BREAKING NEWS

logo

Advertisement
Advertisement

रुपया 20 पैसे कमजोर होकर 95.95 प्रति डॉलर पर पहुंचा, कच्चे तेल और विदेशी निकासी का दबाव


मुंबई। भारतीय मुद्रा पर सोमवार, 28 सितंबर को शुरुआती कारोबार में दबाव देखने को मिला। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 20 पैसे कमजोर होकर 95.95 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया। बाजार में इस कमजोरी के पीछे मजबूत अमेरिकी डॉलर, महंगे कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी को प्रमुख कारकों में बताया गया।

कारोबार की शुरुआत से ही दबाव

इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया करीब 95.89 प्रति डॉलर पर खुला। इसके बाद घरेलू मुद्रा और कमजोर हुई और 95.95 के स्तर तक पहुंच गई। इससे पहले शुक्रवार को रुपया 24 पैसे मजबूत होकर 95.75 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

डॉलर में मजबूती का असर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी मुद्रा की मजबूती ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया। सोमवार के शुरुआती कारोबार में Dollar Index 101.11 पर था, जो पिछले स्तर से करीब 0.15 प्रतिशत ऊपर था।

जब वैश्विक स्तर पर डॉलर मजबूत होता है, तो उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ सकता है। भारतीय बाजार में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिली।

कच्चा तेल 106 डॉलर के पार

रुपये के लिए दूसरी बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही। शुरुआती कारोबार में Brent crude futures करीब 2.31 प्रतिशत बढ़कर 106.81 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।

भारत कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमत बढ़ने पर आयात के लिए डॉलर की मांग बढ़ सकती है, जिससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

West Asia तनाव भी बना कारक

West Asia में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है। बाजार विश्लेषकों ने इसी माहौल को डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की तेजी से जोड़ते हुए रुपये पर दबाव का एक कारण बताया है।

विदेशी निवेशकों की निकासी

घरेलू शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली भी रुपये के लिए चुनौती बनी हुई है। उपलब्ध एक्सचेंज आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने शुक्रवार को भारतीय शेयरों में ₹3,693.93 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की थी।

शेयर बाजार से विदेशी पूंजी निकलने पर डॉलर की मांग बढ़ सकती है, जिसका असर रुपये की विनिमय दर पर पड़ सकता है।

विदेशी मुद्रा भंडार में भी कमी

RBI के आंकड़ों के मुताबिक, 18 सितंबर को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 14.881 अरब डॉलर घटकर 765.901 अरब डॉलर रह गया। इसमें विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (Foreign Currency Assets) में गिरावट प्रमुख वजह रही।

आगे बाजार की नजर किन संकेतों पर?

आने वाले कारोबारी सत्रों में रुपये की दिशा पर कच्चे तेल की कीमत, डॉलर की वैश्विक स्थिति, West Asia से जुड़ी खबरें और विदेशी निवेशकों के फंड फ्लो का असर देखा जा सकता है। इन कारकों में बदलाव से मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

निष्कर्ष

28 सितंबर के शुरुआती कारोबार में रुपया 20 पैसे कमजोर होकर 95.95 प्रति डॉलर तक पहुंचा। महंगा Brent crude, मजबूत अमेरिकी डॉलर और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने घरेलू मुद्रा पर दबाव बढ़ाया। हालांकि, यह शुरुआती कारोबार का स्तर है और पूरे कारोबारी सत्र में विनिमय दर में बदलाव संभव है।