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शेयर बाजार में भारी गिरावट, Sensex 1,124 अंक टूटा; Nifty भी दबाव में


मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 28 सितंबर को जोरदार बिकवाली देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और ऊंची बॉन्ड यील्ड के बीच निवेशकों में सतर्कता बढ़ी। इसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखाई दिया।

Sensex में 1,124 अंक की गिरावट

कारोबार के अंत में BSE Sensex 1,124.02 अंक यानी 1.52 प्रतिशत गिरकर 72,771.72 पर बंद हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, यह 30 मार्च 2026 के बाद Sensex का सबसे निचला क्लोजिंग स्तर रहा।

Nifty भी 22,800 के नीचे

NSE का Nifty 50 भी भारी दबाव में रहा। इंडेक्स 360.25 अंक यानी 1.56 प्रतिशत फिसलकर 22,780.25 पर बंद हुआ। बाजार में गिरावट केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली दर्ज की गई।

कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

बाजार में दबाव का एक प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही। Brent crude कारोबार के दौरान करीब 107–108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए महंगा तेल आयात लागत और महंगाई को लेकर बाजार की चिंता बढ़ा सकता है।

बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का असर

भारतीय बॉन्ड बाजार में भी दबाव देखने को मिला। 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड करीब 7.1848 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो अप्रैल 2024 के बाद का ऊंचा स्तर बताया गया। अमेरिका की 10-वर्षीय Treasury yield भी करीब 5.22 प्रतिशत के आसपास रही। ऊंची यील्ड वैश्विक निवेशकों के लिए बॉन्ड को अपेक्षाकृत आकर्षक बना सकती है और इक्विटी बाजारों पर दबाव डाल सकती है।

कई सेक्टरों में एक साथ बिकवाली

बाजार की कमजोरी व्यापक रही। Nifty PSU Bank इंडेक्स में 3.2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। Realty, Oil & Gas, Metal और Auto जैसे सेक्टरों में भी उल्लेखनीय कमजोरी रही। वित्तीय और बैंकिंग शेयरों में भी बिकवाली का दबाव दिखाई दिया।

विदेशी निवेश और भू-राजनीतिक तनाव

बाजार की धारणा पर विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का भी असर पड़ा। अमेरिका-ईरान के बीच तनाव तथा Strait of Hormuz को लेकर अनिश्चितता ने तेल की आपूर्ति पर चिंताएं बढ़ाईं। ऐसे माहौल में निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स में अपनी स्थिति कम की।

रुपये और महंगाई की चिंता

कच्चे तेल की महंगी कीमतों का असर रुपये और भारत के आयात बिल पर भी पड़ सकता है। सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले करीब ₹95.98 तक कमजोर हुआ। महंगा तेल यदि लंबे समय तक बना रहता है तो इससे महंगाई, व्यापार घाटे और कंपनियों की लागत पर दबाव पड़ने की आशंका बाजार में चर्चा का विषय रही।

निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों पर

आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमत, अमेरिका और ईरान से जुड़े घटनाक्रम, वैश्विक बॉन्ड यील्ड, रुपये की चाल और विदेशी पूंजी के प्रवाह पर रहेगी। इन संकेतकों में बदलाव से बाजार की दिशा और उतार-चढ़ाव प्रभावित हो सकते हैं।

निष्कर्ष

सोमवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी कमजोर रहा। Sensex 1,124.02 अंक और Nifty 360.25 अंक गिरकर बंद हुए। महंगा कच्चा तेल, ऊंची बॉन्ड यील्ड, कमजोर रुपया और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने बाजार पर दबाव बढ़ाया। फिलहाल बाजार की गतिविधियां घरेलू संकेतकों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों से भी प्रभावित हो रही हैं।