीय परिवारों में अभाव जनित कलह, असंतोष और अशांति से युवक नहीं बच पाते हैं। इसके अतिरिक्त सम्पन्न व समृध्द परिवारों के युवा वर्ग भी आज तनाव से मुक्त नहीं है क्योंकि युवाओं के आहार में अनियमितताएं, मादक द्रव्यों का सेवन, गलत सोहबत आदि के प्रभाव से निरंतर बढ़ोतरी होती है। इसके अतिरिक्त यौन संबंधी तथा विवाह संबंधी कुठांये भी तनाव को जन्म देती है। साथ ही योग्यतानुसार रोजगार न मिलना भी युवा वर्ग के तनाव का मुख्य कारण है। वृध्दों के तनाव विशेष रूप से संतान द्वारा उनका ठीक प्रकार से पालन न करना, रिटायर्ड होने के पश्चात आर्थिक समस्यायें पैदा होना, शारीरिक अक्षमता, संतान का गलत रास्ते पर भटक जाना आदि इसमें शामिल है। इसके अलावा आज के आधुनिक युग के कदम-कदम पर तनावग्रस्त लोग मिलते हैं। मनुष्य का स्वभाव है कि वह सुख, शांति, समृध्दि व सम्पन्नता चाहता है लेकिन आधुनिक युग में ये चीजें ऐसी नहीं है जिन्हें आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।
आज का युग प्रतिस्पर्धा व प्रतियोगिता का युग है। प्रत्येक मनुष्य स्वयं को दूसरे व्यक्तियों से श्रेष्ठ साबित करना चाहता है और इसीलिये इच्छाओं का काई अंत नहीं रह गया है। इन्हीं सभी कारणों से हर वर्ग के लोग श्रमिक, मजदूर, विद्यार्थी, व्यापारी, अधिकारी, प्रबंधक यहां तक कि छोटे बच्चे भी तनाव के शिकार हैं। आज व्यक्ति के सामने कई प्रकार की समस्याएं हैं। व्यक्तिगत, सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक इत्यादि।
राजनीतिक उतार-चढ़ाव, बेरोजगारी, पारिवारिक वातावरण का अभाव आदि सब कारण ऐसे होते हैं जो मनुष्य के व्यक्तिगत जीवन को लगातार अमानवीय बना रहे हैं। यहां तक कि प्यार और स्ेह जैसी मानवीय भावनाएं दिखावटी बन गयी है। अत्यधिक तनाव की पहचान है चेहरे पर पीलापन झलकना, पसीना आना, दिल की धड़कन तेज होना और थकान इनकी अनदेखी करना खतरनाक और घातक है। इसके नतीजे गंभीर ही नहीं विनाशकारी भी हो सकते हैं। परिणाम शारीरिक और मानसिक दोनों ही रूपों में सामने आ सकते हैं। चकाचौंध, अत्यधिक कार्य तथा समय का दबाव भी तनाव पैदा करता है। घर में सहयोगी सदस्यों का कार्यालय में कर्मचारियों का तथा समाज में सामाजिक समर्थन न मिलना भी तनाव का कारण बन सकता है। हमारी आवश्यकताओं और क्षमताओं में असन्तुलन भी तनाव के लक्षण पैदा कर सकता है।
तनाव सिध्दांत के जनक महान मनोवैज्ञानिक डेन्स सलाई के अनुसार आज ‘मानसिक तनाव जीवन का हिस्सा बन गया है। आज ऐसे व्यक्ति की कल्पना असम्भव है जो मानसिक तनाव का अनुभव नहीं करता है।’
संसार के प्रसिध्द मनोवैज्ञानिक व कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रो.जेम्स सीत्र रोलमने ने एक बार लिखा था- सत्रहवीं शताब्दी को पुनर्जाकरण काल कहा जाता है, अठारहवीं शताब्दी को बौध्दिककाल, उन्नीसवीं शताब्दी को प्रगतिकाल और बींसवीं शताब्दी को चिन्ताओं का काल कहा जाता है।
