झारखंड वन विभाग में बड़ा घोटाले का आरोप, ₹10 करोड़ से अधिक की अनियमितता पर उच्चस्तरीय जांच की मांग
रांची में वन विभाग से जुड़ा एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आने का दावा किया गया है। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल से मुलाकात कर रांची वन मंडल के तत्कालीन डीएफओ राजीव लोचन बख्शी (IFS) के कार्यकाल की उच्चस्तरीय जांच और फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की है। मरांडी ने महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर करोड़ों रुपये की अनियमितताओं, प्रशासनिक कदाचार और राजकोष की क्षति का आरोप लगाया है।
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, मस्टर रोल में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। 95 मस्टर रोल की जांच में ₹1.03 करोड़ से अधिक के संदिग्ध भुगतान का खुलासा हुआ है। कई मस्टर रोल में मजदूरों के हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान नहीं पाए गए, वहीं रिकॉर्ड में व्हाइटनर और इरेजर से छेड़छाड़ के संकेत मिले हैं। नियमों के विपरीत मजदूरों को नकद भुगतान दिखाया गया, जबकि भुगतान बैंक खातों के माध्यम से होना चाहिए था।
इसके अलावा, वन भूमि के अपयोजन में भी अनियमितता का आरोप है। ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत 7.35 हेक्टेयर वन भूमि को नियमों के विरुद्ध खंडों में बांटकर डीएफओ स्तर पर ही स्वीकृति दी गई, जिससे सरकार को लगभग ₹46 लाख के राजस्व नुकसान की बात कही गई है।
CAMPA फंड के उपयोग में भी गड़बड़ी सामने आई है। करीब ₹8.53 करोड़ की अग्रिम राशि का लेखा-जोखा स्पष्ट नहीं है, जबकि ₹1.80 करोड़ की सामग्री खरीद के वाउचर भी ऑडिट टीम को नहीं दिए गए। इससे जुड़े ₹5.45 करोड़ की मजदूरी भुगतान को भी संदिग्ध बताया गया है।





