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ईडी द्वारा 44 ठिकानों पर कार्रवाई, 14.5 करोड़ कैश सहित भारी मात्रा में गहने बरामद


रांचीः झारखंड की राजधानी रांची और कोलकाता ईडी जोनल ऑफिस के द्वारा की गई संयुक्त कार्रवाई के तहत झारखंड और पश्चिम बंगाल में 44 ठिकानों पर छापेमारी की गई. इस कार्रवाई की समग्र जानकारी ईडी के द्वारा प्रेस रिलीज जारी करके दी गयी है.

ईडी की टीम ने धनबाद में बड़े कोयला कारोबारी अनिल गोयल, बीसीसीएल के आटसोर्सिंग के संचालक लालबाबू सिंह और उनके भाई कुंभनाथ सिंह, संजय खेमका और दुमका में अमर मंडल के यहां छापेमारी की. जिसमें झारखंड और बंगाल से करोड़ो रुपये कैश के साथ साथ कई डिजिटल एविडेन्स और करोड़ों के गहने बरामद किए गए हैं.

ईडी ने प्रेस रिलीज जारी कर दी जानकारी

शुक्रवार को हुए झारखंड-बंगाल में बड़ी कार्रवाई को लेकर ईडी के तरफ से प्रेस रिलीज जारी कर पूरे मामले की जानकारी दी गई है. जारी रिलीज में बताया गया है कि प्रवर्तन निदेशालय ने पश्चिम बंगाल और झारखंड में मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम, 2002 की धारा 17 के तहत 44 ठिकानों पर 21 नवंबर को व्यापक और समन्वित तलाशी अभियान चलाया गया.

यह कार्रवाई अवैध कोयला खनन, परिवहन, भंडारण और बिक्री से संबंधित बड़ी मात्रा में अवैध कमाई के संबंध में की गई. तलाशी के दौरान लगभग 14.5 करोड़ रुपये की नकदी, साथ ही बड़ी मात्रा में सोना/चांदी और गहने बरामद किए गए. इस दौरान संपत्ति से संबंधित दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, बैंक खातों की जानकारी सहित कई सबूत मिले, जो इन अपराधों से संबंधित व्यक्तियों द्वारा नियंत्रित थे.

झारखंड में 20 ठिकाने धनबाद और दुमका में हैं, जो मुख्य रूप से लाल बहादुर सिंह, अनिल गोयल, संजय खेमका, अमर मोंडल और उनके सहयोगियों/सम्बंधित व्यक्तियों से जुड़े हैं. पश्चिम बंगाल में 24 ठिकाने दुर्गापुर, पुरुलिया, हावड़ा और कोलकाता में हैं. पश्चिम बंगाल में हुई तलाशी में कई रिहायशी परिसरों, कार्यालयों, अवैध नकद संग्रहण केंद्रों और कोयला संयंत्रों को शामिल किया गया. इन जगहों का संबंध संजय खेमका, अमर मोंडल, कृष्णा मुरारि कयाल, युधिष्ठिर बोस, राज किशोर यादव, लोकेश सिंह, चिनमय मंडल, निताद राणा मंडल से है.

प्रवर्तन निदेशालय के 100 से अधिक अधिकारी इन तलाशी में शामिल थे, जिनके साथ सीआरपीएफ भी थी. यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल और झारखंड पुलिस द्वारा दायर कई एफआईआर के आधार पर की गई थी, जिनमें मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल-झारखंड सीमा पर संचालित अवैध कोयला खनन के गिरोह के संबंध में जानकारी थी.