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बिहार में 26 लाख लोगों की होगी फैटी लिवर की जांच, 18 महीने तक चलेगा विशेष स्वास्थ्य अभियान


पटना: बिहार में लिवर से जुड़ी बीमारियों की समय रहते पहचान करने और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने व्यापक जांच अभियान की योजना बनाई है। 'स्वस्थ लिवर, स्वस्थ बिहार' पहल के तहत अगले 18 महीनों में 30 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 26 लाख लोगों की फैटी लिवर संबंधी जांच कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बीमारी के शुरुआती संकेतों का पता लगाना और जरूरतमंद लोगों को समय पर चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराना है। स्वास्थ्य विभाग की इस पहल से बड़ी संख्या में लोगों को लिवर संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूक करने और गंभीर स्थिति विकसित होने से पहले उचित कदम उठाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों पर विशेष ध्यान

फैटी लिवर की समस्या कई बार शुरुआती अवस्था में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाती। ऐसे में प्रभावित व्यक्ति को लंबे समय तक बीमारी की जानकारी नहीं मिल पाती। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 30 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को जांच अभियान के दायरे में शामिल करने की योजना बनाई है।

अगले डेढ़ साल में करीब 26 लाख लोगों की स्क्रीनिंग करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके माध्यम से संभावित मरीजों की पहचान कर उन्हें आगे की चिकित्सकीय जांच और आवश्यक सलाह उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।

समय रहते बीमारी की पहचान पर जोर

फैटी लिवर की समस्या में लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा वसा जमा होने लगती है। समय पर ध्यान नहीं देने और उचित देखभाल के अभाव में कुछ मामलों में यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए शुरुआती पहचान, संतुलित खानपान और नियमित शारीरिक गतिविधियों को महत्वपूर्ण माना जाता है।

स्वास्थ्य जागरूकता को भी मिलेगा बढ़ावा

'स्वस्थ लिवर, स्वस्थ बिहार' अभियान केवल जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके जरिए लोगों को लिवर की सेहत के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया जाएगा। स्वास्थ्य परामर्श के माध्यम से नागरिकों को खानपान में सुधार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सकेगा।

समयबद्ध लक्ष्य के साथ बड़ी स्वास्थ्य पहल

18 महीनों में 26 लाख लोगों की जांच का लक्ष्य बिहार में गैर-संचारी बीमारियों की रोकथाम और शुरुआती पहचान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच के बाद संभावित मरीजों को समय पर चिकित्सकीय सलाह, पुष्टि संबंधी जांच और जरूरी उपचार की सुविधा कितनी प्रभावी ढंग से मिलती है।