जिला पूर्वी सिंहभूम
जिला अध्यक्ष श्री एस. एन. पाल की ओर से
पिछले दिनों बिष्टुपुर में एक अत्यंत हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसमें चाय दुकान चलाने वाली एक युवती मेहंदी पर कुछ मनचले दबंगों द्वारा खौलती चाय फेंक दी गई। इस अमानवीय कृत्य के कारण युवती गंभीर रूप से झुलस गई, जिसके बाद उसे तत्काल इलाज हेतु टीएमएच अस्पताल में भर्ती कराया गया।
ज्ञातव्य है कि पूरे बिहार एवं झारखंड क्षेत्र में बर्न्स यूनिट की समुचित सुविधा सीमित होने के कारण पीड़िता को बेहतर उपचार के लिए टीएमएच में भर्ती कराना आवश्यक था।
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 118(2), 109, 352, 351(2), 74, 3(5) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही, कानून स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करता है कि ज्वलनशील पदार्थ से हमला (Acid/Hot Liquid Attack) के मामलों में पीड़ित का इलाज निःशुल्क किया जाना अनिवार्य है।
विशेष रूप से:
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 397
दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 357C
के तहत यह स्पष्ट है कि ऐसे मामलों में सरकारी एवं निजी दोनों अस्पतालों द्वारा पीड़िता को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
इसके बावजूद यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि टीएमएच प्रबंधन द्वारा पीड़िता के परिजनों से इलाज का खर्च मांगा जा रहा है और बिल थमाया जा रहा है।
अतः मैं, जिला प्रशासन एवं संबंधित शासकीय/प्रशासनिक अधिकारियों से यह जानना चाहता हूं कि—
क्या एक निजी अस्पताल कानून से ऊपर है?
क्या कानूनी प्रावधानों की अवहेलना की जा सकती है?
पीड़िता को मुफ्त इलाज दिलाने के लिए प्रशासन क्या कदम उठा रहा है?
साथ ही, यह भी खेदजनक है कि विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता अस्पताल पहुंचकर केवल आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन इलाज के खर्च को माफ करवाने के विषय में कोई ठोस पहल नहीं कर रहे हैं।
हमारी मांगें:
पीड़िता का सम्पूर्ण इलाज तत्काल प्रभाव से निःशुल्क कराया जाए।
अस्पताल प्रबंधन पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए यदि वे नियमों का पालन नहीं करते हैं।
पीड़िता को उचित मुआवजा एवं सरकारी सहायता प्रदान की जाए।
दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और पीड़िता को न्याय दिलाने हेतु हर संभव प्रयास करेगा।
निवेदक:
श्री एस. एन. पाल
जिला अध्यक्ष
भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन
जिला पूर्वी सिंहभूम






