नई दिल्ली। भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और सौर उपकरणों के घरेलू निर्माण को मिल रही गति के बीच सोलर कंपोनेंट उद्योग के लिए मजबूत संभावनाएं उभर रही हैं। अनुमान है कि देश का सोलर मॉड्यूल कंपोनेंट बाजार वित्त वर्ष 2027-28 तक 7.8 अरब डॉलर से अधिक का हो सकता है। इससे भारत के स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। देश में सौर ऊर्जा परियोजनाओं की संख्या बढ़ने के साथ सोलर मॉड्यूल और उनसे जुड़े उपकरणों की मांग में भी इजाफा हो रहा है। सरकार की घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों और निवेश गतिविधियों से स्थानीय कंपनियों को उत्पादन क्षमता बढ़ाने का अवसर मिल रहा है। सौर ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण में मॉड्यूल के अलावा कई महत्वपूर्ण कलपुर्जों की जरूरत होती है। इनमें सोलर सेल, ग्लास, बैकशीट, फ्रेम और अन्य तकनीकी घटक शामिल हैं। इन उत्पादों की घरेलू मांग बढ़ने से संबंधित विनिर्माण उद्योगों के विस्तार की संभावना मजबूत हुई है। बाजार के 7.8 अरब डॉलर से आगे पहुंचने का अनुमान घरेलू और विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर पैदा कर सकता है। नई उत्पादन इकाइयों की स्थापना से तकनीकी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ने और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला विकसित होने की उम्मीद है। सोलर उपकरणों का घरेलू उत्पादन बढ़ने से भारत को विदेशी बाजारों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, स्थानीय स्तर पर उत्पादन क्षमता मजबूत होने से सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवश्यक सामग्री की उपलब्धता बेहतर हो सकती है। भारत में स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती जरूरत को देखते हुए सोलर कंपोनेंट उद्योग आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि, बाजार की वास्तविक वृद्धि उत्पादन क्षमता, निवेश, तकनीकी विकास और सौर ऊर्जा परियोजनाओं की मांग पर निर्भर करेगी।घरेलू विनिर्माण से बढ़ेगा बाजार
सोलर कंपोनेंट की मांग में तेजी
निवेश और रोजगार के नए अवसर
आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में कदम
भारत के सोलर कंपोनेंट बाजार में बड़ी छलांग की उम्मीद, 2027-28 तक 7.8 अरब डॉलर के पार पहुंच सकता है कारोबार


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