मुंबई: Tata Group की होल्डिंग कंपनी Tata Sons को लेकर एक बड़ा कॉरपोरेट पुनर्गठन प्रस्ताव सामने आया है। Tata Trusts ने Tata Sons के साथ Tata Electronics Systems Solutions Private Limited (TESS) और Tata Consulting Engineers (TCE) के विलय का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव का प्रमुख उद्देश्य Tata Sons की कारोबारी संरचना में बदलाव करना और उसे भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के NBFC और Core Investment Company (CIC) से जुड़े नियामकीय दायरे से बाहर लाने की कोशिश करना है। Tata Trusts, जो Tata Sons में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं, ने यह योजना Tata Sons के बोर्ड के समक्ष रखी है। Trusts ने बोर्ड से प्रस्ताव पर विचार करने और आगे की नियामकीय प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया है। इसके तहत RBI से आवश्यक No-Objection Certificate यानी NOC लेने की प्रक्रिया भी प्रस्तावित है। प्रस्ताव के तहत TESS और TCE को Tata Sons में मिलाया जाना है। TESS, Tata Electronics से जुड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनी है, जबकि TCE इंजीनियरिंग और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट से संबंधित कारोबार करती है। इन दोनों कंपनियों को Tata Sons के भीतर लाने से होल्डिंग कंपनी की आय और संपत्तियों में ऑपरेटिंग बिजनेस का हिस्सा बढ़ जाएगा। Tata Sons की मौजूदा नियामकीय स्थिति इस पूरे मामले का प्रमुख कारण है। RBI के upper-layer NBFC/CIC नियमों के तहत आने वाली संस्थाओं पर कुछ अतिरिक्त नियामकीय आवश्यकताएं लागू होती हैं, जिनमें लिस्टिंग से जुड़ी शर्त भी शामिल है। Tata Sons की ओर से इस नियामकीय स्थिति से बाहर निकलने का प्रयास पहले भी किया गया था, लेकिन सितंबर 2026 में RBI ने कंपनी के CIC deregistration अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। Tata Trusts का तर्क है कि अगर ऑपरेटिंग कंपनियों को Tata Sons में शामिल किया जाता है तो संयुक्त इकाई की आय का बड़ा हिस्सा वास्तविक कारोबारी गतिविधियों से आएगा। Trusts के अनुसार, 31 मार्च 2026 के आधार पर प्रस्तावित संयुक्त इकाई का ऑपरेटिंग रेवेन्यू करीब ₹1,05,043 करोड़ हो सकता है, जबकि वित्तीय परिसंपत्तियों से आय करीब ₹40,072 करोड़ बताई गई है। Trusts का कहना है कि इस संरचना में कंपनी NBFC के principal business criteria और CIC की कुछ प्रमुख शर्तों के दायरे में नहीं आएगी। Tata Trusts का कहना है कि यह मॉडल पूरी तरह नया नहीं है। उनके मुताबिक Tata Sons ने अपने इतिहास के लंबे हिस्से में होल्डिंग कंपनी की भूमिका के साथ-साथ सीधे ऑपरेटिंग कारोबार भी चलाए हैं। उदाहरण के तौर पर Tata Consultancy Services (TCS) वर्ष 2004 तक Tata Sons के भीतर एक बिजनेस डिवीजन के रूप में काम करती थी, जिसके बाद इसे अलग इकाई बनाया गया था। इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद Tata Sons के संभावित शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। हालिया घटनाक्रम में Tata Sons बोर्ड ने RBI के नियामकीय ढांचे के अनुरूप आगे बढ़ने की दिशा में कदम उठाया था। वहीं Tata Trusts की नई योजना Tata Sons को दोबारा एक ऐसी संरचना में लाने का प्रयास है, जिसके तहत Trusts के अनुसार कंपनी को अनिवार्य लिस्टिंग की स्थिति से बाहर रखने का आधार बन सकता है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि फिलहाल यह प्रस्तावित पुनर्गठन है, पूरा हो चुका विलय नहीं। इसे लागू करने के लिए Tata Sons बोर्ड की प्रक्रिया और RBI की आवश्यक मंजूरी अहम होगी। Tata Trusts ने भी स्पष्ट रूप से RBI से आवश्यक NOC लेने की बात कही है। इसलिए आगे की नियामकीय मंजूरियों के बाद ही पता चलेगा कि प्रस्तावित ढांचा किस रूप में लागू होता है। Tata Sons Tata Group की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है और समूह की कई बड़ी कंपनियों में इसकी हिस्सेदारी है। ऐसे में इसकी नियामकीय स्थिति में बदलाव का असर केवल एक कंपनी की संरचना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समूह के भविष्य के कॉरपोरेट ढांचे और पूंजी व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। फिलहाल प्रस्ताव का अगला महत्वपूर्ण चरण Tata Sons बोर्ड और RBI की प्रक्रिया होगी। Tata Trusts का यह प्रस्ताव Tata Sons की कारोबारी और नियामकीय संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव की कोशिश है। TESS और TCE के विलय के जरिए Tata Sons में ऑपरेटिंग कारोबार का हिस्सा बढ़ाने की योजना है, ताकि Trusts के अनुसार कंपनी NBFC या CIC की मौजूदा परिभाषाओं के दायरे से बाहर आ सके। हालांकि, विलय और नियामकीय स्थिति में बदलाव अभी प्रस्ताव के स्तर पर हैं और अंतिम तस्वीर बोर्ड तथा RBI की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगी।Tata Trusts ने बोर्ड के सामने रखा प्रस्ताव
दो ऑपरेटिंग कंपनियों का होगा विलय
RBI के नियम क्यों महत्वपूर्ण हैं?
विलय से क्या बदल सकता है?
Tata Sons की पुरानी संरचना से जुड़ा है प्रस्ताव
लिस्टिंग का मुद्दा फिर केंद्र में
अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है
Tata Group के लिए क्यों अहम है यह मामला?
निष्कर्ष
Tata Sons में बड़े पुनर्गठन की तैयारी, दो कंपनियों के विलय का प्रस्ताव


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