बिहार में सत्ता परिवर्तन के साथ सिस्टम री-इंजीनियरिंग की तैयारी,नौकरशाही में बड़े फेरबदल के संकेत
मुकेश कुमार/रांची एक्सप्रेस
पटना(बिहार ब्यूरो)।बिहार की सियासत में आए 'महाभूकंप' का असर अब राज्य की नौकरशाही पर भी दिखने लगा है।मुख्यमंत्री के इस्तीफे की खबरों और नई सरकार के गठन की सुगबुगाहट के बीच बिहार ब्यूरोक्रेसी में बड़े बदलाव की आहट तेज हो गई है।सूत्रों की मानें तो आगामी दिनों में न केवल पटना,बल्कि दिल्ली तक बिहार कैडर के आईएएस अधिकारियों का दबदबा और भूमिका बदलने वाली है।
•दिल्ली जा सकते हैं 'पावर सेंटर' माने जाने वाले अधिकारी•
इस संभावित फेरबदल में सबसे बड़ा नाम मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार का है।चर्चा है कि उन्हें केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।सूत्रों के अनुसार,उन्हें नीति आयोग में सदस्य बनाया जा सकता है।बता दें कि 1984 बैच के पूर्व मुख्य सचिव दीपक कुमार 2021 से संविदा पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के रूप में कार्य कर रहे हैं और उन्हें नीतीश सरकार का सबसे भरोसेमंद अधिकारी माना जाता रहा है।दीपक कुमार के अलावा,मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार और ओएसडी गोपाल सिंह को भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने की प्रबल संभावना है।इन अधिकारियों की रवानगी बिहार प्रशासन के मौजूदा ढांचे में एक बड़े शून्य को जन्म दे सकती है,जिसे भरने के लिए नई सरकार नए चेहरों पर दांव लगा सकती है।
•प्रशासनिक ढांचे की होगी 'ओवरहॉलिंग'•
जानकारों का मानना है कि यह महज रूटीन ट्रांसफर-पोस्टिंग नहीं, बल्कि एक 'सिस्टम री-इंजीनियरिंग' है।नई सरकार के गठन के साथ ही मुख्य सचिव और डीजीपी स्तर से लेकर जिलाधिकारियों तक की सूची नए सिरे से तैयार की जा रही है।अनुभवी और युवा अधिकारियों का एक नया मिश्रण तैयार किया जाएगा ताकि शासन की नई प्राथमिकताओं को गति दी जा सके।कई महत्वपूर्ण विभागों के सचिवों को बदला जा सकता है जो लंबे समय से एक ही पद पर तैनात थे।
•पोस्टर वार और सियासी हलचल•
एक तरफ जहां सचिवालय में फाइलों की आवाजाही और अधिकारियों की धड़कनें तेज हैं,वहीं दूसरी तरफ पटना की सड़कों पर 'पोस्टर वार' शुरू हो गया है।नए नेतृत्व और निशांत के समर्थन में लगे पोस्टरों ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष की पटना मौजूदगी ने इन अटकलों को और हवा दे दी है कि बिहार की कमान अब पूरी तरह नए हाथों में जाने वाली है।
बिहार में सत्ता का समीकरण बदलने के साथ ही प्रशासनिक संतुलन भी पूरी तरह बदलने वाला है। आने वाले 24 से 48 घंटे राज्य की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी,दोनों के लिए निर्णायक साबित होंगे।





