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अनेकों पीड़ित महिला शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बयां किया अपना दर्द,निष्पक्ष जांच की मांग


मुकेश कुमार/स्टेट हेड बिहार/रांची एक्सप्रेस 

पटना(बिहार)।शिक्षा विभाग जमुई का 'शिक्षा भवन' भ्रष्टाचार और अवैध उगाही का केंद्र बनता जा रहा है।सेवा पुस्तिका संधारण में घूसखोरी का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब मातृत्व अवकाश/चाइल्ड केयर लीव जैसी संवेदनशील सुविधा के नाम पर अवैध वसूली का एक बड़ा मामला सामने आया है। बच्चों की देखभाल और अपने जायज मातृत्व अधिकार के लिए छुट्टी मांगने आ रही महिला शिक्षकों से कार्यालय के बाबुओं द्वारा एक निश्चित राशि(तय रेट)की खुलेआम मांग की जा रही है।

•संवेदना पर भारी पड़ी घूसखोरी की आदत•

चाइल्ड केयर लीव या मातृत्व अवकाश महिला कर्मचारियों का एक वैधानिक अधिकार है, ताकि वे अपने नौनिहालों की सही देखरेख कर सकें।लेकिन शिक्षा भवन जमुई में अधिकारियों और कर्मियों की सुस्ती तथा कथित रेट-लिस्ट के कारण महिला शिक्षकों का उत्पीड़न हो रहा है। अनेकों पीड़ित महिला शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अवकाश आवेदन की स्वीकृति कराने के नाम पर एक तय राशि मांगी जाती है।जो शिक्षिकाएं रुपये देने में असमर्थता जताती हैं,उनकी फाइलें जानबूझकर अटका दी जाती हैं और छुट्टियों के लिए महीनों चक्कर कटवाए जाते हैं।मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न का शिकार हो रहीं महिला शिक्षिकाएं
पीड़ित महिला शिक्षकों का कहना है कि मातृत्व के समय में जब उन्हें अपने नवजात बच्चे की देखभाल के लिए शांति और विश्राम की जरूरत होती है,उस वक्त उन्हें शिक्षा भवन के चक्कर काटने पड़ते हैं।दलालों और विभागीय कर्मियों की मिलीभगत से यह सिंडिकेट इस कदर हावी है कि बिना 'सुविधा शुल्क' दिए आवेदन आगे नहीं बढ़ता।इस अवैध वसूली के कारण महिला शिक्षकों में भारी रोष और मानसिक तनाव व्याप्त है।
•जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग•

शिक्षा विभाग में मातृत्व अवकाश जैसे संवेदनशील मुद्दे पर हो रहे इस बड़े भ्रष्टाचार को लेकर जिले भर के शिक्षकों में गहरा आक्रोश है।शिक्षक संगठनों और प्रबुद्ध नागरिकों ने जिलाधिकारी एवं शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस पूरे मामले की गुप्त और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि दोषी कर्मियों व बिचौलियों की पहचान कर उन पर तुरंत कड़ी अनुशासनात्मक व कानूनी कार्रवाई की जा सके।जिससे महिला शिक्षकों को इस शोषण से मुक्ति मिल सके।