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किडनी की बीमारियों को समझें और रोकथाम करें

डा. संजय पंडया
(किडनी रोग विशेषज्ञ)
भारत में किडनी की बीमारियां तेजी से बढ़ रही है। इस विषय में जागरुकता बढ़ाने के लिये 10 मार्च 2011 को विश्व किडनी दिवस मनाया जा रहा है। विश्व किडनी दिवस के उपलक्ष्य में हम किडनी की बीमारियों को समझें एवं उनकी रोकथाम के लिये प्रयास करें।
ु.ज्ञळपवपशूळपहळपवळ.लो नामक हिन्दी की सर्वप्रथम वेबसाईट विश्व किडनी दिवस पर राष्ट्र को रोजकोट के किडनी रोग विशेषज्ञ डा.संजय पंड्या का बहुमूल्य उपहार है। किडनी रोगों के बारे में जानना क्यों महत्वपूर्ण है?
किडनी रोगों के बारे में आवश्यक तथ्य
) किडनी की बीमारियां एवं किडनी फेल्योर पूरे विश्व एवं भारत में खतरनाक तेजी से बढ़ रहा है। भारत में प्रत्येक 10 में से एक व्यक्ति को किसी रूप में क्रोनिक किडनी की बीमारी होने की संभावनाएं होती हैं।
) क्रोनिक किडनी की बीमारी किसी भी इलाज से पूर्ण ठीक नहीं हो सकती। अंतिम अवस्था में उपरोक्त बीमारियों का उपचर केवल डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण से ही संभव है।
) प्रतिवर्ष करीब 1,50,000 व्यक्ति किडनी फेल्योर को अंतिम अवस्था के साथ नये मरीज बनकर आ रहे हैं, जिन्हें या तो डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण की आवश्यकता होगी।
) चूंकि डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण महंगा उपचार है इसलिये सिर्फ 5-10 प्रतिशत मरीज ही किसी प्रकार से उपचार करवा पाते हैं एवं बाकी अन्य मरीज इलाज के अभाव में दम तोड़ देते हैं।
) हमारा देश सभी क्राोनिक किडनी की बीमारियों के मरीजों का उपचार करने में सक्षम नहीं है। इसका एकमात्र एवं सर्वोत्तम रास्ता किडनी की बीमारियों की रोकथाम ही है। कई मरीजों के लिये बीमारी का जल्द पता लग जाना, जीवन एवं मृत्यु के बीच के अंतर के बराबर हैं।
किडनी की भूमिका : किडनी हमारे शरीर में खून से विषैले पदार्थ एवं अनावश्यक पानी निकालकर उसे साफ सुथरा रखती है। किडनी हमारे शरीर में रक्तचाप नियंत्रण, सोडियम व पोटेशियम की मात्रा में नियंत्रण एवं रक्त की अम्लीयता में नियंत्रण का महत्वपूर्ण कार्य करती है।
किडनी की बीमारियों के चेतावनी देने वाले लक्षण :
) चेहरे पर सूजन आना, आंखों के चारों तरफ सूजन आना जो कि सुबह ज्यादा दिखाई देती है एवं पैरों में सूजन आना।
) भूख कम लगना, मितली आना, उल्टी होना, कमजोरी लगना, जल्दी थकान लगना एवं शरीर में रक्त की कमी होना।
) कम उम्र में उच्च रक्तचाप होना या अनियंत्रित उच्च रक्तचाप का होना।
) कमर में पसलियों के नीचे के हिस्से में दर्द होना। यदि आपको उपरोक्त समस्याओं में से एक भी हो तो डाक्टर से सलाह कर यह पता लगा लें कि यह समस्या किडनी की बीमारियों के कारण तो उत्पन्न नहीं हो रही है।
किडनी फेल्योर क्या है?
हमारे शरीर से रक्त में एकत्र हुई गंदगी को हटाने में एवं पानी एवं मिनरल्स के संतुलन को बनाने में किडनी की अक्षमता, किडनी फेल्योर कहलाती है। रक्त की जांच में यूरिया एवं क्रियेटिनीन नामक पदार्थों की बढ़ी हुई मात्रा किडनी फेल्योर दर्शाती है। धीमे-धीमे एवं स्थायी रूप से किडनी की कार्यक्षमता जो कई महीनों या वर्षों में घटती जाती है उसे ाोनिक किडनी फेल्योर कहा जाता है।
क्रोनिक किडनी फेल्योर की संभावनाएं कब आधिक होती है?
