जेएससीए अध्यक्ष, सचिव का इंस्ट्रक्शन मेंबर को टिकट चाहिए तो काउंटर से लें टिकट
सुबह सात बजे से ही मिलेगा टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट मैच का काउंटर से टिकट
जेएससीए के सदस्य भी वर्तमान मैनेजिंग कमेटी के खिलाप नाराजगी बढ़ी, महासचिव सौरभ तिवारी और उपाध्यक्ष संजय पांडेय से सभी खफा
विशेष संवाददाता
रांची : झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (जेएससीए) में नौ अक्तूबर को भारत और वेस्ट इंडीज की टीम के बीच टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेला जायेगा। 40 हजार से अधिक क्षमता वाले स्टेडियम में मैच को लेकर आज सुबह से टिकटों की बिक्री शुरू की गयी। जिला प्रशासन की तरफ से स्पष्ट आदेश दिया गया है कि रात से काउंटरों के समक्ष लाइन लगनेवाले सभी लोगों को हटाया जाये। सोमवार को पुलिस अधिकारियों की टीम ने मैदान का मुआयना किया और टिकटों की बिक्री का जायगा लिया। टिकटों की बिक्री को लेकर अजय नाथ शाहदेव एंड टीम के मैनेजमेंट की काफी आलोचना भी हो रही है। जेएससीए के आजीवन सदस्य, सदस्य और अन्य इस बात से नाराज हैं कि उन्हें अंदर से टिकट लेने की सुविधा नहीं दी गयी है। अध्यक्ष अजय नाथ शाहदेव, सचिव सौरभ तिवारी और उपाध्यक्ष संजय पांडेय का इंस्ट्रक्शन है कि यदि किसी को भी टिकट चाहिए, तो वे काउंटर से टिकट लें, या फिर ऑनलाइन बुकिंग करें। इससे जेएससीए प्रबंधन के खिलाफ अंदरखाने काफी विवाद चल रहा है।
बताते चलें कि इस मैच को लेकर जेएससीए मैनेजमेंट ने स्टेडियम की कुल क्षमता का 10 फीसदी पास बांटने का फैसला लिया है। प्रबंधन का दावा है कि 90 फीसदी टिकटों की बिक्री काउंटरों से की जायेगी। जेएससीए के सदस्य, आजीवन सदस्य भी प्रबंधन के उस फैसले से नाराज हैं, जिसमें उनसे कहा गया है कि उन्हें जरूरत के हिसाब से पास दिया जायेगा। सदस्यों की ओर से टिकट की खरीद की जानकारी भी स्पष्ट नहीं की गयी है। सदस्यों में नाराजगी उपाध्यक्ष सह कांग्रेस नेता संजय पांडेय और महासचिव सह पूर्व क्रिकेटर सौरभ तिवारी से अधिक है।
टिकटों की गणित को समझने की जरूरत
जेएससीए में होनेवाले मैच को लेकर टिकटों की गणित को समझना जरूरी है। जेएससीए आजीवन सदस्यों, जिला संघों, स्कूलों, क्लबों और संस्थाओं के मेल से बना संगठन है। इनकी संख्या 705 है। पूर्व में इन्हें दो-दो पास दिये जाते थे, जिनके हिसाब से 1410 पास देना जेएससीए को जरूरी है। आजीवन सदस्यों को पांच-पांच टिकट दिया जाता है। जिला संघों को एक-एक सौ टिकट दिया जाता है, जिसकी कुल संख्या 23 सौ होती है। आजीवन सदस्यों के बीच 31 सौ टिकट दिये जाते हैं। क्लब, स्कूल, संस्था को 25-25 टिकट दिया जाता है, जो 16 सौ होता है। इस तरह 11 हजार से अधिक टिकट इन्हें दिये जाते हैं। जेएससीए प्रबंधन का यह कहना कि हम 90 फीसदी टिकट बेचेंगे, यह समझ से परे है।






