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टाँडाबाड़ी(सोनारडीह,कतरास-धनबाद) में भूधसान: विस्तृत रिपोर्ट


अलका मिश्रा
धनबाद जिले के बाघमारा विधानसभा क्षेत्र के सोनारडीह ओपी अंतर्गत टाँडाबाड़ी बस्ती इन दिनों लगातार हो रहे भूधसान (land subsidence) के कारण गंभीर आपदा क्षेत्र बन गई है। यहाँ पिछले कुछ हफ्तों में एक के बाद एक कई बड़ी घटनाएँ हुई हैं, जिनमें घर जमींदोज हुए, लोग बेघर हुए और जान-माल का नुकसान हुआ।

  हालिया घटना में लगभग 10 घर जमीन में समा गए और कम से कम 4 लोग घायल हुए, जिनमें एक की हालत गंभीर बताई गई।गुरुवार की देर रात हुए इस हादसे में जमीन अचानक लगभग 10 से 15 फीट तक धंस गई, जिससे दर्जनों घरों में दरार पड़ गई और कई मकान पूरी तरह जमींदोज हो गए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल है। वही इस हादसे की चपेट में बाघमारा की पूर्व प्रखंड प्रमुख मीनाक्षी रानी गुड़िया का घर भी आ गया, जो पूरी तरह ध्वस्त हो गया। साथ ही एक चारपहिया वाहन और बाइक भी जमीन में फंस गए। कुछ रिपोर्टों में यह संख्या और अधिक बताई गई—21 से अधिक घर धंस गए और कई परिवार प्रभावित हुए। प्रशासन और बीसीसीएल (Bharat Coking Coal Limited) की टीम मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया गया।
टाँडाबाड़ी में यह कोई पहली घटना नहीं है एक महीने में 3 बार जमीन फटने की घटनाएँ दर्ज हुईं।हाल की एक घटना में 7–8 घर जमींदोज हो गए।एक अन्य घटना में 25 घर तक ध्वस्त होने की बात सामने आई। इसका मतलब है कि यह क्षेत्र लगातार सक्रिय खतरे (active subsidence zone) में है।       31 मार्च 2026 की घटना में 3 लोगों की मौत हुई थी और हालिया घटनाओं में कई लोग घायल,दर्जनों परिवार बेघर,लाखों रुपये की संपत्ति नष्ट,एक रिपोर्ट के अनुसार 19 परिवार बेघर हो गए, जिनमें से कुछ स्कूल या खुले में रहने को मजबूर हैं।

क्या है वजह:
    सवाल है कि लगातार हो रही भू-धसान की घटनाओं के पीछे आखिर क्या वजह है..स्थानीय लोगों और रिपोर्टों में इसके मुख्य कारण बताए गए हैं:

 (1) भूमिगत कोयला खनन
वर्षों से चल रहे कोयला खनन ने जमीन को अंदर से खोखला कर दिया है।
 (2) अवैध खनन 
ग्रामीणों का आरोप है कि कोयला माफिया और अवैध खनन ने स्थिति और गंभीर बना दी।
 (3) झरिया कोलफील्ड का प्रभाव
यह इलाका झरिया कोलफील्ड बेल्ट में आता है, जहां
जमीन के नीचे सुरंगें
कोयला आग 
गैस उत्सर्जन
जैसी समस्याएँ पहले से मौजूद हैं
घटना के बाद ग्रामीणों ने सड़क जाम और प्रदर्शन किया। बीसीसीएल अधिकारियों का घेराव किया गया,कुछ जगहों पर पथराव और तनाव की स्थिति भी बनी।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि प्रबंधन और प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है, जिससे उनका आशियाना उजड़ गया। वही इस घटना के बाद जनता मजदूर संघ के महामंत्री सिद्धार्थ गौतम उर्फ मनीष सिंह मौके पर पहुंचे और पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने प्रबंधन से तत्काल प्रभावितों को सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और बीसीसीएल के अधिकारी, सीआईएसएफ और पुलिस बल मौके पर पहूँचे और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार प्रभावित परिवारों को अस्थायी रुप से बेलगढ़िया और कर्माटांड में शिफ्ट किया जा रहा है।कुछ परिवार स्कूलों में शरण लिए हैं तो कुछ खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। मुआवजा और पुनर्वास को लेकर: जमीन/मकान का मुआवजा वैकल्पिक आवास आर्थिक सहायता पर चर्चा चल रही है। स्थानीय लोगों लोगों का आरोप है कि वर्षों से इस इलाके में भू-धसान का खतरा बना हुआ है लेकिन बार-बार चेतावनी के बावजूद न तो उनके स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था की गई और न ही कोई अन्य ठोस उपाय किए गए।अब सैकड़ों परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं और प्रशासन व प्रबंधन से  जल्द इसके स्थायी समाधान की माँग कर रहे हैं। वर्तमान स्थिति यही है कि क्षेत्र में अभी भी दरारें बढ़ रही हैं,लोग घरों में लौटने से डर रहे हैं,कई परिवार पलायन के बारे में सोच रहे हैं।साथ ही,यह इलाका उच्च जोखिम क्षेत्र घोषित करने की मांग हो रही है।बहरहाल, निष्कर्ष यही है कि टाँडाबाड़ी बस्ती का भूधसान सिर्फ एक दुर्घटना नहीं बल्कि संरचनात्मक संकट (structural disaster) है, जिसकी जड़ में वर्षों से चला आ रहा कोयला खनन, अवैध उत्खनन और कमजोर पुनर्वास नीति है। जब तक सुरक्षित पुनर्वास,खनन नियंत्रण और वैज्ञानिक सर्वेक्षण नहीं होते, तब तक यहाँ इस तरह की घटनाएँ जारी रहने की आशंका बनी रहेगी।