वाल्टर टेम्पिल ने भी मनुष्य की जिंदगी पर सटीक टिप्पणी करते हुए कहा है ‘मनुष्य रोते हुए पैदा होता है शिकायत करते हुए जीता है और अन्तत: निराश होकर मर जाता है।’
तनाव के कारण हार्ट अटैक, गर्भपात, अनिद्रा, कब्जियत, दर्द, एकाग्रता में कमी, चिड़चिड़ापन तो होता ही है इसके अलावा हृदय रोग, त्वचा के रोग, डायबिटीज, अल्सर है। तनाव व्यक्ति को उत्साहहीन चिंतित और उदासीन बना देता है।
तनाव न केवल लोगों को अस्वस्थ कर रहा है बल्कि बुरी तरह कार्यक्षमता को भी प्रभावित करता है। केवल ब्रिटेन में ही हर वर्ष चार करोड़ घंटों की हानि होती है। यह जानकारी प्रसिध्द मनोविज्ञानी ने दी है। उन्होंने ब्रिटेन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर शोध कार्य किया है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों में तनाव को गंभीर बीमारी के रूप में देखा जा रहा है। उस पर शोध भी हो रहा है और तनाव दूर करने की पहल भी शुरू हुई है।
तनाव से मुक्त रहने के उपाय
तनाव से मुक्ति मिल सकती है जब व्यक्ति स्वयं इससे मुक्त होने का प्रयास करे क्योंकि यह कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिसे दवा औषधियों से दूर किया जा सके। फिर भी तनाव दूर करने के कुछ आसान उपाय बताये जा रहे हैं। इन उपायों की सफलता व्यक्ति के ऊपर निर्भर है कि वह इनका कितना पालन करता है।
1. परिवार जीवन की प्रथम पाठशाला है। व्यक्ति का पारिवारिक जीवन बहुत ही शांत होना चाहिये। यदि व्यक्ति का पारिवारिक जीवन अशांत व कलहयुक्त है तो परिवार का मुखिया और अन्य सभी सदस्य तनावग्रस्त रहेंगे। परिवार के हर सदस्य का यह दायित्व है कि वह प्रेम, शांति और सामंजस्य रखे।
2. बच्चों को अनावश्यक रूप से नहीं डांटना चाहिये, उन्हें किसी भी गलती पर मारना, पीटना नहीं चाहिये। उन्हें बहुत ही प्रेमपूर्वक कार्य करने के तौर-तरीके बताने चाहिये। घर में किसी एक सदस्य को अत्यधिक महत्व देना और दूसरे सदस्य की उपेक्षा करना भी अन्य सदस्यों के तनाव का कारण बनता है।
3. यदि समाज तनाव के बारे में कुछ करना चाहता है तो काम को मनुष्य के अनुकूल बनाने के लिये न केवल नये सिरे से प्रयास की जरूरत है बल्कि जीवन दशा सुधारने के भी प्रयास किये जाने चाहिये।
4. परिवार के सदस्यों का यह दायित्व है कि बच्चों में प्रारंभ से ही अच्छे संस्कार विकसित करें ताकि वे गलत संगत में न फंस जायें अन्यथा बच्चों के बिगड़ जाने पर पारिवारिक तनाव उत्पन्न हो जाता है।
5. परिवार के सदस्यों का यह दायित्व है कि वे धूम्रपान, मदिरापान और नशीली दवाओं का सेवन न करें अन्यथा बच्चों में इन आदतों का विकास हो जाता है जो कि पारिवारिक कलह का जन्मदाता और स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है।
6. जब आप कभी किसी चीज से चिंतित या परेशान हो तो उसे दबाइये मत क्योंकि कहा भी गया है कि चिन्ता चिता के समान है। अपनी चिन्ता व परेशानी उस समझदार एवं अनुभवी व्यक्ति को बताइये जो आपके विश्वास के योग्य हों और आपको सही दिशा तथा सलाह दे सके।
