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निजी कंपनियों के निवेश को मिल सकती है रफ्तार, FY27 में Capex ₹3.2 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान


नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र के निवेश को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सितंबर बुलेटिन में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में निजी कॉरपोरेट क्षेत्र का पूंजीगत खर्च यानी Capital Expenditure (Capex) करीब ₹3.2 लाख करोड़ रहने का अनुमान है। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष के लगभग ₹2.6 लाख करोड़ के मुकाबले अधिक है।

FY26 में परियोजनाओं की लागत रिकॉर्ड स्तर पर

RBI की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा मंजूर परियोजनाओं की कुल लागत ₹4.4 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। FY25 में यह आंकड़ा करीब ₹3.7 लाख करोड़ था।

इस बढ़ोतरी को निजी कंपनियों की निवेश योजनाओं और नई क्षमता तैयार करने की गतिविधियों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, परियोजना की मंजूरी और वास्तविक पूंजी निवेश के बीच अंतर हो सकता है।

बुनियादी ढांचा क्षेत्र सबसे आगे

निजी निवेश में Infrastructure सेक्टर की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही। FY26 में कुल परियोजना लागत में बुनियादी ढांचे का हिस्सा 54.2 प्रतिशत रहा। इस क्षेत्र में बिजली (Power) परियोजनाओं का योगदान प्रमुख रहा, जबकि Roads & Bridges भी महत्वपूर्ण क्षेत्र रहे।

इसके अलावा निर्माण, केमिकल्स एवं पेस्टिसाइड्स, मेटल और मेटल प्रोडक्ट्स तथा सीमेंट जैसे क्षेत्रों में भी परियोजनाओं की अच्छी हिस्सेदारी दर्ज की गई।

Greenfield प्रोजेक्ट्स का बड़ा हिस्सा

RBI से जुड़े अध्ययन में यह भी सामने आया कि FY26 में बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा रिपोर्ट की गई परियोजनाओं की कुल लागत में Greenfield Projects यानी नई परियोजनाओं का हिस्सा करीब 89.2 प्रतिशत था।

इससे संकेत मिलता है कि कंपनियां केवल मौजूदा इकाइयों के विस्तार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नई उत्पादन क्षमता और नई परियोजनाओं पर भी निवेश की योजनाएं बना रही हैं।

बैंकों से मिले बड़े प्रोजेक्ट्स को समर्थन

FY26 के दौरान बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने 12 Mega Projects और 100 Large Projects को मंजूरी दी। इन बड़े प्रोजेक्ट्स का कुल परियोजना लागत में उल्लेखनीय योगदान रहा।

रिपोर्ट के अनुसार, Mega Projects की हिस्सेदारी कुल परियोजना लागत में 17 प्रतिशत और Large Projects की हिस्सेदारी 51.3 प्रतिशत रही।

निवेश के लिए कई वित्तीय रास्ते

निजी कंपनियां केवल घरेलू बैंकिंग व्यवस्था पर निर्भर नहीं हैं। रिपोर्ट में External Commercial Borrowings (ECBs), Foreign Direct Investment (FDI) और Private Placements जैसे वैकल्पिक वित्तीय माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल का भी उल्लेख किया गया है।

FY26 में 509 निजी गैर-वित्तीय कंपनियों ने ECB के जरिए करीब ₹1 लाख करोड़ जुटाए। इससे कंपनियों के लिए बड़े निवेश को वित्तपोषित करने के विकल्पों का दायरा बढ़ा है।

कंपनियों की वित्तीय स्थिति में सुधार

RBI बुलेटिन में शामिल अध्ययन के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में भारतीय कंपनियों की बैलेंस शीट में सुधार हुआ है। कंपनियों द्वारा कर्ज कम करने (Deleveraging) और आंतरिक संसाधनों से धन जुटाने की क्षमता बढ़ने से निवेश गतिविधियों को समर्थन मिला है।

वहीं घरेलू बैंकिंग प्रणाली में पूंजी और तरलता की स्थिति तथा बैंक ऋण की वृद्धि भी निजी निवेश के लिए महत्वपूर्ण आधार बनी हुई है।

लेकिन वैश्विक अनिश्चितता बनी चुनौती

निवेश योजनाओं में तेजी के बावजूद वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां एक जोखिम बनी हुई हैं। RBI से जुड़े अध्ययन में कहा गया है कि निवेश का वास्तविक स्तर इस बात पर निर्भर करेगा कि स्वीकृत परियोजनाएं कितनी तेजी से लागू होती हैं और वैश्विक परिस्थितियां किस दिशा में जाती हैं।

यानी परियोजनाओं की घोषणा या मंजूरी को सीधे-सीधे उतने ही वास्तविक खर्च के बराबर नहीं माना जा सकता। जमीन पर निवेश की गति परियोजना क्रियान्वयन, वित्तपोषण और कारोबारी माहौल पर निर्भर करेगी।

राज्यों में निवेश का रुझान

FY26 में महाराष्ट्र निजी Capex परियोजनाओं को आकर्षित करने वाले प्रमुख राज्यों में रहा। इसके बाद गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु का स्थान रहा। इन छह राज्यों की संयुक्त हिस्सेदारी कुल परियोजना लागत में 67.1 प्रतिशत बताई गई है।

निष्कर्ष

RBI के सितंबर बुलेटिन में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, FY27 में निजी क्षेत्र का अनुमानित Capex करीब ₹3.2 लाख करोड़ हो सकता है। FY26 में परियोजनाओं की कुल स्वीकृत लागत ₹4.4 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची। Infrastructure और Power जैसे क्षेत्रों में निवेश की मजबूत हिस्सेदारी रही है। हालांकि, वास्तविक पूंजी निर्माण की गति परियोजनाओं के समय पर पूरा होने और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।