उन व्यक्तियों को जिन्हें किडनी की बीमारी होने का खतरा ज्यादा होता है, उन्हें समय-समय पर किडनी की जांच नियमित तौर पर करवाना चाहिये। किडनी की बीमारी होने का खतरा निम्नलिखित व्यक्तियों में ज्यादा रहता है।
) मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप क्रोनिक किडनी की बीमारियों के लिये सर्वाधिक जिम्मेदार होते हैं।
) धूम्रपान, मोटापा, 50 वर्ष से अधिक उम्र एवं दर्द निवारक दवाओं का अत्यधिक सेवन लंबे समय तक करना आदि।
क्रोनिक किडनी की बीमारियों का उपचार : यदि क्रोनिक किडनी फेल्योर का जल्द निदान कर उपचार कर दिया जाये तो संपूर्ण किडनी फेल होने की प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है, एवं उसके कारण होने वाले हृदय रोगों के होने के खतरे को भी टाला जा सकता है, जो पूरे विश्व में समय पूर्व मुख्य कारण है।
किडनी की संपूर्ण जानकारी के लिये सर्वप्रथम, राष्ट्रभाषा में वेबसाइट www.kindneyinhindi.com के बारे में तथ्य :
) हिन्दी भाषा में भारत एवं विश्व की किडनी की बीमारियों के बारे में प्रथम वेबसाइट।
किडनी की बीमारियों को कैसे रोका जाय?
किडनी की तरफ हमेशा ध्यान रखें एवं उनकी उपेक्षा न करें।
किडनी की स्वस्थ रखने के उपाय निम्नलिखित हैं।
1) हमेशा फिट एवं ऊर्जावान रहें : प्रतिदिन नियमित व्यायाम एवं शारीरिक गतिविधियां व्यक्ति के रक्तचाप व रक्त में शक्कर की मात्रा को नियंत्रित रखते हैं जिससे मधुमेह होने का खतरा एवं उससे क्रोनिक किडनी की बीमारी होने का खतरा कम हो जाता है।
2) डायबिटीज पर नियंत्रण : डायबिटीज किडनी की हत्या कर सकता है। यह किडनी का सबसे प्रमुख शत्रु है। इसलिये खून में शक्कर की मात्रा नियंत्रित रहना आवश्यक है।
3) उच्च रक्तचाप पर नियंत्रण : उच्च रक्तचाप को हमेशा उचित समय में नापकर नियंत्रित रखें क्योंकि यह क्रोनिक किडनी की बीमारियों के लिये दूसरे नंबर पर आने वाला शत्रु है।
4) अपने वजन को बढ़ने न दें : संतुलित आहार एवं नियमित व्यायाम से अपने वजन को नियंत्रित रखें। इससे डायबिटीज, हृदय रोग एवं अन्य बीमारियों की रोकथाम में मदद मिलेगी जो क्रोनिक किडनी फेल्योर उत्पन्न कर सकती है।
5) अपनी किडनी का चेकअप (जांच) नियमित करायें : जिन व्यक्तियों को किडनी की बीमारियों का खतरा होता है उन्हें किडनी की कार्यक्षमता की जांच प्राथमिकता से करवाना चाहिये। किडनी की बीमारियों का जल्द निदान अतिआवश्यक है जिससे उचित उपचार का समय मिल जाता है एवं किडनी के खराब होने का खतरा कम हो जाता है। कई बार किडनी की बीमारियों की जानकारी दूसरी सामान्य तकलीफों की जांच से भी जो जाती है।
6) तम्बाकू एवं धूम्रपान छोड़े : धूम्रपान एवं तम्बाकू का सेवन से एक विशेष बीमारी हो सकती है जिसे ऐथेरोस्कलेरोसिस कहते हैं जिससे रक्त नलिकाओं में रक्त का बहाव धीमा पड़ जाता है। किडनी में रक्त कम जाने से उसकी कार्यक्षमता घट जाती है।
7) डा.की सलाह के बैगर दवाओं की खरीद से बचें : दवा दुकान से दवाओं की खरीद एवं उनका स्वयं सेवन जिसमें डा. की सलाह न ली गयी हो कई बार किडनी के लिये खतरनाक हो सकता है।
सामान्य दवाएं जैसे नाम स्टेरराईट एंडी इन्फेलेमेटरी दवाएं (इब्यूप्रोफेन) आदि नियमित रूप से लेने पर वे किडनी को नुकसान पहुंचा कर पूर्णत: खराब भी कर सकती है। दर्द होने पर डा.की सलाह से ही उसका उपचार करायें एवं अपनी किडनी को खतरे में न डालें।

संपर्क : डा. संजय पंड्या (नेफोलाजिस्ट), किडनी रोग विशेषज्ञ, समर्पण हास्पिटल, भूतखाना चौक, लोघावाड पुलिस चौकी के पास, राजकोट-360002

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