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प्रबंधन के लिए दुखती रग बना सीसीएल बी एण्ड के क्षेत्र का कोनार परियोजना!


अलका मिश्रा

सीसीएल के बीएण्डके क्षेत्र का कोनार परियोजना प्रबंधन के लिए दुखती रग बन गया है , दर्द से तो कराह रहा है लेकिन ईलाज कराने की हिम्मत नहीं ।
  ज्ञात हो कि बोकारो जिला में बेरमो स्थित बीएण्डके प्रक्षेत्र का कोनार परियोजना राजनीतिक स्वार्थ , प्रबंधकीय लापरवाही एवं कोयला चोरी का मिशाल बन गया है , जिसके चक्र में बरवाबेड़ा और कुरपनिया ग्राम निवासी ग्रामीण धुल , धूआँ और माईन्स में हो रहे ब्लास्टिंग के कारण नारकीय जीवन जीने को अभिशप्त हैं ।
  ज्ञात हो कि कोनार परियोजना पूर्व सीएमडी श्री गोपाल सिंह का ड्रीम प्रोजेक्ट था..ग्रामीणों ने उनके आग्रह पर बिना शर्त अपनी जमीन बिना कोई मुआवजा लिये कोयला खनन हेतु दे दिया था।इसके एवज में गोपाल सिंह ने भी ग्रामीणों को कंपनी के नियमानुसार नियोजन दिया लेकिन लालफीताशाही के कारण मुआवजा भुगतान नहीं हो सका और इसी दरम्यान गोपाल सिंह रिटायर हो गये । तब से प्रबंधन सिर्फ कोयला उत्खनन में व्यस्त है और ग्रामीणों का मामला उपेक्षित है । बस्ती में स्वच्छ पेयजल का घोर अभाव है। खदान की गहराई के कारण कुएँ, चापाकल सभी बेकार हो गये हैं , ग्रामीणों को अपनी दैनिक जरूरतों के लिए दूर कोनार नदी से बोकारो थर्मल से उत्सर्जित छाई युक्त पानी ढ़ो कर लाना पड़ता है।दूसरी ओर,गांव से सटे रेलवे साईडिंग कोढ़ के कारण दिनरात कोयले का डस्ट उड़ाता रहता है जिसके कारण सांस लेना भी मुश्किल है और ग्रामीण फेफड़ों के संक्रमण का शिकार बन रहे हैं ।
 इन्हीं परिस्थितियों के कारण पिछले 20 अप्रैल को एआईसीसीटीयू ( एक्टू ) के राज्य अध्यक्ष एवं भाकपा माले नेता विकाश कुमार सिंह  अपने कुछ विस्थापित साथियों के साथ वर्तमान सीएमडी से मिले और इन सारी समस्याओं को उनके समक्ष रखा।जैसा कि विकाश सिंह ने बताया , सीएमडी ने उनकी बातों को काफी गंभीरतापूर्वक सुना तथा ग्रामीणों की जमीन का मुआवजा , घरों का मुआवजा , नियोजन जैसे मुद्दों  का तत्परता से निदान करने का आश्वासन तो दिया लेकिन जैसे ही परियोजना प्रभावित ग्रामीणों की शिफ्टिंग की प्रक्रिया को तेज करने और इसमें आ रही परेशानियों के समाधान हेतु गिरीडीह सांसद से वार्ता कर समस्या का समाधान करने का आग्रह किया तो उनके चेहरे पर बेचारगी और बेवसी झलकने लगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्वयं ही शिफ्टिंग की कोशिश करें , प्रबंधन इसमें कोई सहयोग नहीं कर सकता। जब कहा गया कि ऐसे तो माइंस बंद हो जाएगी तो उन्होंने कहा कि 20 मिलियन टन का माइंस है इतना उत्पादन की क्षतिपूर्ति के लिए हम दूसरा माइंस खोल लेंगे। यदि ग्रामीणों का सहयोग मिला तो ठीक अन्यथा हम ग्रामीणों की जमीन पर जबर्दस्ती खनन कार्य नहीं करेंगे ।
   विकाश सिंह ने रांची एक्सप्रेस संवाददाता से बात करते हुए कहा कि एक पब्लिक सेक्टर की कंपनी का प्रबंधन इस तरह गरीब विस्थापित ग्रामीणों के प्रति असंवेदनशील रहेगा तो गरीब ग्रामीण कहां जायेंगे ! यदि यही हाल रहा तो वो दिन दूर नहीं जब यहाँ भी धनबाद के बीसीसीएल कोलियरी क्षेत्र में हो रही भू-धसान वाली स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।
   दरअसल आज सभी सेक्टरों के सीईओ को , चाहे वे पब्लिक हों या प्राईवेट , गरीब जनता के प्रति निष्ठुर और संवेदनहीन बनाने की ट्रेनिंग दी गई है , जिससे अच्छे इंसान भी जिम्मेदार पद पर बैठकर निष्ठुर और कठोर बन जा रहे हैं । सच्चाई यह है कि पूंजीपतियों का एक छोटा सा गिरोह सरकार चला रहा है और ग्रामीणों के हक-अधिकार को बलपूर्वक लूट लेने की कोशिश कर रहा है ।
 अब देखते हैं कि सीएमडी साहब 20 मिलियन टन के इस परियोजना को चलाने की कोशिश करते हैं या इसे बंदकर इसके जैसे क्षमता वाला नये परियोजना की योजना सफलीभूत करते हैं।