Send gifts to your near and dear ones

Home » Education Express » 14 May 2011 »

डिस्टेंस एजुकेशन का जमाना

देखा जाए तो आज डिस्टेंस एजुकेशन काफी पॉपुलर हो रहा है। खास कर सूचना तकनीक ने डिस्टेंस एजुकेशन के पारंपरिक धारणा को बदलकर रख दिया है। वास्तव में, डिस्टेंस एजुकेशन समाज के लगभग सभी तबकों को लाभ पहुंचा रहा है। उन तबकों को, जो बड़े शहरों में आकर महंगे एजुकेशन अफॉर्ड नहीं कर सकते या फिर उनको भी, जो पहले से ही किसी प्रोफेशन में हैं। वे लोग भी इसका फायदा उठा सकते हैं, जो किसी कारणवश घर से बाहर निकल कर पढ़ाई नहीं कर सकते। डिस्टेंस एजुकेशन सेंटर्स की लोकप्रियता की बात करें, तो हायर एजुकेशन इंस्टीटयूट्स के प्रति पांच स्टूडेंट्स में से एक स्टूडेंट डिस्टेंस लर्निग सेंटर्स से जुड़े होते हैं।
हो रहा है लोकप्रिय
डिस्टेंस लर्निंग सेंटर्स का दायरा दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। इसकी लोकप्रियता का एक कारण यह भी है कि इसकी पहुंच न केवल आज छोटे-छोटे शहरों में है, बल्कि इस माध्यम से पढ़ाई करना भी काफी सस्ता होता है। अब तो इस माध्यम में तकनीकी साधनों का भी जमकर इस्तेमाल किया जाने लगा है। दरअसल, आज डिस्टेंस एजुकेशन कॉरेस्पॉन्डेंस मैटीरियल्स तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि स्टूडेंट्स अब टेलीकॉन्फ्रेंसिंग और मोबाइल के माध्यम से डिस्टेंस एजुकेशन का लाभ उठा रहे हैं।
अलग-अलग नाम
डिस्टेंस लर्निंग, कॉरेस्पॉन्डेंस, ओपन लर्निंग या पत्राचार में कोई फर्क नहीं है। डिस्टेंस लर्निंग नयी टर्मिनोलॉजी है। इसमें ऑनलाइन कॉन्टैक्ट करने और ऑडियो-वीडियो द्वारा स्टडी मैटीरियल भेजने की सुविधा होती है। किसी भी डिस्टेंस लर्निंग यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने से पहले इस बात की पुष्टि जरूर कर लेनी चाहिए कि वह यूनिवर्सिटी डिस्टेंस एजुकेशन कांउसिल से मान्यता प्राप्त हो। देश में करीब 14 ओपन और 100 से भी ज्यादा रेग्युलर यूनिवर्सिटीज हैं, जो पत्राचार या डिस्टेंस लर्निंग के माध्यम से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन करवाती हैं। पत्राचार या डिस्टेंस लर्निंग के माध्यम से बाहर के देशों से भी शिक्षा प्राप्त की जा सकती है।
डिस्टेंस एजुकेशन के फायदे
कॉरेस्पॉन्डेंस से शिक्षा प्राप्त करने के कई फायदे हैं। यह वर्तमान युग में शैक्षिक योग्यता बढ़ाने का एक आसान सा माध्यम है। कॉरेस्पॉन्डेंस के माध्यम से आप किसी जॉब को करते हुए या फिर पढ़ते हुए भी दो कोर्स एक साथ कर सकते हैं। आज कॉम्पिटिशन के युग में जब बेसिक क्वालिफिकेशन का अकेले कोई महत्व नहीं रह गया, आप रेग्युलर प्रोफेशनल कोर्स करते हुए डिस्टेंस माध्यम से बेसिक डिग्री कोर्स कर सकते हैं। यदि आप किसी ऐसे विषय में ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन करना चाहते हैं, जो दूसरे शहर में है और आप अपने घर में रहते हुए ही वह कोर्स करना चाहते हैं, तो पत्राचार से अच्छा कोई माध्यम नहीं है। बारहवीं में आपकी कंपार्टमेंट आई है या कम मार्क्स हैं, तो भी निराश होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि कंपार्टमेंट के साथ भी आप ग्रेजुएशन का फॉर्म पत्राचार के माध्यम से भर सकते हैं और कंपार्टमेंट का पेपर पास करने पर आप ग्रेजुएशन कर सकते हैं। ओपन यूनिवर्सिटी का फायदा यह है कि आप किसी