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पुलिस सुधार में बड़ा कदम: पिछले दशक की सभी सिफारिशों की होगी जवाबदेही, PMO रखेगा नजर


रांची: भारत में आयोजित पिछले दस वर्षों के डीजी-आईजी कॉन्फ्रेंस में की गई अनुशंसा को राज्यों की पुलिस ने कितना धरातल पर उतारा है, इसकी समीक्षा का निर्देश पीएम ने दिया है. निर्देश मिलने के बाद झारखंड पुलिस के द्वारा रिपोर्ट तैयार की जा रही है.

क्या है पूरा मामला

प्रधानमंत्री ने पिछले दस वर्षों में आयोजित डीजी-आईजी कॉन्फ्रेंस की अनुशंसाओं पर ठोस कार्रवाई का निर्देश दिया है, जिसके तहत अब हर राज्य और जिले के पुलिस अधिकारियों को इन अनुशंसाओं पर अब तक क्या-क्या कार्रवाई की है, इसकी रिपोर्ट पेश करनी होगी. दरअसल डीजी-आईजी कॉन्फ्रेंस में पुलिस अनुशंसा की जाती है. अनुशंसा पुलिस को बेहतर करने के लिए होती है ताकि आम लोगों को उसका फायदा मिल सके. लेकिन कई राज्य अभी भी कॉन्फ्रेंस की अनुशंसाओं पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं. यही वजह है कि गृह मंत्रालय के तहत पुलिस सुधार और अपराध नियंत्रण के लिए बनाई गई समितियों की अनुशंसाओं पर सख्त निगरानी रखने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है.

क्यों दिया गया समीक्षा का आदेश

समीक्षा के लिए जारी किए गए कॉन्फिडेंशियल पत्र में यह बताया गया है कि प्रधानमंत्री ने पाया कि कई बार डीजी, आईजी कॉन्फ्रेंस में दिए गए निर्देश जमीन पर पूरी तरह लागू नहीं हो पाते हैं. इन निर्देशों में महिला सुरक्षा, साइबर अपराध, इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम एवं अन्य कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दे रहे हैं. दूसरी तरफ मामले में गंभीरता दिखाते हुए झारखंड पुलिस मुख्यालय ने जिला स्तर पर पुलिस प्रशासन को इन अनुशंसाओं के क्रियान्वयन का स्पष्ट प्रगति रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है.

क्या हैं निर्देश

हर राज्य में पुलिस प्रमुखों को दस वर्ष की अनुशंसाओं पर समीक्षा रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया गया है. महिला सुरक्षा, साइबर अपराध, संगठित अपराध, उग्रवाद जैसे मामलों पर विशेष ध्यान. गृह मंत्रालय के भीतर बनी समिति इन रिपोर्ट्स की निगरानी करेगी और समय-समय पर पीएमओ को उपलब्ध कराएगी. इसमें मुख्य रूप से नाबालिग, महिलाओं और कमजोर वर्गों के प्रति अपराधों के लिए त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र स्थापित करने, महिला पुलिस कर्मियों को सक्रिय करने के लिए हर पुलिस स्टेशन पर एक निगरानी प्रणाली (डैशबोर्ड) विकसित करने और ग्राम स्तर पर सरपंचों सहित अन्य अधिकारियों का एक डाटा बैंक तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं. महिलाओं से जुड़े मामलों में स्पेशल ट्रैकिंग सिस्टम लाने का निर्देश हुआ है, ताकि तेजी से कार्रवाई और उचित न्याय मिले. महिला अपराध की रिपोर्टिंग, आरोपी पर फास्ट ट्रैक एक्शन और पीड़िता को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने जैसे कदम लिए जाएंगे.

पुलिस की जिम्मेदारियों की समीक्षा के लिए 44 अलग-अलग बिंदुओं पर रिपोर्टिंग जरूरी होगी.

पुलिसिंग में टेक्नोलॉजी का समुचित उपयोग और डेटा शेयरिंग सिस्टम लागू होगा. राज्यों में पुलिस ट्रेनिंग और उनके कार्यों की समीक्षा के लिए विशेष कमेटी बनाई जाएगी. इस समग्र पहल से कानून व्यवस्था को मजबूत करने, अपराध नियंत्रण और जनता की सुरक्षा हेतु पुलिस प्रशासन को अधिक उत्तरदायी और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है.

समीक्षा बेहद महत्वपूर्ण

पत्र में बताया गया है कि गृह मंत्रालय के निर्देश पर ये सिफारिशें न केवल पिछली 10 सम्मेलनों की गहन समीक्षा का परिणाम है, बल्कि प्रदेश के पुलिस सिस्टम में सुधार और सुरक्षा के नए मापदंड स्थापित करने का भी लक्ष्य है. इसमें वरिष्ठ अधिकारी और हर पुलिस स्टेशन तक अपराध की जानकारी तुरंत पहुंचने का प्रावधान है, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके. वहीं महिला अपराध मामलों को संभालने के लिए महिला पुलिस कर्मियों को सक्रिय रूप से तैनात किया जाएगा, जिससे पीड़ितों को बेहतर सुरक्षा और सहायता मिल सके.