छपरा: बिहार के सारण जिले में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है। तरैया प्रखंड के कई गांवों में नदी का पानी फैलने से खेत जलमग्न हो गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 100 एकड़ से अधिक क्षेत्र में लगी धान की फसल पानी में डूब गई है। गंडक के जलस्तर में लगातार वृद्धि के बाद चंचलिया, सगुनी, शामपुर, अर्देवा, जिमदाहा, बनिया हसनपुर, राजवारा, मोलनापुर, भटगाई, संग्रामपुर और रसीदपुर सहित आसपास के निचले इलाकों में पानी फैलने की सूचना है। कई खेतों में धान की फसल पूरी तरह पानी के भीतर चली गई है। किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि कई खेतों में धान की फसल पकने के करीब पहुंच चुकी थी। कुछ जगहों पर बालियां भी निकलने लगी थीं। ऐसे समय में लंबे समय तक खेतों में पानी जमा रहने से फसल को नुकसान बढ़ने की आशंका है। किसानों ने खेती में लगी लागत और संभावित उत्पादन प्रभावित होने को लेकर चिंता जताई है। स्थानीय जानकारी के अनुसार, लगातार बारिश के कारण पहले से ही कई खेतों में पानी जमा था। इसी बीच गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी का पानी भी निचले खेतों की ओर फैल गया। यानी कई इलाकों में बारिश और नदी, दोनों तरफ से पानी का दबाव देखने को मिल रहा है। पानी का प्रभाव केवल खेतों तक सीमित नहीं है। कुछ ग्रामीण संपर्क मार्गों पर भी पानी के बहाव की सूचना है, जिससे लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। नदी के किनारे बसे गांवों के लोग जलस्तर में होने वाले बदलाव पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। गंडक के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सारण के संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है। दरियापुर क्षेत्र में तटबंध के एक हिस्से में कटाव की सूचना के बाद मरम्मत कार्य कराया गया। जिले के विभिन्न संवेदनशील स्थानों पर 48 गृहरक्षकों की तैनाती भी की गई है, जिन्हें तटबंधों की निगरानी और किसी असामान्य स्थिति की तत्काल सूचना देने की जिम्मेदारी दी गई है। बाढ़ की स्थिति के व्यापक संदर्भ में 28 सितंबर को वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से अधिकतम 5,43,500 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद बिहार सरकार ने अधिकारियों को जलस्तर, बैराज से पानी की निकासी और तटबंधों की स्थिति पर लगातार नजर रखने का निर्देश दिया। पानी का फैलाव बढ़ने की स्थिति में ग्रामीणों के आवागमन के लिए नाव की व्यवस्था की मांग भी उठी है। किसानों और स्थानीय लोगों की चिंता अब दो स्तरों पर है—एक तरफ खेतों में खड़ी धान की फसल को बचाना और दूसरी तरफ निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना। गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर ने छपरा के तरैया समेत आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। 100 एकड़ से अधिक धान की फसल प्रभावित होने की सूचना के बाद किसानों को नुकसान की चिंता सताने लगी है। अब जलस्तर में आगे होने वाले बदलाव, तटबंधों की स्थिति और खेतों से पानी की निकासी पर प्रशासन तथा ग्रामीणों की नजर बनी हुई है।कई गांवों के निचले इलाकों में पहुंचा पानी
तैयार होने के समय फसल डूबी
बारिश के बाद बढ़ी मुश्किल
ग्रामीण सड़कों पर भी असर
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
गंडक बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया
किसानों ने राहत और नाव की मांग की
निष्कर्ष
छपरा में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ा, 100 एकड़ से अधिक धान की फसल प्रभावित


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