भी उम्र में पढ़ाई दोबारा शुरू कर सकते हैं। आपको केवल एक प्रवेश परीक्षा देने की जरूरत है और उसके साथ आप स्कूल, ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन या किसी भी अन्य कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। अगर आप जॉब में हैं और तरक्की पाना चाहते हैं, तो आपके लिए कॉरेस्पॉन्डेंस या ओपन लर्निंग कोर्स वरदान से कम नहीं है। बेसिक डिग्री कोर्स के अलावा, अब एमबीए, एमसीए और बीएड जैसे कई प्रोफेशनल कोर्सेज भी कॉरेस्पॉन्डेंस के माध्यम से किए जा सकते हैं।
कैसे पाएं ओपन यूनिवर्सिटीज में एडमिशन
ओपन यूनिवर्सिटीज आपको कुछ ऐसे कोर्स भी उपलब्ध करवाती हैं, जिसमें बिना किसी पृष्ठभूमि के भी दाखिला लिया जा सकता है। किसी कॉरेस्पॉन्डेंस यूनिवर्सिटी या डिस्टेंस सेंटर में प्रोफेशनल कोर्स में एडमिशन पाने के लिए उनकी अनिवार्यताओं को पूरा करना पड़ता है, जैसे ग्रेजुएशन के लिए न्यूनतम आयु कम से कम 17 साल और पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए 20 साल होनी चाहिए और एडमिशन से पहले होने वाली प्रवेश परीक्षा पास करना भी जरूरी है।
एडमिशन से पहले जरूरी है जांच
ओपन यूनिवर्सिटीज से किए गए कोर्सेज को लेकर कुछ शंकाएं आम हैं, जैसे- क्या घर पर बैठकर की जाने वाली पढ़ाई की वैल्यू किसी भी रेग्युलर कॉलेज के समान होगी? पहले तो आपको अपने दिमाग से यह निकालना होगा कि आपको रेग्युलर कॉलेज में एडमिशन नहीं मिला, इसलिए आप कॉरेस्पॉन्डेंस कोर्स कर रहे हैं। करेस्पॉन्डेंस से पढ़ाई करते हुए मन में किसी तरह की भी हीन भावना न लाएं। किसी भी करेस्पॉन्डेंस कोर्स की मान्यता, रेग्युलर कोर्स के बराबर होती है, लेकिन फिर भी एडमिशन लेने से पहले यह जांच लें कि जहां से आप ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन करने की सोच रहे हैं, वह यूनिवर्सिटी डिस्टेंस एजुकेशन कांउसिल (ऊएउ), नेशनल असेसमेंट एेंड एक्रेडिटेशन कांउसिल और अगर टेक्निकल कोर्स है, तो उसे, ऑल इंडिया कांउसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन द्वारा मान्यता प्राप्त होनी चाहिए।
मदद के लिए किए गए हैं उपाय
पत्राचार से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को स्टडी मैटीरियल पोस्ट के माध्यम से उन्हीं के घर पर भेज दिया जाता है। परीक्षा देने के लिए विद्यार्थी अपने घर के सबसे करीबी सेंटर को चुन सकते हैं। इसी के साथ विद्यार्थियों की कोर्स संबंधी समस्याओं को सुलझाने के लिए वन-टु-वन कॉन्टैक्ट प्रोग्राम भी रखा जाता है, जिसमें उनकी परेशानियों को प्रशिक्षित अध्यापकों द्वारा हल किया जाता है।
किस तरह के कोर्स
आजकल स्टूडेंट्स बारहवीं करने के बाद डिस्टेंस एजुकेशन के माध्यम से बीबीए, बीकॉम, बीए इन साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स आदि में अधिक एडमिशन लेते हैं। इसके बाद उनका रुझान प्रोफेशनल या हायर लेवॅल के एकेडमिक कोर्सेज की ओर भी होता है, जैसे- पीजी डिप्लोमा, डिप्लोमा या एमफिल या पीएएचडी आदि। इस समय देश भर में लगभग 14 ओपन यूनिवर्सिटी मौजूद हैं। इसके अलावा, 54 से अधिक डिस्टेंस लर्निग सेंटर्स भी हैं। इन संस्थानों से आप न केवल डिग्री कोर्स जैसे-ग्रेजुएट, पीजी, एमफिल, पीएचडी, बल्कि प्रोफेशनल कोर्स (सर्टिफिकेट या डिप्लोमा) भी कर सकते हैं।

jharkhandjobs.com calling all to register and search jobs