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सासाराम में नकली पुलिस बनकर लूट की तैयारी का आरोप, पांच गिरफ्तार


सासाराम। रोहतास जिले के शिवसागर थाना क्षेत्र में पुलिस ने ऐसे पांच लोगों को गिरफ्तार करने का दावा किया है, जो कथित तौर पर पुलिसकर्मी बनकर हाईवे पर आने-जाने वाले लोगों से वसूली और लूट की योजना बना रहे थे। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास से पुलिस की वर्दी, फर्जी पहचान पत्र, पुलिस लिखा बोर्ड, हथियार और अन्य सामान बरामद किए गए हैं।

हाईवे किनारे संदिग्ध गतिविधि की सूचना

पुलिस के मुताबिक, शनिवार रात करीब आठ बजे सूचना मिली कि कुछ संदिग्ध लोग हाईवे के किनारे एक चारपहिया वाहन में मौजूद हैं। इनमें कुछ लोगों ने पुलिस जैसी वर्दी पहन रखी थी और कथित तौर पर वाहन चालकों को पुलिस का प्रभाव दिखाकर पैसे वसूलने की तैयारी की जा रही थी।

सूचना मिलने के बाद सासाराम-1 एसडीपीओ के नेतृत्व में विशेष टीम बनाई गई। टीम ने संबंधित इलाके में पहुंचकर वाहन की जांच की और उसमें मौजूद पांच लोगों को हिरासत में लिया।

दारोगा और कमांडो की वर्दी में मिले लोग

पुलिस के अनुसार, हिरासत में लिए गए लोगों में एक व्यक्ति ने दारोगा जैसी वर्दी पहन रखी थी, जबकि दूसरा बिहार पुलिस कमांडो की वर्दी में था। बाकी तीन लोग सामान्य कपड़ों में थे।

पुलिस की जांच में वर्दी और पहचान से जुड़े दस्तावेजों की वास्तविकता संदिग्ध पाई गई। दारोगा की वर्दी पहने व्यक्ति के पास कथित तौर पर ऐसी पहचान थी, जिससे वह खुद को पुलिस अधिकारी बताने की कोशिश कर रहा था। पुलिस ने जांच के बाद सभी पांचों को गिरफ्तार कर लिया।

हथियार और पुलिस से जुड़े सामान बरामद

तलाशी के दौरान पुलिस ने दो देसी कट्टे और चार जिंदा कारतूस बरामद किए जाने की जानकारी दी है। इसके अलावा पिस्टल जैसी दिखने वाली एक खिलौना बंदूक, मोबाइल फोन और एक चारपहिया वाहन भी जब्त किया गया।

पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास से पुलिस लिखा बोर्ड, पुलिस का स्टीकर, कथित बिहार पुलिस पहचान पत्र, पुलिस की टोपी और कमांडो पैटर्न की पोशाक से जुड़े सामान भी मिले। वाहन पर पुलिस जैसी पहचान दिखाने वाले उपकरण और लाइट भी बरामद होने की बात कही गई है।

वाहन चालकों को निशाना बनाने की आशंका

पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई गई है कि गिरोह हाईवे पर पुलिस की पहचान का इस्तेमाल कर वाहन चालकों को रोकता और उनसे पैसे वसूलने या लूटने की कोशिश करता था। हालांकि, इस गिरोह ने पहले कितनी घटनाओं को अंजाम दिया, इसका पता जांच पूरी होने के बाद ही चलेगा।

पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर उनके संभावित सहयोगियों, पुराने मामलों और हाईवे से जुड़े अन्य अपराधों में उनकी भूमिका की जानकारी जुटा रही है।

पांचों आरोपी अलग-अलग इलाकों के रहने वाले

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपी रोहतास और कैमूर जिलों के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े हैं। पुलिस ने उनकी पहचान चेनारी निवासी रजनीश कुमार, शिवसागर निवासी प्रवीण सिंह, कैमूर क्षेत्र के दिवाकर कुमार और वीरेंद्र कुमार तथा करगहर निवासी इसरार आलम के रूप में बताई है।

आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच

जांच एजेंसियां गिरफ्तार लोगों के पिछले रिकॉर्ड को भी खंगाल रही हैं। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में से कुछ के खिलाफ पहले भी मामले दर्ज होने की जानकारी मिली है।

अब जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि क्या ये लोग किसी संगठित गिरोह के साथ जुड़े हुए थे या स्थानीय स्तर पर ही इस तरह की वारदात की योजना बनाई गई थी।

फर्जी पुलिस पहचान का इस्तेमाल जांच के केंद्र में

इस मामले में पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि कथित फर्जी पहचान पत्र और पुलिस से संबंधित सामान कहां से हासिल किए गए। यदि इन सामानों की खरीद या निर्माण में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।

पुलिस बरामद मोबाइल फोन, वाहन और अन्य सामान की भी जांच कर रही है, ताकि आरोपियों की गतिविधियों और संभावित संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।

हाईवे सुरक्षा को लेकर भी सवाल

NH-19 जैसे व्यस्त मार्ग पर पुलिस की वर्दी और पहचान का कथित इस्तेमाल कर लोगों को रोकने की योजना सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण मामला है। ऐसे मामलों में वास्तविक पुलिसकर्मी और फर्जी पुलिसकर्मी के बीच अंतर करना आम लोगों के लिए चुनौती बन सकता है।

पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्ष

सासाराम के शिवसागर इलाके में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन पर कथित तौर पर नकली पुलिस बनकर हाईवे पर वसूली और लूट की तैयारी करने का आरोप है। पुलिस ने उनके पास से वर्दी, कथित फर्जी पहचान पत्र, पुलिस संबंधी बोर्ड-स्टीकर, दो देसी कट्टे, कारतूस और अन्य सामान बरामद करने की जानकारी दी है। अब जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों का किसी बड़े गिरोह से संबंध था या नहीं और क्या वे पहले भी इसी तरीके से किसी वारदात में शामिल रहे हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।