7. जब आपके पास कई कार्य एक साथ आ जाएं जो उन्हें देखकर आप परेशान या चिंतित न हो। ऐसा न समझे कि काम का बोझ है। कार्यों को आवश्यकता व प्राथमिकता के आधार पर करते जाएं और एक कार्य समाप्त हो जाने के पश्चात् ही दूसरा कार्य हाथ में लेना चाहिये।
8. प्रात: काल जल्दी उठना चाहिये ताकि आपको कहीं भी जाना हो मसलन आपको कार्यालय 8.00 बजे पहुंचना है तो आप दैनिक कार्यों से निवृत होकर निश्चित समय पर वहां पहुंच जायें अन्यथा विलम्ब होने पर व्यर्थ की भाग-दौड़ रहेगी।
9. आप दिनभर कार्यालय में मानसिक श्रम करते हैं तो इससे तनाव उत्पन्न होता है, अत: शाम को घर जाने के पश्चात यदि किचन गार्डन हो तो उसमें कुछ देर कार्य करें या फिर कुछ देर संगीत सुनें अथवा पत्र-पत्रिकाएं पढ़नी चाहिये।
10. कार्य करते समय बीच में थोड़ा समय निकालकर पड़ोसी से गपशप कीजिये और थोड़ा टहलिये भी। इससे काम की अधिकता का तनाव निश्चित रूप से कम होगा।
11. जीवन में अभाव होने से भी मानसिक तनाव उत्पन्न हो जाता है। अभाव किसी भी वस्तु का हो सकता है। आप उस अभाव को दूर करने का अपने स्तर पर प्रयास करें। जब आप ज्यादा अभावग्रस्त हों तो उस समय उन व्यक्तियों के बारे में सोचना शुरू करें जिनके पास आपसे कम सुविधा व साधन हैं। यह विचार आते ही आप स्वयं को अधिक बेहतर समझेंगे मानसिक राहत महसूस करेंगे।
12. आप जब सफर कर रहे हों तो साथ में पत्र-पत्रिकाएं या पाकेट ट्रांजिस्टर रखें ताकि इंतजार के क्षणों का भरपूर उपयोग हो सके अन्यथा उन क्षणों में आपका दिमाग उस व्यवस्था को दोष देगा जिसके कारण आपको असुविधा हो रही है। अब तो मोबाइल रखें- संगीत का आनन्द लें।
13. दूसरों की सहायता करें, चिन्ता केवल अपना ध्यान रखने वाले सवारी करती है। जब आप हर समय दूसरों की भलाई का ध्यान रखेंगे तब आपको चिंता करके अपने कष्टों को बड़ा समझने का समय ही नहीं मिलेगा।
14. जीवन में आशावादी दृष्टिकोण रखें। कठिनाइयों एवं बाधाओं का खिलाड़ी की तरह सामना करें। जीवन को खेल समझें और जीतने की आशा से खेलें।
15. ऐसा होता तो अच्छा होता, यह सोचना छोड़िये। सदैव अच्छे की आशा रखिये। निराशाएं और असफलताएं आपके लिये सीढ़ी बनकर आयी है। इन पर चढ़कर आप सफलता और सुख के प्रांगण में प्रवेश करेंगे।
16. अपना समय अकेले में न बिताइये ताकि मस्तिष्क एक ही ओर केंद्रित न रहे। संगीत आदि के कार्यक्रमों, संग्रहलयों एवं पुस्तकालयों में जायें, मन कभी कुछ न करने को भी कर रहा हो तो टहलें, नदी-तालाब के किनारे जायें एवं प्राकृतिक वातावरण का आनन्द लें।
17. दूसरों के कार्यों में व्यर्थ का हस्तक्षेप न करें, दूसरों को बोलते वक्त बीच में टोकना उचित नहीं है, अधिक बोलने की अपेक्षा अधिक सुनने की आदत डालें, उपयोगी, रूचिकर है इस बात पर ज्यादा ध्यान दें।
18. जब आप निरंतर मानसिक कार्य करते-करते थकान का अनुभव करने लगें तो तत्काल कोई शारीरिक कार्य करना शुरू कर दें। यदि आप नौकरी-पेशा वाले हैं तो सार्वजनिक अवकाश का भरपूर आनन्द लें। अवकाश के क्षणों का भरपूर उपयोग करें। अपने आत्मीय जनों मित्रों व पारिवारिकजनों को पत्र लिखिये।
19. तनाव से छुटकारा पाने का एक सरल उपाय है- व्यक्ति को जिद्दी व दुराग्रही नहीं होना चाहिये।
20. प्रार्थना करें, व्यक्ति को आध्यात्मिक भी होना चाहिये। प्रतिदिन सभी पारिवारिकजन एक साथ बैठकर प्रार्थना करें ईश्वर शक्ति के प्रति आस्था, प्रेम, विश्वास एवं कृतज्ञता का भाव सभी प्रकार के तनावों से मुक्ति दिलाता है। अमेरिका की विख्यात मेडिकल साइन्टिस्ट एवं साइकोलोजिस्ट डाक्टर जोन बारो सेन्को के अनुसार प्रतिदिन नियत समय पर प्रार्थना करने से तनाव पैदा करने वाले हार्मोन एड्रिनिअल के रिसाव में काफी कमी हो जाती है।
21. झपकी लें, तनाव मुक्ति के लिये झपकी लें। फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के साइकोलाजी प्रोफेसर विल्स वेब के अनुसार दिन में कुछ देर झपकी लें तो तनाव, दबाव एवं दुश्चिन्ता से मुक्त होकर तरो-ताजा महसूस करेंगे।
22. तनाव मुक्ति का एक सरल उपाय यह भी है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपना मित्र बनाये, वाणी में मैत्री तथा दिल में प्रेम एवं दिमाग में शांति प्रदान करता है।
रॉकफेलर के नुस्खे
अमेरिका के उद्योगपति रॉकफेलर महोदय ने अपनी लम्बी आयु और स्वास्थ्य के बारे में ये बातें बताई :-
1. मैं अपनी दिनचर्या में गड़बड़ी नहीं होने देता। प्रतिदिन नियत समय पर भोजन लेता हूं, नियत समय पर सो जाता हूं।
2. मैं जब भी शारीरिक एवं मानसिक कष्ट का अनुभव करता हूं, तत्काल इस कष्ट का कारण मालूम करके कारण को दूर कर देता हूं। ऐसा करने से मेरा कष्ट बढ़ नहीं पाता।
3. मैं न मांस खाता हूं और न शराब का सेवन करता हूं। अन्य नशीले पदार्थों का सेवन भी नहीं करता हूं इनको मैं हानिकारक मानता हूं।
4. भोजन का प्रत्येक ग्रास खूब चबाकर खाता हूं। खाने में कभी जल्दी नहीं करता अर्थात् भोजन बहुत धीरे-धीरे करता हूं।
5. मैं अपने को मानसिक, शारीरिक दृष्टि से थककर चूर नहीं होने देता।
6. अपनी प्रकृति पर मुझे पूरा अधिकार है। क्रोध, शोक, मानसिक अवस्था मुझ पर कभी अधिकार नहीं पा सकती।
7. मैं उन व्यक्तियों में से नहीं हूं जो इस संसार में दुख का सागर समझते हैं। इसके विपनरित संसार में अत्यन्त रूचि लेता हूं। प्रतिदिन मन बहलाव के लिये कुछ समय व्यतीत करता हूं।
इन सब बातों का यदि थोड़ा भी गंभीरता के साथ पालन किया जाये तो अनेक कष्टों एवं परेशानियों से मुक्ति मिल सकती है। तनाव अपने आप में अनेक बिमारियों और स्वास्थ्य समस्याएं पैदा करता है। हालांकि इससे पूर्ण मुक्त हो पाना शायद संभव न भी हो पाये, फिर भी यदि कुछ भी तनाव में कमी आती है तो इसमें लाभ स्पष्ट दिखायी देगा।

 

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